हवा में हिम्मत की मिसाल, इजराइल देगा हिंदुस्तानी कैप्टन को सम्मान!…
दुबई की फ्लाइट में 30 सितंबर को जो कुछ हुआ, वह सिर्फ एक विमान में हुआ हमला नहीं था। कुछ सेकंड की देरी सैकड़ों जिंदगियों पर भारी पड़ सकती थी। इसी संकट की घड़ी में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार ने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद जिस तरह कॉकपिट का दरवाजा खोला, उसने यात्रियों और क्रू को हमलावर तक पहुंचने का रास्ता दिया। इसके बाद विमान को सुरक्षित तरीके से सऊदी अरब के तबुक में उतारा गया।
अब इस बहादुरी को इजराइल की तरफ से जिस तरह सम्मान देने की तैयारी है, उसने इस पूरे घटनाक्रम को और खास बना दिया है। इजराइली राजनेता अल्मोग कोहेन ने कैप्टन मच्छार को “हीरो ऑफ द डे” बताते हुए कहा है कि वह अगले नेसेट सत्र में बेन गुरियन एयरपोर्ट के एक लाउंज का नाम उनके सम्मान में रखने का प्रस्ताव पेश करेंगे। यानी जिस देश के यात्रियों की जान बचाने में भारतीय पायलट की निर्णायक भूमिका रही, वही देश अब उनकी बहादुरी को अपनी राष्ट्रीय स्मृति का हिस्सा बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
घायल थे, लेकिन हिम्मत नहीं हारी
घटना के दौरान सह-पायलट ने कैप्टन मच्छार पर हमला किया। विमान तेजी से नीचे जा रहा था। स्थिति इतनी गंभीर थी कि यात्रियों को लगा कि विमान किसी बड़ी दुर्घटना की तरफ बढ़ रहा है। लेकिन घायल कैप्टन ने हार नहीं मानी।
उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद यात्रियों और क्रू के कुछ सदस्यों ने कॉकपिट में प्रवेश कर हमलावर को काबू किया। विमान में मौजूद अन्य पायलटों ने नियंत्रण संभालने में मदद की और फ्लाइट को तबुक में आपात लैंडिंग कराई गई।
यानी इस पूरी घटना में एक नहीं, बल्कि कई लोगों ने निर्णायक भूमिका निभाई। लेकिन कॉकपिट का दरवाजा खोलना वह अहम क्षण था जिसने अंदर फंसे संकट को बाहर से मदद मिलने का रास्ता दिया।
इजराइल क्यों कर रहा है इतना सम्मान?
इजराइल के लिए यह घटना महज विमानन सुरक्षा का मामला नहीं है। फ्लाइट में बड़ी संख्या में इजराइली यात्री थे और विमान तेल अवीव जा रहा था। ऐसे में संभावित दुर्घटना का असर बेहद गंभीर हो सकता था।
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कैप्टन मच्छार को “ट्रू हीरो” कहा है। इजराइली राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने विमान में हस्तक्षेप करने वाले चार इजराइली नागरिकों के लिए नागरिक वीरता पदक की सिफारिश की है।
यानी इजराइल की तरफ से सम्मान केवल भारतीय पायलट तक सीमित नहीं है। इस संकट में जान जोखिम में डालकर विमान को बचाने वाले यात्रियों और क्रू के योगदान को भी सार्वजनिक रूप से मान्यता दी जा रही है।
भारत के लिए भी बड़ी बात
इस घटना ने भारतीय विमानन पेशेवर की भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अस्पताल से कैप्टन मच्छार से बात की। मच्छार ने उन्हें बताया कि किस तरह गंभीर चोट के बावजूद उन्होंने विमान को बचाने के लिए प्रयास किया।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कहानी किसी युद्ध के मैदान की नहीं, बल्कि आसमान में अचानक पैदा हुए संकट की है। यहां हथियारों से ज्यादा मायने रखता था प्रशिक्षण, निर्णय लेने की क्षमता और आखिरी क्षण तक जिम्मेदारी निभाने का साहस।
एक नाम, जो एयरपोर्ट पर याद रहेगा
अगर अल्मोग कोहेन का प्रस्ताव आगे बढ़ता है और बेन गुरियन एयरपोर्ट के किसी लाउंज का नाम कैप्टन स्मित मच्छार के नाम पर रखा जाता है, तो यह किसी भारतीय नागरिक के लिए असाधारण अंतरराष्ट्रीय सम्मान होगा।
एक तरफ विमानन सुरक्षा को लेकर इस घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं। दूसरी तरफ इसने यह भी दिखाया कि संकट की सबसे भयावह स्थिति में इंसानी साहस कितनी जिंदगियां बचा सकता है।
एक भारतीय कैप्टन, इजराइली यात्री, सऊदी अरब में आपात लैंडिंग और आसमान में टलती एक बड़ी त्रासदी।
यह कहानी सिर्फ एक पायलट की बहादुरी की नहीं, बल्कि उस क्षण की है जब जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी ने डर पर जीत हासिल की।और शायद इसी वजह से इजराइल कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी को सिर्फ धन्यवाद कहकर खत्म नहीं करना चाहता, बल्कि उसे याद रखने की तैयारी कर रहा है।