लोगों का भविष्य बताने वाले ज्योतिषाचार्य आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा इन दिनों चर्चा में हैं। लेकिन इस बार चर्चा उनकी किसी भविष्यवाणी को लेकर नहीं, बल्कि उनकी पत्नी की चुनावी हार को लेकर हो रही है। दरअसल, आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा की पत्नी स्मिता मिश्रा ने उत्तर प्रदेश की लखनऊ खंड स्नातक सीट से निर्दलीय विधान परिषद चुनाव लड़ा था। नतीजे आए तो उन्हें 300 वोट भी नहीं मिले। बस फिर क्या था, सोशल मीडिया पर लोगों ने ज्योतिषाचार्य से ही सवाल पूछने शुरू कर दिए।
लखनऊ स्नातक सीट से निर्दलीय लड़ी थीं स्मिता
300 वोट भी नहीं मिले
फिर भी 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी
कोई पूछ रहा है कि पत्नी की हार की भविष्यवाणी क्यों नहीं की, तो कोई जानना चाहता है कि क्या चुनाव जीतने का कोई ज्योतिषीय उपाय नहीं था? आखिर पूरा मामला क्या है, देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट।
दूसरों की किस्मत और भविष्य का हाल बताने वाले आचार्य जी के घर में ही चुनावी गणित बिगड़ गया। लखनऊ खंड स्नातक सीट से उनकी पत्नी स्मिता मिश्रा निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरी थीं। उन्होंने चुनाव के लिए करीब दो साल तक तैयारी करने और शिक्षकों, स्नातकों तथा मतदाताओं के बीच संपर्क बनाने का दावा किया था। लेकिन जब मतगणना हुई तो नतीजे उनकी उम्मीदों के बिल्कुल उलट रहे। स्मिता मिश्रा 300 वोट भी हासिल नहीं कर सकीं। इस सीट पर समाजवादी पार्टी की कांति सिंह ने जीत दर्ज की।
स्मिता मिश्रा की हार के बाद सोशल मीडिया पर निशाने पर उनके पति आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा आ गए। लोगों ने मजाकिया अंदाज में सवाल उठाए कि जो ज्योतिषाचार्य दुनिया की बड़ी-बड़ी घटनाओं की भविष्यवाणी करते हैं, क्या उन्हें अपनी पत्नी के चुनावी नतीजे का अंदाजा नहीं था? क्या पत्नी को चुनाव में उतरने से पहले जीत-हार का संकेत नहीं मिला? क्या चुनावी भविष्य सुधारने का कोई उपाय नहीं बताया गया? हालांकि, यह सोशल मीडिया पर हो रही प्रतिक्रियाएं हैं। खुद स्मिता मिश्रा का कहना है कि उन्होंने अपने चुनावी भविष्य को लेकर पति से कोई सवाल नहीं किया था।
दरअसल, स्मिता मिश्रा की चुनावी यात्रा भी कम दिलचस्प नहीं रही। उन्होंने पहले कांग्रेस की सदस्यता ली थी। बताया जाता है कि तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के समय उन्हें लखनऊ स्नातक सीट से उम्मीदवार बनाए जाने की उम्मीद थी। लेकिन प्रदेश संगठन में बदलाव के बाद उन्हें पार्टी का टिकट नहीं मिला। इसके बाद स्मिता मिश्रा ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया।
हार के बाद उन्होंने चुनाव में गड़बड़ी, मतदाता सूची में नाम नहीं जुड़ने और बूथ पर एजेंटों को बैठने से रोकने जैसे आरोप लगाए हैं। उन्होंने वोट के बदले नोट बांटने का भी आरोप लगाया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन चुनावी हार के बाद भी स्मिता मिश्रा ने राजनीति से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं। उनका कहना है कि वह सत्ता सुख के लिए नहीं, बल्कि जनसेवा और परोपकार के उद्देश्य से चुनाव लड़ रही थीं।
अब उनकी नजर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर है। उन्होंने अपनी पार्टी नवयुवक दल के बैनर तले कम से कम 50 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है। यानी विधान परिषद चुनाव में वोटों का गणित भले ही साथ नहीं आया, लेकिन विधानसभा चुनाव के लिए उन्होंने अभी से तैयारी शुरू करने का संकेत दे दिया है।
फिलहाल ज्योतिषाचार्य आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा अपनी भविष्यवाणियों से ज्यादा पत्नी की चुनावी हार को लेकर चर्चा में हैं। सवाल यह भी है कि क्या किसी ज्योतिषाचार्य के परिवार के सदस्य की चुनावी हार को उनकी भविष्यवाणी से जोड़कर देखना सही है? चुनाव का गणित आखिरकार मतदाताओं के फैसले से तय होता है, ग्रह-नक्षत्रों से नहीं।





