महिला आरक्षण और परिसीमन पर संसद में घमासान…सपा चाहे तो मुस्लिम महिलाओं को टिकट दे, हमें आपत्ति नहीं”
नई दिल्ली में संसद का विशेष सत्र गुरुवार से शुरू होते ही सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया। केंद्र सरकार ने इस सत्र में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए हैं, जिनका सीधा संबंध महिला आरक्षण कानून—नारी शक्ति वंदन अधिनियम—को लागू करने और लोकसभा की सीटों के पुनर्गठन से है। इन विधेयकों में सबसे ज्यादा विवाद परिसीमन विधेयक 2026 को लेकर देखने को मिल रहा है, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
- विशेष सत्र में तीन अहम विधेयक पेश, 2029 तक लागू होगा महिला आरक्षण
- लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने की तैयारी
- परिसीमन बिल पर विपक्ष का जोरदार विरोध, सदन में हंगामा
- अमित शाह का अखिलेश पर तीखा पलटवार
- अमित शाह बोले—“सपा चाहे तो मुस्लिम महिलाओं को टिकट दे, हमें आपत्ति नहीं”
सरकार का कहना है कि इन विधेयकों के जरिए 2029 के आम चुनाव से पहले महिलाओं को 33% आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक एजेंडा और सत्ता संतुलन बदलने की रणनीति बता रहा है। सदन में इस मुद्दे पर तीखी बहस और हंगामे के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग भी देखने को मिली।
तीन विधेयकों से बदल सकती है सियासत
सरकार द्वारा पेश किए गए तीनों विधेयकों का मकसद महिला आरक्षण को लागू करना और सीटों का नया निर्धारण करना है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने पहले दो विधेयक पेश किए, जबकि तीसरा और सबसे अहम परिसीमन बिल गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश किया गया।
सूत्रों के अनुसार, सरकार लोकसभा की कुल सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर करीब 850 करने की योजना पर काम कर रही है। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों दोनों की सीटों में वृद्धि शामिल होगी। इस प्रस्ताव के लागू होने से देश की राजनीतिक संरचना में बड़ा बदलाव संभव है।
परिसीमन पर विपक्ष का हंगामा
जैसे ही परिसीमन विधेयक सदन में पेश हुआ, विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने इसे संविधान की भावना के खिलाफ बताया और कहा कि जनगणना से अलग करके परिसीमन करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करेगा।
डीएमके सांसद टी.आर. बालू ने भी इन विधेयकों को “सैंडविच बिल” करार देते हुए कहा कि ये आपस में जुड़े हुए हैं और इन्हें जल्दबाजी में लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इसका विरोध जारी रखेगी।
अमित शाह का पलटवार
बहस के दौरान अखिलेश यादव ने मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए सरकार से सवाल किया कि उनके लिए क्या प्रावधान है। इस पर अमित शाह ने तीखा जवाब देते हुए कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है।
अमित शाह ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “समाजवादी पार्टी चाहे तो अपनी सभी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे दे, हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है।” उनके इस बयान के बाद सदन में शोर-शराबा और बढ़ गया।
जनगणना और जातीय आंकड़ों पर भी टकराव
अखिलेश यादव ने सरकार पर जनगणना को टालने का आरोप लगाया और कहा कि बिना सही आंकड़ों के परिसीमन करना उचित नहीं है। उन्होंने जातीय जनगणना की भी मांग उठाई।
इस पर अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा कि देश में जनगणना की प्रक्रिया जारी है और सरकार जातीय आंकड़ों को लेकर भी निर्णय ले चुकी है। उन्होंने विपक्ष पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि कुछ बयान जनता में भ्रम और चिंता पैदा कर रहे हैं।
राजनीतिक रणनीति या सुधार?
विशेष सत्र में इन विधेयकों को लेकर जहां सरकार इसे ऐतिहासिक सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी रणनीति करार दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी और परिसीमन का असर सीधे तौर पर राज्यों की राजनीतिक ताकत पर पड़ेगा।
दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से उनकी सीटें कम हो सकती हैं, जबकि उत्तर भारत के बड़े राज्यों को फायदा मिल सकता है। यही वजह है कि यह मुद्दा केवल महिला आरक्षण तक सीमित नहीं रहकर क्षेत्रीय संतुलन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का भी सवाल बन गया है।
आगे क्या?
लोकसभा में इन विधेयकों पर कुल 18 घंटे की चर्चा तय की गई है। इसके बाद बिल पास होने पर राज्यसभा में भी इस पर बहस होगी। अगर ये विधेयक कानून का रूप लेते हैं, तो 2029 के आम चुनाव से पहले देश की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। फिलहाल संसद के इस विशेष सत्र ने साफ कर दिया है कि महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा आने वाले समय में देश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बनने वाला है। सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव अभी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।




