अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा हुई और सुगम, 20.64 करोड़ से संवरे 6 प्रमुख आश्रम
अयोध्या में धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप पर्यटन विभाग ने 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर स्थित छह प्रमुख प्राचीन आश्रमों का 20.64 करोड़ रुपये की लागत से कायाकल्प पूरा कर लिया है।
- 20 करोड़ से संवरे छह आश्रम
- श्रद्धालुओं को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
- 84 कोसी परिक्रमा होगी और सुगम
- आस्था के साथ पर्यटन को बढ़ावा
- स्थानीय रोजगार को मिलेगा नया संबल
इस विकास कार्य से श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाओं से युक्त बेहतर यात्रा अनुभव मिलेगा और परिक्रमा मार्ग पहले की तुलना में अधिक सुगम एवं सुविधाजनक बन गया है।
पर्यटन विभाग की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत श्रवण कुमार आश्रम, आस्तिक आश्रम, ऋषि च्यवन आश्रम, मेधा ऋषि आश्रम, श्री बन्धू बाबा आश्रम और महर्षि बामदेव आश्रम का व्यापक विकास किया गया है। मई 2023 में शुरू हुए इस कार्य को उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कार्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने सफलतापूर्वक पूरा किया। इन आश्रमों में आधुनिक विश्राम गृह, स्वच्छ शौचालय, शुद्ध पेयजल व्यवस्था, आकर्षक प्रवेश द्वार, साइनेज और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं।
परियोजना की विशेषता ‘सीटिंग इंटरप्रिटेशन वॉल’ है, जहां श्रद्धालु विश्राम करने के साथ-साथ आश्रमों के पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। इससे परिक्रमा केवल धार्मिक अनुष्ठान न रहकर एक ज्ञानवर्धक और सांस्कृतिक अनुभव भी बनेगी।
सभी आश्रमों में पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं। श्रद्धालुओं के लिए सात्विक भोजन उपलब्ध कराने हेतु दुकानों का निर्माण किया गया है। आधुनिक टॉयलेट ब्लॉक और स्वच्छता सुविधाएं यात्रा को अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाएंगी। विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को इसका लाभ मिलेगा।
पर्यटन विभाग के अनुसार, इस विकास कार्य से धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी। बढ़ती पर्यटक संख्या से स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग, परिवहन सेवाओं और छोटे व्यवसायों को लाभ होगा। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
राम मंदिर के उद्घाटन के बाद अयोध्या वैश्विक धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरी है। ऐसे में 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर विकसित ये आश्रम श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं प्रदान करते हुए अयोध्या की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत करेंगे। यह पहल आस्था, सुविधा और विकास के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है।





