धनतेरस पर सोने की चमक, लेकिन खरीदारी के बाजार में बड़ा सवाल। महंगा सोना, सस्ता तस्करी का गोल्ड और सरकार के सामने नई चुनौती।
धनतेरस का त्योहार और सोने की खरीदारी का रिश्ता सदियों पुराना है। भारतीय परिवारों में इस दिन सोना खरीदना केवल निवेश नहीं, बल्कि शुभता, समृद्धि और भविष्य की सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। लेकिन धनतेरस 2026 पर सोने की चमक के पीछे एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सरकार, ज्वैलर्स और अर्थव्यवस्था तीनों के लिए चिंता का विषय है। सोना खरीदने वालों का एक बड़ा हिस्सा अब अधिकृत ज्वैलर्स के बजाय सस्ते अनौपचारिक बाजार की तरफ आकर्षित हो रहा है। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?
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धनतेरस पर सोने में तस्करी का साया
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हर तीसरा खरीदार बिना बिल के साथ?
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सोना महंगा, तस्करी का गोल्ड सस्ता
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50 टन सोना, तस्करी का बड़ा खेल
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इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ी, तस्करी बढ़ी?
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सोने की चमक, सरकारी खजाने को झटका
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सस्ते सोने के पीछे कितना बड़ा जोखिम?
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धनतेरस पर सवालों में सोने का कारोबार
LocalCircles के सर्वे ने इस सवाल का चौंकाने वाला जवाब दिया है। सर्वे में शामिल सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों में से 29 प्रतिशत ने कहा कि वे पक्के बिल वाले ज्वैलर के बजाय सस्ते अनौपचारिक रास्ते से सोना खरीदने पर विचार कर रहे हैं। यानी हर 10 में से करीब 3 खरीदार बिना बिल वाले सोने की तरफ रुख कर सकते हैं। इसके उलट 71 प्रतिशत लोगों ने अधिकृत ज्वैलर से ही खरीदारी करने की बात कही। देश के 312 जिलों में किए गए इस सर्वे में 42 हजार से ज्यादा जवाब मिले।
इस बदलते रुझान की सबसे बड़ी वजह सोने पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी बताई जा रही है। सरकार ने 13 मई 2026 को इंपोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी थी। इसके पीछे विदेशी मुद्रा की बचत और रुपये पर दबाव कम करने का उद्देश्य था। लेकिन इस फैसले का दूसरा पहलू भी सामने आया। आधिकारिक तरीके से आयात किए गए सोने पर शुल्क और अन्य करों का बोझ बढ़ने से वैध बाजार और अनौपचारिक बाजार की कीमतों में अंतर पैदा हो गया। इसी अंतर का फायदा सोने की तस्करी करने वाले नेटवर्क उठा रहे हैं।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की तीसरी तिमाही की रिपोर्ट इस चुनौती की गंभीरता दिखाती है। जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान भारत में अनौपचारिक तरीके से आने वाला सोना सालाना आधार पर 1500 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर करीब 50 टन पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 3 टन था। दूसरी तरफ आधिकारिक रास्ते से सोने का शुद्ध आयात 46 प्रतिशत घटकर 114.1 टन रह गया। यानी सोने के कारोबार में वैध आयात और अनौपचारिक आपूर्ति के बीच अंतर तेजी से बदल रहा है।
यहां समझने वाली बात यह है कि बिना बिल वाला सोना केवल टैक्स चोरी का मामला नहीं है। इससे सरकारी राजस्व को नुकसान होता है, वैध कारोबार करने वाले ज्वैलर्स के सामने प्रतिस्पर्धा की चुनौती खड़ी होती है और ग्राहकों के लिए सोने की शुद्धता, हॉलमार्किंग तथा खरीदारी के प्रमाण को लेकर जोखिम बढ़ जाता है। सस्ता सोना खरीदने के चक्कर में ग्राहक नकली या कम शुद्धता वाले आभूषण का शिकार भी हो सकता है।
सर्वे में लोगों से यह भी पूछा गया कि सोने की तस्करी रोकने के लिए सरकार को क्या करना चाहिए। 37 प्रतिशत लोगों ने तस्करी के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई की मांग की। 29 प्रतिशत लोगों का मानना है कि सरकार को आयात शुल्क पर फिर से विचार करना चाहिए, ताकि तस्करी से मिलने वाला मूल्य लाभ खत्म हो सके। वहीं 17 प्रतिशत लोगों ने तस्करी का सोना बेचने वाले कारोबारियों पर कार्रवाई की मांग की। साफ है कि लोगों के एक बड़े हिस्से की अपेक्षा है कि सरकार केवल खरीदारों को जागरूक करने के बजाय तस्करी के पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई करे और नीतिगत स्तर पर भी समाधान तलाशे।
महंगे सोने का असर मांग पर भी दिखाई दे रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत में सोने की कुल मांग मात्रा के हिसाब से 29 प्रतिशत घटकर 162.5 टन रह गई। आभूषणों की मांग 20 प्रतिशत और गोल्ड बार तथा सिक्कों की मांग 40 प्रतिशत कम हुई। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि सोने की कुल मांग का मूल्य 3 प्रतिशत बढ़कर करीब 2.42 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इसका अर्थ है कि भारतीयों ने वजन के हिसाब से कम सोना खरीदा, लेकिन ऊंची कीमतों के कारण उस पर ज्यादा पैसा खर्च किया।
धनतेरस 2026 की यह तस्वीर भारतीय सोने के बाजार के सामने तीन बड़ी चुनौतियां रखती है। पहली, लगातार महंगे होते सोने से आम खरीदार की पहुंच प्रभावित हो रही है। दूसरी, आयात शुल्क और घरेलू कीमतों के अंतर से तस्करी को बढ़ावा मिलने की आशंका है। तीसरी, वैध ज्वैलरी कारोबार और ग्राहकों के भरोसे को बनाए रखना जरूरी है।
सरकार के सामने अब संतुलन बनाने की चुनौती है। एक तरफ विदेशी मुद्रा बचाने और आयात नियंत्रित करने का लक्ष्य है, तो दूसरी तरफ सोने की तस्करी रोकने, राजस्व बचाने और वैध कारोबार को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने की जरूरत है। ऐसे में आयात शुल्क की समीक्षा, तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई और हॉलमार्किंग के प्रति जागरूकता जैसे कदम अहम हो सकते हैं।
धनतेरस पर सोना खरीदना शुभता का प्रतीक जरूर है, लेकिन सस्ती खरीदारी के चक्कर में बिना बिल वाले सोने का जोखिम उठाना समझदारी नहीं है। इस बार सोने की असली चमक केवल उसकी कीमत में नहीं, बल्कि उसकी शुद्धता, वैधता और खरीदारी के भरोसे में छिपी है। सरकार के लिए भी चुनौती यही है कि सोने की चमक तस्करी के अंधेरे में न खो जाए।





