UP Politics: अखिलेश–अंबेडकर मुलाकात पर BSP का पलटवार, कहा—“कोई असर नहीं पड़ेगा”
लखनऊ/लखीमपुर: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और बाबा साहेब के प्रपौत्र डॉ. राजरतन अंबेडकर की मुलाकात ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। इस पूरे घटनाक्रम पर अब बहुजन समाज पार्टी की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
BSP का सीधा जवाब
बसपा के यूपी अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने साफ कहा “इस मुलाकात से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।” लखीमपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि किसी बड़े नेता के परिवार का सदस्य किसके साथ खड़ा है, यह जरूरी नहीं कि वह पूरी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करे। उन्होंने दो टूक कहा—“कोई दांव चलने वाला नहीं है… बहुजन समाज पार्टी अपने रास्ते पर मजबूती से खड़ी है।”
बसपा का आधार अटूट
विश्वनाथ पाल ने याद दिलाया कि पार्टी की नींव कांशीराम ने रखी थी और उन्होंने मायावती को अपना उत्तराधिकारी बनाया। उनके मुताबिक, बसपा का वोट बैंक मजबूत है कार्यकर्ता एकजुट हैं 2027 में फिर से मायावती को मुख्यमंत्री बनाने का लक्ष्य तय है समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए बसपा ने कहा “समाजवादी पार्टी पा ने बहुजन समाज का नुकसान किया है… अब वे किस तरह उनकी विचारधारा को आगे बढ़ाएंगे?”
सियासी मायने क्या हैं?
दरअसल, डॉ. राजरतन अंबेडकर की मौजूदगी को सपा के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि सपा दलित वोट बैंक में पैठ बनाना चाहती है बसपा इसे अपने पारंपरिक आधार पर हमला मान रही है
क्या बोले थे राजरतन अंबेडकर?
कार्यक्रम में डॉ. राजरतन अंबेडकर ने संविधान की ताकत पर जोर देते हुए कहा “140 करोड़ लोगों को एक साथ जोड़कर रखने का काम संविधान करता है।” उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव PDA के जरिए समाज के अलग-अलग वर्गों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, और अगर वे इसमें योगदान दे सकें तो यह उनके लिए गर्व की बात होगी। अखिलेश–अंबेडकर मुलाकात ने यूपी की राजनीति में हलचल जरूर बढ़ा दी है, लेकिन बहुजन समाज पार्टी इसे महज एक “सियासी दांव” मानकर खारिज कर रही है। अब नजर इस बात पर है कि क्या यह मुलाकात 2027 के चुनावी समीकरण बदल पाएगी या फिर बसपा का परंपरागत वोट बैंक पहले की तरह अडिग रहेगा?





