मोदी सरकार के प्रभावशाली मंत्रियों में गिने जाने वाले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का मंत्रालय इन दिनों राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। उनके निजी स्टाफ से जुड़े चार अधिकारियों को अचानक हटाए जाने के बाद विपक्ष ने सरकार पर सवालों की बौछार कर दी है। कांग्रेस का कहना है कि एक साथ इतने अधिकारियों की विदाई को केवल सामान्य प्रशासनिक बदलाव मानना आसान नहीं है। जयराम रमेश और सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया के जरिए इस पूरे घटनाक्रम पर केंद्र सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेताओं ने इसे कथित ‘चंदा दो, धंधा लो’ मामले से जोड़ते हुए जवाब मांगा है। वहीं, यह फेरबदल ऐसे समय सामने आया है, जब भूपेंद्र यादव का सरकारी बंगला टीएमसी से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम और बैठकों को लेकर पहले ही सुर्खियों में रहा है।
भूपेंद्र यादव के निजी स्टाफ से चार लोगों को एक साथ हटाने के फैसले ने राजनीतिक गलियारों में बढ़ाई हलचल
केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव के कार्यालय में हुए अचानक बदलाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उनके स्टाफ से चार लोगों को हटाए जाने की खबर सामने आने के बाद दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं। कांग्रेस का आरोप है कि इतने बड़े स्तर पर एक साथ अधिकारियों को हटाया जाना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया जैसा नहीं दिखता। विपक्ष इस फैसले के पीछे की वजह सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है। हालांकि, अधिकारियों को हटाए जाने के वास्तविक कारणों को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
जयराम रमेश और सुप्रिया श्रीनेत ने केंद्र सरकार को घेरा, स्टाफ में बदलाव के पीछे की वजह पर मांगा जवाब
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस मामले को कथित ‘चंदा दो, धंधा लो’ विवाद से जोड़ते हुए भूपेंद्र यादव के मंत्रालय पर निशाना साधा। उन्होंने मंत्रालय को ‘प्रवचन मंत्रालय’ तक करार दिया। वहीं, सुप्रिया श्रीनेत ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई अधिकारियों को एक साथ हटाना सामान्य घटनाक्रम नहीं माना जा सकता। कांग्रेस ने सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि आखिर ऐसा क्या हुआ, जिसके बाद अचानक बड़े स्तर पर स्टाफ में बदलाव करना पड़ा।
मंत्री के कार्यालय में हुए फेरबदल को लेकर पीएमओ तक पहुंची चर्चा, विपक्ष ने फैसले की टाइमिंग पर उठाए सवाल
कांग्रेस की ओर से यह भी दावा किया जा रहा है कि स्टाफ में बदलाव का मामला प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ा हो सकता है। जिन अधिकारियों के हटाए जाने की चर्चा है, उनमें मुख्य निजी सचिव और अतिरिक्त निजी सचिव स्तर के अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। अमर सिंह, शैलेश कुमार सिंह और आयुष शरण जैसे नाम इस पूरे घटनाक्रम के बाद चर्चा में हैं। हालांकि, विपक्ष के आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने आना बाकी है। फिलहाल कांग्रेस फैसले की टाइमिंग को लेकर लगातार सरकार से जवाब मांग रही है।
टीएमसी सांसदों से जुड़ी बैठकों के बाद चर्चा में आया था भूपेंद्र यादव का बंगला, वायरल तस्वीरों ने बढ़ाया सियासी तापमान
इस घटनाक्रम से पहले भूपेंद्र यादव का सरकारी बंगला टीएमसी से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर चर्चा में आया था। पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद टीएमसी में बढ़ी राजनीतिक हलचल के बीच कुछ नेताओं और सांसदों की बैठक से जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। बताया गया कि यह बैठक भूपेंद्र यादव के बंगले पर हुई थी। इसी पृष्ठभूमि में अब उनके निजी स्टाफ से लोगों को हटाए जाने के बाद कांग्रेस दोनों घटनाओं को जोड़कर केंद्र सरकार पर राजनीतिक हमला कर रही है।
संघ से छात्र राजनीति और फिर बीजेपी के बड़े रणनीतिकार तक, भूपेंद्र यादव का राजनीतिक सफर रहा बेहद अहम
भूपेंद्र यादव बीजेपी के प्रमुख रणनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं। राजस्थान से राज्यसभा पहुंचे यादव का पारिवारिक जुड़ाव गुरुग्राम के जमालपुर गांव से रहा है, जबकि उनकी पढ़ाई राजस्थान में हुई। उनके पिता कदम सिंह यादव रेलवे में कार्यरत रहे और लंबे समय तक अजमेर में तैनात थे। स्कूल के दिनों में भूपेंद्र यादव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और कॉलेज पहुंचने के बाद छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने बार काउंसिल में काम किया और धीरे-धीरे बीजेपी संगठन में अपनी जगह मजबूत की। बिहार सहित कई राज्यों में रणनीतिक जिम्मेदारियां संभाल चुके भूपेंद्र यादव आज पार्टी के अहम नेताओं में शामिल हैं। ऐसे में उनके मंत्रालय के स्टाफ में हुआ अचानक बदलाव अब बड़े राजनीतिक विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है।





