इंदौर के अलवासा गांव की अनीता चौहान की कहानी बताती है कि महिलाओं को अवसर और आर्थिक सहयोग मिले, तो वे अपने पैरों पर खड़ी होकर परिवार की आमदनी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
कभी रोजगार के सीमित अवसरों के बीच आगे बढ़ने की राह तलाश रहीं इंदौर जिले के ग्राम अलवासा की श्रीमती अनीता चौहान आज अपनी मेहनत और हुनर से आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। उनकी जिंदगी में बदलाव की शुरुआत मुस्कान आजीविका समूह से जुड़ने के बाद हुई। समूह ने उन्हें काम से जुड़ने का अवसर दिया और फिर ऋण की मदद से उन्होंने अपने स्वरोजगार की राह भी तैयार कर ली।
समूह से मिला काम, बढ़ी आमदनी
अनीता चौहान को आजीविका समूह के माध्यम से लोक अधिकार केंद्र में काम करने का अवसर मिला। इससे उनकी आमदनी में सुधार हुआ और आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का भरोसा भी मिला। लेकिन उन्होंने अपनी आय बढ़ाने के लिए केवल इसी काम पर निर्भर रहने के बजाय सिलाई के हुनर को भी अपनी ताकत बनाया।
उन्होंने आजीविका समूह से ऋण लेकर सिलाई मशीन खरीदी और सिलाई का काम शुरू किया। इस काम से उन्हें प्रतिमाह लगभग छह हजार रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है। यानी समूह से मिले सहयोग ने उनके लिए रोजगार का अवसर तैयार करने के साथ स्वरोजगार का रास्ता भी खोला।
आर्थिक मदद से आत्मनिर्भरता तक का सफर
अनीता की कहानी स्वयं सहायता समूहों की उस भूमिका को सामने लाती है, जिसमें महिलाएं छोटी आर्थिक मदद और अपने कौशल के सहारे आय के नए स्रोत विकसित कर सकती हैं। सिलाई मशीन जैसी छोटी पूंजी भी किसी महिला के लिए नियमित कमाई का जरिया बन सकती है, बशर्ते उसे काम करने का अवसर और जरूरी सहयोग मिले।
अनीता चौहान का अनुभव बताता है कि आर्थिक सशक्तीकरण केवल सहायता राशि देने तक सीमित नहीं है। रोजगार से जुड़ाव, जरूरत के अनुसार ऋण और अपने हुनर का इस्तेमाल महिलाओं को आर्थिक फैसले लेने की क्षमता भी देते हैं।
अनीता ने जताया आजीविका समूह और प्रधानमंत्री का आभार
अनीता चौहान का कहना है कि आजीविका समूह से जुड़ने के बाद उन्हें काम मिला और सिलाई मशीन खरीदने से उनकी आमदनी में भी बढ़ोतरी हुई। उन्होंने इसके लिए आजीविका समूह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया।
उनकी यह कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है। हालांकि, ऐसे प्रयासों का व्यापक असर सुनिश्चित करने के लिए महिलाओं को बाजार से जोड़ना, सिलाई जैसे कौशल का प्रशिक्षण देना और स्वरोजगार के लिए आसान ऋण उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
अलवासा की अनीता चौहान की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सही अवसर, आर्थिक सहयोग और मेहनत मिलकर जिंदगी बदलने का आधार बन सकते हैं। मुस्कान आजीविका समूह से मिले रोजगार और सिलाई मशीन से होने वाली छह हजार रुपये की मासिक अतिरिक्त आय ने उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ने का अवसर दिया है। उनकी सफलता का संदेश स्पष्ट है—महिलाओं को अवसर मिले, तो वे अपनी मेहनत से अपने भविष्य को नई दिशा दे सकती हैं।