घना कोहरा, रेन अलर्ट… आखिर दिल्ली-NCR का मौसम इतना तूफानी क्यों है? मौसम विभाग क्या कह रहा है

After all why is the weather of Delhi NCR so stormy

घना कोहरा, रेन अलर्ट… आखिर दिल्ली-NCR का मौसम इतना तूफानी क्यों है? मौसम विभाग क्या कह रहा है

दिल्ली-NCR में सर्दी अपने पूरे चरम पर पहुंच चुकी है। रविवार सुबह राजधानी और आसपास के इलाकों में घना कोहरा छाया रहा, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। कई इलाकों में विजिबिलिटी घटकर 50 से 200 मीटर तक दर्ज की गई। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इसे देखते हुए घने कोहरे को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। हालांकि लोगों को यह मौसम तूफानी जैसा लग रहा है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह दिल्ली की सर्दियों में बनने वाला सामान्य रेडिएशन फॉग है।

मयूर विहार से लेकर नोएडा तक कोहरे की चादर

दिल्ली के मयूर विहार इलाके में देर रात और तड़के का नजारा किसी पहाड़ी क्षेत्र जैसा नजर आया। सड़कों पर गाड़ियां रेंगती हुई दिखीं, स्ट्रीट लाइट्स की रोशनी धुंध में घुल गई और लोग ठंड के साथ-साथ कम दृश्यता से जूझते नजर आए। यही हाल नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी देखने को मिला।

सुबह के समय दिल्ली-NCR में कई जगह विजिबिलिटी 100 से 500 मीटर तक रही, जबकि कुछ इलाकों में यह 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई। इसके चलते सड़क यातायात, ट्रेन और फ्लाइट सेवाओं पर असर पड़ा।

आज और आने वाले दिनों का मौसम कैसा रहेगा?

IMD और मौसम से जुड़े ताजा आंकड़ों के मुताबिक:

मौसम विभाग ने साफ किया है कि फिलहाल भारी बारिश या तूफान का कोई बड़ा अलर्ट नहीं है, लेकिन कोहरे को लेकर सतर्कता बेहद जरूरी है।

कोहरा इतना घना क्यों हो रहा है?

विशेषज्ञों के मुताबिक दिल्ली में सर्दियों के दौरान बनने वाला यह कोहरा मुख्य रूप से रेडिएशन फॉग (विकिरण कोहरा) है। इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण हैं:

1. विकिरण ठंडक (Infrared Cooling):
सर्दियों की साफ रातों में जमीन तेजी से ठंडी हो जाती है। दिन की गर्मी खत्म होने के बाद जमीन से निकलने वाली इंफ्रारेड किरणें अंतरिक्ष में चली जाती हैं। इससे जमीन के पास की हवा ठंडी हो जाती है। जब यह तापमान ओस बिंदु (ड्यू पॉइंट) तक पहुंच जाता है, तो हवा में मौजूद नमी छोटे-छोटे पानी के कणों में बदल जाती है, जो कोहरे का रूप ले लेते हैं। दिसंबर में दिल्ली की रातें 12 से 14 घंटे लंबी होती हैं, जिससे ठंडक ज्यादा बढ़ जाती है।

2. तापमान उलटाव (Temperature Inversion):
सामान्य हालात में ऊपर की हवा ठंडी और नीचे की हवा गर्म होती है, लेकिन सर्दियों में स्थिति उलट जाती है। नीचे की हवा ज्यादा ठंडी और ऊपर की हवा अपेक्षाकृत गर्म हो जाती है। इस वजह से ठंडी हवा और नमी नीचे ही फंस जाती है। दिल्ली में यह इनवर्शन लेयर अक्सर 200 से 500 मीटर की ऊंचाई पर बनती है, जिससे कोहरा ऊपर उठ नहीं पाता और और भी घना हो जाता है।

3. कम हवा की गति:
जब हवा की स्पीड बहुत कम होती है (5 किमी/घंटा से कम), तो कोहरा और प्रदूषण एक ही जगह जमा हो जाता है। दिसंबर 2025 में दिल्ली में हवा की औसत गति 5 से 12 किमी/घंटा रही, जो घने कोहरे के लिए अनुकूल स्थिति मानी जाती है।

4. ज्यादा नमी और प्रदूषण:
यमुना नदी के पास होने और भौगोलिक स्थिति के कारण दिल्ली में नमी ज्यादा रहती है। इसके साथ ही प्रदूषण के कण (PM2.5 और PM10) कोहरे के कणों के साथ मिलकर स्मॉग बना देते हैं। इससे दृश्यता और कम हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण की वजह से कोहरा 20 से 30 प्रतिशत तक ज्यादा घना हो सकता है।

यातायात और सेहत पर असर

घने कोहरे का सीधा असर हवाई और रेल सेवाओं पर पड़ रहा है। कई फ्लाइट्स और ट्रेनें देरी से चल रही हैं। सड़कों पर दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। इसके अलावा AQI बहुत खराब स्तर पर होने से सांस की बीमारियों, आंखों में जलन और एलर्जी की समस्या बढ़ सकती है।

कब तक रहेगी यह स्थिति?

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति हर साल दिसंबर और जनवरी की शुरुआत में देखने को मिलती है। जनवरी के मध्य तक धीरे-धीरे कोहरे की तीव्रता कम होने लगती है, खासकर जब पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होते हैं और हवा की गति बढ़ती है।

क्या करें, क्या न करें?

IMD ने लोगों से अपील की है कि मौसम की ताजा अपडेट पर नजर रखें, सुबह और देर रात गैर-जरूरी यात्रा से बचें, वाहन चलाते समय फॉग लाइट्स का इस्तेमाल करें और बुजुर्गों व बच्चों का खास ध्यान रखें।

कुल मिलाकर, दिल्ली-NCR का यह ‘तूफानी’ सा लगने वाला मौसम असल में सर्दियों की सामान्य लेकिन चुनौतीपूर्ण स्थिति है, जिसमें सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

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