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बांग्लादेश में तख्तापलट : भारत के पड़ोसी देशों में भारत विरोधी सरकार, और चीन का बढ़ता दखल!

DigitalDesk by DigitalDesk
August 6, 2024
in दिल्ली, मुख्य समाचार, राजनीति, स्पेशल
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Bangladesh coup India Neighboring countries China South Asia
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बांग्लादेश में हुए तख्तापलट ने दक्षिण एशिया क्षेत्र में उथल-पुथल मचा दी है। शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद के साथ देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है और उनका भविष्य अनिश्चित है। लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है कि आखिर वहां पर ऐसा क्यों हुआ और अब भारत के पास क्या विकल्प हैं।

  • बांग्लादेश में तख्तापलट से दक्षिण एशिया क्षेत्र में उथल-पुथल
  • भारत के 6 पड़ोसी देशों में अशांति बनी चुनौती
  • पड़ोसी देशों में चीन का दखल बढ़ रहा है!
  • अधर में शेख हसीना का भविष्य

बांग्लादेश में इसी साल चुनाव हुए चुनाव से पहले ही विपक्ष का दमन शुरू हो गया था। शेख हसीना को लगता था कि फौज के हाथ मजबूत कर वे सब दे जो वह चाहती है। फौजी अधिकारियों के भ्रष्टाचार को भी अनदेखा करके वे उन्हें अपने पाले में कर लेंगी। जिससे वो उनके प्रति वफादार बने रहेंगे।

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बता दें 2009 में जब अर्धसैनिक बांग्लादेश राइफल्स ने तख्तापलट के प्रयास किये थे तो फौज ने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना का ही साथ दिया था। तो फौज ने अब शेख हसीना को दरकिनार क्यों कर दिया है? हालांकि यह पूरी तरह से सच नहीं है। क्योंकि यह भी सच है कि शेख हसीना जिस विमान से भारत आईं थीं, वह बांग्लादेशी वायुसेना का विमान ही विमान था। न ही वहां के सैन्य प्रमुख शेख हसीना के आलोचक हैं। लेकिन ऐसे में सवाल यह उठता है कि ऐसे हालात क्यों बने। इस बार सेना के हाथ-पैर क्यों फूल गए? क्यों वह शेख हसीना के साथ खड़ी नहीं हो सकी। कई साल से यही तर्क दिया जा रहा था कि बांग्लादेश जैसी स्थिति में जहां विपक्ष बहुत कमजोर है। वहां फौज ही अब विपक्ष की भूमिका निभाएगी। समस्या तो यह भी है कि अगर सेना तब ऐसा करती है, तो उसे कई तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता। बांग्लादेश इसका बिल्कुल भी सामना नहीं कर सकता। बर कुछ का निष्कर्ष है कि फौज दबाव से कुछ राहत चाहती थी, इसलिए वह अंतरिम नागरिक सरकार बना रही है, जिसके सफल होने की कोई संभावना नहीं है। ऐसे में हसीना की सत्ता में वापसी की गुंजाइश कायम रहेगी।

अमेरिका कर चुका है चुनाव में धांधली की निंदा!

यह भी नहीं भूलना चाहिए कि अमेरिका ने बांग्लादेश में हुए चुनावों में हुई धांधली की तो निंदा की लेकिन पाकिस्तान के चुनावों को सराहा था। जबकि पाकिस्तान में भी चुनावी धांधली आमबात है।
इसी की एक प्रतिक्रिया में अपनी हाल की वॉशिंगटन यात्रा के दौरान बातचीत करने से इनकार कर दिया था और इसके बजाय प्रवानि नी अमेरिका-बांग्लादेश चैंबर ऑफ कॉमर्स के कार्यालयों में ले बैठकें की थीं। दांव पर बांग्लादेश द्वारा खोजे गए ना विशालकाय ऑफशोर गैस भंडार हैं। चीन के साथ हसीना ह की सांठगांठ अमेरिका को रास नहीं आ रही थी। लेकिन वे बीजिंग के प्रति भी बेसब्र बनीं हुई थीं। वे अपनी चीन यात्रा को बीच में ही छोड़कर गुस्से में घर लौट आई थीं।

1971 के योद्धाओं के परिजना को आरक्षण देने की मांग

दरअसल 1971 के योद्धाओं और उनके परिवारों के लिए आरक्षण का कोटा मुद्दा बन गया और इसे लेकर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए। ध्यान रहे कि उन विरोध-प्रदर्शनों के बाद बांग्लादेश के सर्वोच्च न्यायालय ने अधिकांश कोटा को खत्म कर दिया था। इन आरोपों को लेकर कि शेख हसीना तानाशाह और गैर-लोकतांत्रिक होनेा का भी आरोप लगाया गया। वैसे भी बांग्लादेश में बार-बार किसी न किसी मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन होते रहते हैं।

बांग्लादेश में असुरक्षित ​भारतीय

बांग्लादेश में अब सेना सरकार का समर्थन करती है तो चीन से भी नजदीकी बढ़ेगी। हिंदुओं 14 पर हमले बढ़ेंगे। बांग्लादेश में 92% अपनी मुस्लिम हैं जबकि लगभग लन 8% हिंदू हैं। 1971 में बाद बांग्लादेश के गठन के हटा समय यहां 18% हिंदू थे।

पड़ोसी देशों में चीन का बढ़ता दखल

पाकिस्तान में मौजूदा शहबाज शरीफ सरकार वहां की आर्मी के प्रमुख आसिम मुनीर के इशारों पर भारत विरोधी एजेंडे पर काम कर रही।
पाक को हथियारों की सप्लाई चीन करता है,, जो आतंकवादियों – घुसपैठियों को सौंप दिए जाते हैं।
चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग लगातार भारत के खिलाफ कूटनीतिक, सामरिक और व्यापारिक स्तर पर मुश्किलें पैदा कर रहे हैं। आर्थिक रूप से भारत की तेज बढ़त को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बिरोधी रवैया अपनाता रहा।
श्रीलंका में विक्रमासिंघे की सरकार भी चीन समर्थक है। चीन के जासूसी शिप भारतीय समुद्री सीमा की लगातार मैपिंग करते हैं।

म्यांमार में पिछले चार साल से सैन्य सरकार का कब्जा है। यह सैन्य सरकार चीन की समर्थक है। पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय अलगाववादी संगठनों को समर्थन देती है। रोहिंग्या समस्या भी म्यांमार की सैन्य सरकार के कारण है।

नेपाल में भी प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के रुप में अभी चीन परस्त कम्युनिस्ट सरकार है।। चीन के साथ उसने कई भारत विरोधी नए करार किए।

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Tags: #Bangladesh coup#China #South Asia#India Neighboring countries
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