डिमोना पर हमले से बदला जंग का समीकरण?
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने शनिवार रात एक नए और खतरनाक मोड़ ले लिया, जब ईरान ने इजरायल के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक शहर डिमोना पर मिसाइल हमले का दावा किया। यह वही शहर है जहां इजरायल का परमाणु रिएक्टर स्थित है और जिसे दुनिया के सबसे सुरक्षित इलाकों में गिना जाता रहा है। ईरान का कहना है कि इस हमले के बाद जंग का समीकरण तेजी से बदल रहा है, जबकि इजरायल इस दावे को सीमित नुकसान तक बता रहा है।
- डिमोना तक पहुंची ईरानी मिसाइल
- आयरन डोम पर उठे सवाल
- इजरायल-अमेरिका दोनों निशाने पर
- नुकसान पर दावों की जंग
- हिजबुल्लाह से दोहरा दबाव
ईरान की इस कार्रवाई को उसके सैन्य अभियान “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस” का हिस्सा बताया गया है, जो अब अपने चौथे चरण में पहुंच चुका है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के अनुसार यह 73वीं लहर थी, जिसमें पहले से ज्यादा सटीक और उन्नत हथियारों का इस्तेमाल किया गया। इस दावे ने वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और युद्ध रणनीतियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
शनिवार रात हुए हमले में ईरान ने तीन तरह की मिसाइलों का इस्तेमाल करने का दावा किया—फत्ताह हाइपरसोनिक मिसाइल, कद्र और एमाद बैलिस्टिक मिसाइलें। फत्ताह मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत उसकी बेहद तेज गति है, जिसे रोकना आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए भी चुनौती माना जाता है। इसके साथ ही ड्रोन हमलों को भी शामिल किया गया, जिससे हमले की जटिलता और प्रभाव दोनों बढ़ गए।
हमलों का दायरा सिर्फ डिमोना तक सीमित नहीं रहा। ईरान के मुताबिक इजरायल के पांच प्रमुख शहरों को निशाना बनाया गया। इनमें डिमोना के अलावा बेर शेवा, ईलात, अराद और किर्यात गत शामिल हैं। ये सभी शहर सैन्य और रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माने जाते हैं। खासकर डिमोना पर हमले का दावा इसलिए बड़ा है क्योंकि यहां तक किसी भी दुश्मन मिसाइल का पहुंचना अब तक लगभग असंभव माना जाता था।
इजरायल ने अपने सुरक्षा तंत्र में आयरन डोम, एरो और अन्य अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियां तैनात कर रखी हैं। इन प्रणालियों को दुनिया के सबसे मजबूत एयर डिफेंस में गिना जाता है। लेकिन ईरान के दावे के अनुसार इस बार इन सुरक्षा कवचों को भेद दिया गया। यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह वैश्विक सैन्य संतुलन के लिए एक बड़ा संकेत होगा।
हालांकि नुकसान को लेकर दोनों पक्षों के दावे पूरी तरह अलग-अलग हैं। ईरान का कहना है कि इस हमले में 200 से ज्यादा लोग मारे गए या घायल हुए हैं और डिमोना में भारी तबाही हुई है। वहीं इजरायल ने आधिकारिक तौर पर केवल करीब 50 लोगों के घायल होने की बात स्वीकार की है। लेकिन इजरायल के प्रमुख अखबार “येदिओथ अहरोनोथ” ने इसे हाल के समय की सबसे कठिन रात बताया, जिससे सरकारी दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
घटनास्थल से सामने आई तस्वीरों में बड़ी संख्या में एंबुलेंस और सैन्य हेलिकॉप्टर दिखाई दिए, जो घायलों को ले जाने में जुटे थे। इससे यह अटकलें भी तेज हो गई हैं कि वास्तविक नुकसान आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा हो सकता है। ईरान ने यह आरोप भी लगाया है कि इजरायल मीडिया और चश्मदीदों पर दबाव बना रहा है ताकि असली स्थिति दुनिया के सामने न आ सके।
इस पूरे घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है—अमेरिका की भागीदारी। ईरान ने दावा किया है कि उसने इजरायल के साथ-साथ अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। कुवैत के अली अल-सलेम एयरबेस और यूएई के अल-धफरा व अल-मिनहाद बेस का जिक्र करते हुए ईरान ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यह संघर्ष अब केवल इजरायल तक सीमित नहीं है।
उधर इजरायल के लिए स्थिति और जटिल तब हो जाती है जब उत्तर दिशा से लेबनान का हिजबुल्लाह भी सक्रिय हो जाता है। ईरान ने हिजबुल्लाह की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उसने इजरायल के उत्तरी और मध्य हिस्सों पर दबाव बनाए रखा। इसका मतलब है कि इजरायल इस समय दो मोर्चों पर एक साथ जंग लड़ रहा है—दक्षिण से ईरान और उत्तर से हिजबुल्लाह।
इन सभी घटनाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में जंग का समीकरण बदल रहा है? ईरान का दावा है कि इजरायल की बहुस्तरीय हवाई सुरक्षा प्रणाली अब दबाव में है और इतने बड़े पैमाने पर हो रहे हमलों को रोकना उसके लिए मुश्किल होता जा रहा है। यदि यह स्थिति बनी रहती है तो आने वाले दिनों में संघर्ष और अधिक व्यापक और खतरनाक हो सकता है।
फिलहाल सच्चाई दोनों पक्षों के दावों के बीच कहीं छिपी हुई है। एक तरफ ईरान अपनी सैन्य क्षमता और बढ़ते प्रभाव का प्रदर्शन कर रहा है, तो दूसरी तरफ इजरायल नुकसान को सीमित बताकर स्थिति को नियंत्रण में दिखाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इतना तय है कि डिमोना पर हमले के दावे ने इस जंग को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है, जहां हर अगला कदम पूरे क्षेत्र के भविष्य को तय कर सकता है।





