भारत अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता और वैश्विक रक्षा बाजार में बढ़ती हिस्सेदारी को नई ऊंचाई देने की तैयारी में जुट गया है। इसी दिशा में 8 से 12 फरवरी 2027 तक बेंगलुरु में देश के सबसे बड़े रक्षा एवं एयरोस्पेस आयोजन एयरो इंडिया-2027 का आयोजन किया जाएगा। इस बार का आयोजन अब तक का सबसे बड़ा संस्करण माना जा रहा है, जिसमें दुनिया की प्रमुख रक्षा कंपनियां, सैन्य प्रतिनिधिमंडल और एयरोस्पेस उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ भाग लेंगे। सरकार का उद्देश्य इस मंच के जरिए भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक, रक्षा निर्माण क्षमता और निर्यात क्षमता को वैश्विक स्तर पर मजबूती से पेश करना है। आयोजन को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं और इसे भारत की रक्षा नीति के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय की देखरेख में HAL और BEL संभालेंगे देश के सबसे बड़े एयर शो की पूरी जिम्मेदारी
रक्षा मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन की ओर से इस आयोजन की जिम्मेदारी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को नोडल एजेंसी के रूप में सौंपी गई है, जबकि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) सहयोगी एजेंसी की भूमिका निभाएगी। पांच दिन तक चलने वाले इस आयोजन में एयर डिस्प्ले, रक्षा उपकरणों की प्रदर्शनी, बिजनेस मीटिंग, तकनीकी चर्चा और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित होंगे। यह मंच भारतीय और विदेशी कंपनियों के बीच नई साझेदारियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी गति देगा।
रक्षा उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी ने भारत को वैश्विक मंच पर दी नई पहचान
भारत का रक्षा क्षेत्र लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के ₹1.54 लाख करोड़ की तुलना में 15.6 प्रतिशत अधिक है। यदि 2020-21 से तुलना करें तो यह वृद्धि 110 प्रतिशत से भी ज्यादा है, जब रक्षा उत्पादन ₹84,643 करोड़ था। सरकार ने 2029-30 तक रक्षा निर्माण को ₹3 लाख करोड़ और रक्षा निर्यात को ₹50,000 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल जैसे समझौतों से भारतीय रक्षा निर्यात को मिल रही नई रफ्तार
हाल के महीनों में भारत ने रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इंडोनेशिया को ब्रह्मोस क्रूज़ मिसाइल और अस्त्र बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल की आपूर्ति से जुड़े समझौतों ने भारतीय रक्षा उद्योग को नई मजबूती दी है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर ₹38,424 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के ₹23,622 करोड़ की तुलना में 63 प्रतिशत अधिक है। भारत अब मिसाइल, रॉकेट, आर्टिलरी गन, बख्तरबंद वाहन, रडार, निगरानी प्रणाली, गोला-बारूद, सुरक्षात्मक उपकरण और कई अन्य रक्षा प्रणालियों का निर्यात कर रहा है। इसी अवधि में रक्षा निर्यात करने वाली कंपनियों की संख्या 128 से बढ़कर 145 हो गई।
नीतिगत सुधारों से मजबूत हुआ रक्षा उद्योग, लेकिन आयात में भारत अब भी दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल
सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। औद्योगिक लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाया गया, कई रक्षा उपकरणों और कंपोनेंट्स को लाइसेंस व्यवस्था से बाहर किया गया तथा निर्यात स्वीकृति प्रक्रिया को भी आसान बनाया गया। इन कदमों का सकारात्मक असर भारतीय रक्षा उद्योग पर साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि SIPRI की हालिया रिपोर्ट के अनुसार 2016-20 और 2021-25 के बीच भारत के हथियार आयात में 4 प्रतिशत की कमी आई है, लेकिन इसके बावजूद भारत अब भी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा आयातक बना हुआ है और वैश्विक हथियार आयात में उसकी हिस्सेदारी 8.2 प्रतिशत है। ऐसे में एयरो इंडिया-2027 भारत के रक्षा क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है।