अशोक खरात केस और अश्लील वायरल वीडियो…जानें कौन हैं रूपाली चाकणकर..और क्यों दिया इस्तीफा
महाराष्ट्र में कथित धर्मगुरुअशोक खरात से जुड़े रेप मामले ने महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल ला दिया है। इस विवाद के बीच महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रुपाली चाकणकर अब अपने पद से इस्तीफा दे चुकी हैं। रुपाली पर आरोपी से संबंधों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। जिससे राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा था।
- रूपाली चाकणकर विवाद में इस्तीफा
- महिला आयोग अध्यक्ष पर उठे सवाल
- अशोक खरात केस से सियासत गरम
- वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद
- धर्मगुरु कनेक्शन बना राजनीतिक संकट
- महाराष्ट्र में महिला आयोग पर घेरा
- विपक्ष का सरकार पर तीखा हमला
- अंधभक्ति के आरोपों से घिरी नेता
- रेप आरोपी से जुड़े संबंधों पर बवाल
- इस्तीफे के बाद जांच तेज हुई
महाराष्ट्र की राजनीति में सक्रिय और महिला मुद्दों पर मुखर आवाज मानी जाने वाली रुपाली चाकणकर इन दिनों बड़े विवाद के चलते चर्चा में हैं। महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष पद से उनका इस्तीफा, कथित धर्मगुरु अशोक खरात से जुड़े विवाद के बाद आया। जिसने उनकी छवि और राजनीतिक करियर पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रूपाली चाकणकर मूल रूप से पुणे की रहने वाली हैं और लंबे समय से राजनीति तथा सामाजिक कार्यों में सक्रिय रही हैं। उन्होंने छात्र जीवन से ही सामाजिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर दिया था। बाद में वह Nationalist Congress Party से जुड़ीं और पार्टी में महिला नेतृत्व को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा और न्याय जैसे मुद्दों पर उनकी सक्रियता के कारण उन्हें राज्य स्तर पर पहचान मिली।
महाराष्ट्र सरकार ने उनकी राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता को देखते हुए उन्हें राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी। इस पद पर रहते हुए वे महिलाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई, शिकायतों के निवारण और जागरूकता अभियानों में सक्रिय रहीं। हालांकि, हालिया विवाद और वायरल हो रहे एक अश्लील वीडियो ने उनके पूरे कार्यकाल पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल, पूरा मामला अशोक खरात से जुड़ा है, जिसे नासिक से बलात्कार और यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार उसने कई महिलाओं को आध्यात्मिक और ज्योतिषीय प्रभाव के नाम पर अपने जाल में फंसाया था। जांच में कथित तौर पर कई आपत्तिजनक वीडियो और सबूत भी सामने आए हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
रूपाली चाकणकर का नाम तब इस केस में उछला, जब सोशल मीडिया पर उनके कुछ पुराने वीडियो और तस्वीरें वायरल हुईं। इनमें वे खरात के साथ धार्मिक गतिविधियों में शामिल नजर आईं। यहां तक कि एक वीडियो में उनके पैर धोते हुए भी देखा गया। इसके अलावा विपक्ष ने आरोप लगाया कि वे खरात की ‘अंधभक्त’ थीं और उसके प्रभाव में आकर उन्होंने एक बार अपनी उंगली तक काट ली थी। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस विवाद के बढ़ने के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने उन्हें पद छोड़ने के निर्देश दिए। जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। चाकणकर ने अपने बचाव में कहा कि वायरल वीडियो कई साल पुराना है। उस समय उनके परिवार ने खरात को गुरु के रूप में माना था। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति के भविष्य के अपराधों का अंदाजा पहले से नहीं लगाया जा सकता।
विपक्ष ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। शिवसेना यूबीटी और अन्य दलों के नेताओं ने कहा कि महिला आयोग जैसे संवेदनशील पद पर बैठे व्यक्ति का नाम ऐसे आरोपी से जुड़ना बेहद गंभीर है। उद्धव ठाकरे ने तो यहां तक कहा कि ऐसे “धोखेबाज बाबाओं” के साथ-साथ उनके समर्थकों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या प्रभावशाली लोगों के संपर्क कानून से ऊपर हो सकते हैं? क्या अंधविश्वास और राजनीतिक संरक्षण मिलकर अपराध को बढ़ावा देते हैं? और सबसे अहम, क्या जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही तय होगी?
महिला आयोग ने लिखा डीजीपी को पत्र
इधर, महिला आयोग ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की है। पुलिस ने भी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में जांच तेज कर दी है और आरोपी फिलहाल हिरासत में है। गौरतलब है कि अशोक खरात खुद को ज्योतिष और आध्यात्मिक गुरु के रूप में पेश करता था और समाज में उसकी अच्छी खासी पकड़ थी। अब उसके खिलाफ सामने आए आरोपों ने न केवल उसकी छवि को ध्वस्त किया है, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि सत्ता, धर्म और प्रभावशाली नेटवर्क के मेल से किस तरह गंभीर अपराधों को लंबे समय तक छिपाया जा सकता है। आने वाले दिनों में SIT की जांच और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस मामले की दिशा तय करेंगी।
फिलहाल, अशोक खरात पुलिस हिरासत में है और मामले की जांच जारी है। वहीं, रूपाली चाकणकर का इस्तीफा इस पूरे विवाद का पहला बड़ा राजनीतिक परिणाम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस मामले की दिशा तय करेंगी।