आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के 8 साल पूरे हो गए हैं। 23 सितंबर 2018 को शुरू हुई इस योजना का मूल उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को महंगे अस्पताल इलाज से होने वाले आर्थिक बोझ से बचाना था। अब सरकारी आंकड़ों के मुताबिक योजना के तहत 12 करोड़ से ज्यादा परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर दिया जा रहा है। वहीं 21 सितंबर 2026 तक 48.51 करोड़ से ज्यादा आयुष्मान कार्ड जारी हो चुके थे।
1. 12 करोड़ परिवारों से 60 करोड़ लाभार्थियों तक
आयुष्मान भारत की शुरुआती संरचना में सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के आधार पर देश की आर्थिक रूप से कमजोर आबादी के करीब 40 प्रतिशत हिस्से को लक्षित किया गया था। बाद में लाभार्थी आधार का विस्तार हुआ। जुलाई 2026 तक केंद्र सरकार ने बताया कि मूल लाभार्थी आधार को 10.74 करोड़ से बढ़ाकर 12 करोड़ परिवार किया गया। इसके अलावा आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के परिवारों को जोड़ा गया। 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी कवरेज का विस्तार किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठवीं वर्षगांठ पर कहा कि अब 60 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों को 5 लाख रुपये के वार्षिक स्वास्थ्य कवर तक पहुंच हासिल है।
2. 13.25 करोड़ अस्पताल दाखिले, ₹2.03 लाख करोड़ का इलाज
योजना का पैमाना सिर्फ कार्ड बनाने तक सीमित नहीं है। 31 अगस्त 2026 तक सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 13.25 करोड़ अस्पताल दाखिलों के लिए 2.03 लाख करोड़ रुपये मूल्य के उपचार को अधिकृत किया गया। इसके लिए 38 हजार से ज्यादा सरकारी और निजी अस्पतालों का नेटवर्क उपलब्ध है।
यही आंकड़ा बताता है कि आयुष्मान भारत का सबसे बड़ा प्रभाव अस्पताल में भर्ती होने वाले महंगे इलाज के दौरान परिवार की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करने से जुड़ा है।
3. अब सिर्फ बीमा नहीं, पूरा स्वास्थ्य तंत्र
आयुष्मान भारत को केवल अस्पताल में मुफ्त इलाज की योजना के तौर पर देखना अधूरा होगा। इसके साथ आयुष्मान आरोग्य मंदिर, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और पीएम-आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन जैसे स्तंभ जुड़े हैं। सरकार के अनुसार आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में अब तक 500 करोड़ से ज्यादा विजिट दर्ज हो चुकी हैं।
यानी मॉडल तीन स्तरों पर काम करने की कोशिश करता है। बीमारी से पहले प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा, बीमारी के दौरान अस्पताल में उपचार और डिजिटल व्यवस्था के जरिए स्वास्थ्य रिकॉर्ड तथा सेवाओं को जोड़ना।
4. सबसे बड़ा सवाल जेब से होने वाला खर्च
भारत में लंबे समय से स्वास्थ्य क्षेत्र की बड़ी चुनौती इलाज पर परिवारों का अपनी जेब से खर्च रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार कुल स्वास्थ्य खर्च में लोगों की जेब से होने वाला हिस्सा 2014-15 के 62.6 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 43.4 प्रतिशत हुआ। हालांकि इसे पूरी तरह केवल आयुष्मान भारत का परिणाम मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि स्वास्थ्य खर्च पर कई सरकारी योजनाओं और स्वास्थ्य ढांचे का संयुक्त प्रभाव पड़ता है।
5. आठ साल बाद अगली चुनौती पहुंच से इस्तेमाल तक
आयुष्मान भारत ने स्वास्थ्य सुरक्षा का बड़ा आधार तैयार किया है, लेकिन अगला सवाल है कि हर पात्र व्यक्ति तक कार्ड, अस्पताल और गुणवत्तापूर्ण उपचार की पहुंच कितनी आसान बनती है। जुलाई 2026 तक योजना सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू थी और इसमें राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी की सुविधा भी है, यानी पात्र लाभार्थी दूसरे राज्य के सूचीबद्ध अस्पताल में भी कैशलेस इलाज ले सकता है।
बड़ी तस्वीर: आठ साल में आयुष्मान भारत का दायरा 5 लाख रुपये के स्वास्थ्य कवर से आगे बढ़कर एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे का हिस्सा बन चुका है। 12 करोड़ परिवार, 48.51 करोड़ से ज्यादा कार्ड और 13.25 करोड़ अस्पताल दाखिले इसका पैमाना बताते हैं। अब इसकी अगली परीक्षा केवल कवरेज बढ़ाने की नहीं, बल्कि पात्र लोगों तक समय पर कार्ड, अस्पताल, गुणवत्तापूर्ण उपचार और निर्बाध भुगतान व्यवस्था पहुंचाने की होगी।