करीबी मुकाबले में बीजेपी-टीएमसी आमने-सामने, मतदाता सूची में बदलाव और पिछली हार-जीत का गणित बनेगा निर्णायक
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण का मतदान जारी है। राज्य की राजनीति एक बार फिर बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee अपनी सत्ता बचाने की कोशिश में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर बीजेपी पूरे दमखम के साथ सत्ता परिवर्तन का सपना देख रही है।
बंगाल चुनाव 2026
पहले चरण का ‘रण’..
असली परीक्षा शुरु…
क्या बदलेगी सत्ता की तस्वीर?
इस चुनावी मुकाबले को समझने के लिए 2021 के विधानसभा चुनावों पर नजर डालना बेहद जरूरी है। उस चुनाव में बीजेपी ने अप्रत्याशित प्रदर्शन करते हुए खुद को राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में स्थापित किया था। हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने बहुमत हासिल कर सत्ता बरकरार रखी, लेकिन कई सीटों पर जीत का अंतर बेहद कम रहा, जिसने आगामी चुनावों के लिए नई संभावनाएं खोल दीं।
2021 का गणित: छोटे अंतर, बड़ा असर
2021 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने लगभग 37 सीटें ऐसी जीती थीं, जहां जीत का अंतर 5 प्रतिशत से भी कम था। यही आंकड़ा 2026 के चुनाव में सबसे बड़ा फैक्टर बनकर उभर रहा है। इन सीटों पर थोड़ा सा भी वोट प्रतिशत का बदलाव परिणाम को पूरी तरह पलट सकता है।
राज्य के नादिया जिले की करीमपुर सीट, जहां जीत का अंतर करीब 12 हजार वोट था, और मुर्शिदाबाद की डोमकल सीट, जहां यह अंतर लगभग 47 हजार वोट रहा, ऐसे उदाहरण हैं जो बताते हैं कि मुकाबला कितना करीबी रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर इन सीटों पर वोटिंग पैटर्न में मामूली बदलाव भी होता है, तो परिणाम पूरी तरह बदल सकते हैं।
मतदाता सूची में बदलाव: सियासत का नया मोड़
इस बार चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा मतदाता सूची में हुए बदलाव को लेकर हो रही है। कई विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने या संशोधन की खबरें सामने आई हैं। खासकर भवानीपुर सीट, जहां से Mamata Banerjee खुद चुनाव लड़ चुकी हैं, वहां करीब 40 हजार से ज्यादा वोट कटने की बात कही जा रही है।
राजनीतिक तौर पर यह बदलाव बेहद अहम माना जा रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया का असर खास वर्ग के वोटों पर पड़ सकता है, जिससे चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। वहीं सत्तारूढ़ दल इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बता रहा है।
बीजेपी की उम्मीदें: क्या सपना होगा पूरा?
भारतीय जनता पार्टी ने 2021 के चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 70 से ज्यादा सीटें हासिल की थीं। यह उसके लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि थी, क्योंकि इससे पहले पार्टी बंगाल में हाशिए पर थी। अब 2026 में पार्टी का लक्ष्य सिर्फ विपक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सत्ता हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है। बीजेपी को उम्मीद है कि जिन सीटों पर पिछली बार हार का अंतर कम था, वहां इस बार जीत हासिल की जा सकती है। इसके अलावा पार्टी राज्य में अपने संगठन को मजबूत करने और स्थानीय मुद्दों को उठाने पर भी जोर दे रही है।
तृणमूल की चुनौती: सत्ता बचाना आसान नहीं
तृणमूल कांग्रेस के लिए इस बार चुनाव पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है। एक ओर बीजेपी का बढ़ता जनाधार है, तो दूसरी ओर मतदाता सूची में बदलाव और स्थानीय असंतोष जैसे मुद्दे भी पार्टी के सामने हैं। हालांकि Mamata Banerjee की व्यक्तिगत लोकप्रियता और उनके द्वारा चलाई गई कल्याणकारी योजनाएं अभी भी पार्टी की सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही हैं। महिला वोटर्स, ग्रामीण इलाकों और अल्पसंख्यक वर्ग में तृणमूल का मजबूत आधार है, जो चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है।
क्या कहता है सियासी विश्लेषण?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार का चुनाव पूरी तरह माइक्रो-मैनेजमेंट और बूथ स्तर की रणनीति पर निर्भर करेगा। जिन सीटों पर जीत का अंतर कम था, वहां हर वोट की अहमियत बढ़ गई है। मतदाता सूची में बदलाव, स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों की छवि और चुनावी रणनीति—ये सभी कारक मिलकर परिणाम तय करेंगे।
कांटे की टक्कर में किसका पलड़ा भारी?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 अब अपने निर्णायक चरण की ओर बढ़ रहा है। पहले चरण नजरें मतदान और उसके परिणामों पर टिक गई हैं। बीजेपी जहां सत्ता परिवर्तन का दावा कर रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। स्पष्ट है कि इस बार मुकाबला बेहद कांटे का है और छोटी-छोटी बातें भी बड़ा असर डाल सकती हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या बीजेपी पहली बार बंगाल की सत्ता तक पहुंच पाती है या Mamata Banerjee एक बार फिर अपने किले को बचाने में सफल रहती हैं।





