भागवत जाएंगे अमेरिका, RSS पर अमेरिकी संस्था की मांग से क्यों गरमाया माहौल?

Bhagwat to visit the US

भागवत जाएंगे अमेरिका, RSS पर अमेरिकी संस्था की मांग से क्यों गरमाया माहौल?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत 29 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर जाने वाले हैं। लेकिन अमेरिका पहुंचने से पहले ही उनका दौरा राजनीतिक और कूटनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। वजह है अमेरिका की यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम यानी USCIRF की ओर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर की गई टिप्पणी और उस पर भारत सरकार की तीखी प्रतिक्रिया। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि USCIRF ने RSS के खिलाफ क्या कहा, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि अमेरिकी धरती पर भागवत के दौरे से पहले संघ को लेकर ऐसी बयानबाजी क्यों तेज हुई?

USCIRF ने क्या कहा?

USCIRF ने RSS पर गंभीर आरोप लगाते हुए अमेरिकी सरकार से संघ से जुड़े लोगों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करने की सिफारिश की है। आयोग के कुछ सदस्यों ने यह भी कहा कि RSS से जुड़े लोगों के साथ कूटनीतिक संवाद नहीं होना चाहिए, भले ही वे भारत सरकार का हिस्सा क्यों न हों। USCIRF के मुताबिक RSS भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित हमलों और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों से जुड़ा रहा है।

यह पहली बार नहीं है जब USCIRF ने भारत को लेकर ऐसी टिप्पणियां की हैं। आयोग पहले भी भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताता रहा है। भारत सरकार हालांकि इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है और इन्हें पूर्वाग्रह से प्रेरित तथा तथ्यहीन बताती रही है।

भारत का पलटवार—‘अपना एजेंडा चला रहा संगठन’

USCIRF की ताजा टिप्पणी पर विदेश मंत्रालय ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह संगठन पहले भी भारत के बारे में विवादित राय रखता रहा है। उन्होंने USCIRF को पूर्वाग्रह से ग्रस्त बताते हुए कहा कि उसका अपना एजेंडा है और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल हैं।

भारत के इस रुख का सीधा संदेश है कि नई दिल्ली USCIRF की सिफारिशों को अमेरिकी सरकार की आधिकारिक नीति के रूप में नहीं देखती। यानी आयोग की टिप्पणी और अमेरिकी प्रशासन की नीति—इन दोनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

अमेरिका में RSS के समर्थन में भी आवाज

दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी धरती पर इस मुद्दे पर एकतरफा माहौल नहीं है। अमेरिका में हिंदू समुदाय से जुड़े संगठन HinduPACT ने USCIRF की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई है। उसका आरोप है कि आयोग भारत और RSS के खिलाफ एकतरफा नैरेटिव को बढ़ावा दे रहा है।

HinduPACT का कहना है कि RSS को लेकर आपराधिक छवि बनाने की कोशिश हिंदू समुदाय के नेतृत्व को बदनाम करने का प्रयास है। इस तरह अमेरिका में भी इस मुद्दे पर दो अलग-अलग नैरेटिव दिखाई दे रहे हैं—एक तरफ USCIRF के आरोप हैं, तो दूसरी तरफ भारतीय-अमेरिकी हिंदू संगठनों की ओर से उसका विरोध।

भागवत के दौरे पर क्यों टिकी नजर?

मोहन भागवत का अमेरिका दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारतीय मूल के हिंदू समुदाय का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ा है। ऐसे में भागवत की अमेरिकी यात्रा केवल एक संगठन प्रमुख का विदेश दौरा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, हिंदू समाज और प्रवासी भारतीय समुदाय से संवाद के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा सकती है।

भागवत के कार्यक्रमों में भारतीय मूल के लोगों और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक समूहों से संवाद महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। अमेरिका के बाद कनाडा और ब्रिटेन का दौरा भी इसी व्यापक संपर्क अभियान का हिस्सा है।

असली विवाद क्या है?

पूरे विवाद की सबसे अहम कड़ी यही है कि क्या USCIRF की टिप्पणी को अमेरिकी सरकार की आधिकारिक सोच माना जाए? जवाब है—जरूरी नहीं। USCIRF एक स्वतंत्र अमेरिकी संघीय आयोग है, जो अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर अमेरिकी सरकार और कांग्रेस को सिफारिशें देता है। उसकी सिफारिशें अपने आप अमेरिकी विदेश नीति या प्रतिबंध में बदल नहीं जातीं।

इसलिए भागवत के दौरे से पहले USCIRF की टिप्पणी को एक राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश के रूप में जरूर देखा जा सकता है, लेकिन इसे अमेरिकी सरकार के अंतिम फैसले के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा।

बड़ा सवाल—आगे क्या?

मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे के दौरान अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि अमेरिकी प्रशासन, भारतीय मूल के समुदाय और विभिन्न संगठनों की प्रतिक्रिया क्या रहती है। भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह USCIRF के आरोपों को विश्वसनीय नहीं मानता।

यानी भागवत का दौरा अब केवल प्रवासी भारतीयों से संवाद तक सीमित नहीं रह गया है। अमेरिका में RSS को लेकर छिड़ी बहस ने इसे भारत-अमेरिका संबंध, धार्मिक स्वतंत्रता, हिंदू संगठनों की वैश्विक छवि और अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के समुदाय की भूमिका से जोड़ दिया है।

सबसे बड़ा संदेश यही है—भागवत अमेरिका जाएंगे अपने एजेंडे के साथ, लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही RSS को लेकर अमेरिका में एक अलग बहस शुरू हो चुकी है। अब देखना होगा कि यह बहस उनके दौरे के दौरान किस दिशा में जाती है।

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