ग्रीन कार्ड नियमों में बड़ा बदलाव, हजारों भारतीयों के अमेरिकी सपने को झटका

green card rules changes

अमेरिका में स्थायी नागरिकता यानी ग्रीन कार्ड पाने का सपना देख रहे हजारों भारतीयों के लिए ट्रंप प्रशासन की नई इमिग्रेशन नीति बड़ी चिंता बनकर सामने आई है। अमेरिकी सरकार ने ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब अस्थायी वीजा पर रह रहे विदेशी नागरिक अमेरिका में रहकर सीधे अपना स्टेटस ग्रीन कार्ड में परिवर्तित नहीं कर पाएंगे।

  1. ग्रीन कार्ड नियमों में बड़ा बदलाव
  2. भारतीय पेशेवरों की बढ़ी चिंता
  3. ट्रंप प्रशासन ने सख्त किया सिस्टम
  4. H-1B वीजा धारकों को झटका
  5. अमेरिका में बसने का सपना मुश्किल

नई नीति के अनुसार, ग्रीन कार्ड हासिल करने के इच्छुक लोगों को प्रक्रिया पूरी करने के लिए अपने देश वापस लौटना होगा और वहीं से इमिग्रेंट वीजा के लिए आवेदन करना पड़ेगा। इस फैसले का सबसे अधिक असर भारतीय पेशेवरों, अंतरराष्ट्रीय छात्रों और H-1B वर्क वीजा धारकों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी United States Citizenship and Immigration Services यानी USCIS ने शुक्रवार को इस नई नीति की घोषणा की। एजेंसी के मुताबिक, अब अमेरिका में रहकर स्टेटस एडजस्टमेंट को सामान्य प्रक्रिया नहीं माना जाएगा। हर आवेदन की अलग-अलग गहराई से जांच की जाएगी और केवल बेहद असाधारण परिस्थितियों में ही किसी व्यक्ति को अमेरिका में रहते हुए ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति दी जाएगी।

USCIS के प्रवक्ता जैक काहलर ने कहा कि सरकार अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम को उसके मूल कानूनी ढांचे के अनुसार लागू करना चाहती है। उनका कहना है कि वर्षों से कुछ लोग अस्थायी वीजा पर अमेरिका आकर स्थायी नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया का लाभ उठा रहे थे, जिससे इमिग्रेशन व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा था। अब सरकार इस पूरी प्रक्रिया को और सख्त तथा पारदर्शी बनाना चाहती है।

नई नीति के लागू होने से सबसे ज्यादा परेशानी उन भारतीय छात्रों और पेशेवरों को हो सकती है, जो लंबे समय से अमेरिका में रहकर नौकरी कर रहे हैं और भविष्य में ग्रीन कार्ड पाने की उम्मीद लगाए बैठे थे। अभी तक H-1B वर्क वीजा पर रहने वाले कई लोग अमेरिका में ही स्टेटस बदलकर स्थायी नागरिकता के लिए आवेदन कर देते थे। लेकिन अब उन्हें अपने देश लौटकर पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से ग्रीन कार्ड प्रक्रिया लंबी और अधिक जटिल हो सकती है। कई आवेदकों को अपने करियर, नौकरी और परिवार से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिका में पढ़ाई कर रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए भी यह नीति चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी और स्थायी निवास का रास्ता अब पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकता है।

अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने भी इस नीति का समर्थन किया है। विभाग का कहना है कि यह कदम इमिग्रेशन सिस्टम में मौजूद खामियों और नियमों के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है। सरकार का दावा है कि कुछ लोग अस्थायी वीजा का उपयोग स्थायी बसने के उद्देश्य से कर रहे थे, जिससे इमिग्रेशन प्रक्रिया का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा था।

भारतीय समुदाय पर इस फैसले का विशेष प्रभाव पड़ने की संभावना है। अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है और बड़ी संख्या में भारतीय तकनीकी, मेडिकल, शिक्षा और शोध क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। हर साल हजारों भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाते हैं और उनमें से कई वहीं नौकरी कर ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में शामिल हो जाते हैं।

आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024 में लगभग 49,700 भारतीय मूल के लोगों ने ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के माध्यम से अमेरिकी नागरिकता हासिल की थी। भारतीय नागरिक अमेरिका में स्थायी नागरिकता पाने वाले सबसे बड़े समूहों में शामिल हैं। इस सूची में मैक्सिको के बाद भारतीयों का दूसरा स्थान रहा। कुल अमेरिकी नागरिकता पाने वालों में भारतीयों की हिस्सेदारी लगभग 6.1 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

नई नीति के बाद इमिग्रेशन वकीलों और विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि जिन लोगों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पहले से चल रही है, उन्हें अपने दस्तावेज और कानूनी स्थिति को लेकर अधिक सतर्क रहना होगा। साथ ही नई नीति के प्रभाव और संभावित कानूनी चुनौतियों को समझना भी जरूरी होगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन लंबे समय से सख्त इमिग्रेशन नीति का समर्थन करता रहा है। अमेरिका फर्स्ट नीति के तहत सरकार पहले भी कई बार वीजा नियमों और प्रवासी कानूनों को सख्त बनाने के कदम उठा चुकी है। नई ग्रीन कार्ड नीति को भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

फिलहाल इस फैसले ने अमेरिका में बसे भारतीय समुदाय के बीच चिंता बढ़ा दी है। कई लोग अब अपने भविष्य, नौकरी और स्थायी निवास को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। आने वाले समय में यह नीति अमेरिकी इमिग्रेशन व्यवस्था और भारतीय पेशेवरों दोनों के लिए बड़ा असर डाल सकती है।

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