बिहार की राजनीति में एक बड़ा मोड़ देखने को मिल रहा है, जहां Samrat Choudhary को विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है। 15 अप्रैल को उनके शपथ ग्रहण की तैयारी है। इस फैसले के बाद उनकी विधानसभा सीट तारापुर में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है और लोग इसे केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah के पुराने वादे से जोड़कर देख रहे हैं।
2025 के चुनाव प्रचार में अमित शाह ने सम्राट चौधरी को बड़ा नेता बनाने का किया था वादा
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान अमित शाह ने तारापुर की रैली में सम्राट चौधरी के समर्थन में बड़ा बयान दिया था। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा था कि अगर सम्राट चौधरी को जिताया गया, तो उन्हें आगे बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी। इस बयान ने उस समय राजनीतिक माहौल को काफी गर्मा दिया था और इसे भविष्य के संकेत के रूप में देखा गया।
उपमुख्यमंत्री बनने के बाद से ही मिल रहे थे बड़े संकेत, अब मुख्यमंत्री पद पर लगी अंतिम मुहर
चुनाव जीतने के बाद सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था, जिससे यह स्पष्ट हो गया था कि पार्टी उन्हें बड़े रोल में देख रही है। हालांकि उस समय इसे लेकर कई तरह की अटकलें थीं, लेकिन अब विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद यह साफ हो गया है कि वही राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।
तारापुर की जनता में खुशी की लहर, वादे के पूरे होने पर अमित शाह को दे रहे धन्यवाद
सम्राट चौधरी के नेता चुने जाने के बाद उनकी विधानसभा सीट तारापुर में जश्न का माहौल है। स्थानीय लोग इसे अमित शाह के वादे के पूरा होने के रूप में देख रहे हैं। लोगों का मानना है कि जो भरोसा चुनाव के दौरान दिलाया गया था, वह अब हकीकत बन चुका है।
बयान के बाद बदला था चुनावी माहौल, पार्टी को मिला था बड़ा राजनीतिक फायदा
अमित शाह के बयान ने चुनाव के दौरान सम्राट चौधरी के पक्ष में माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। इससे न सिर्फ उनके क्षेत्र में बल्कि पूरे बिहार में बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को एक सकारात्मक संदेश मिला था। इस रणनीति का असर चुनावी नतीजों में भी देखने को मिला।
नई जिम्मेदारी के साथ शुरू होगी नई राजनीतिक पारी, सबकी नजरें अब शपथ ग्रहण पर टिकीं
अब जब सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं, तो बिहार की राजनीति में एक नई शुरुआत मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनका कार्यकाल कई मायनों में अहम साबित हो सकता है। अब सबकी निगाहें 15 अप्रैल को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हुई हैं।





