भारतीय संगीत जगत में अपनी अलग पहचान बनाने वाली वरिष्ठ पार्श्व गायिका उषा मंगेशकर को पहला भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका राष्ट्रीय पुरस्कार दिया जाएगा। असम सरकार ने भारतीय संगीत में उनके योगदान और भूपेन हजारिका की रचनाओं से उनके जुड़ाव को देखते हुए यह घोषणा की है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में भूपेन हजारिका की जन्मशती के वर्षभर चले समारोह के समापन कार्यक्रम में उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगे।
कौन हैं उषा मंगेशकर?
परिवार की संगीत विरासत के बीच उषा मंगेशकर ने अपनी गायकी और अलग अंदाज से पहचान बनाई। उन्होंने हिंदी, मराठी सहित कई भाषाओं की फिल्मों के लिए गीत गाए और भक्ति संगीत में भी योगदान दिया।
‘मुंगड़ा’ गीत से मिली खास पहचान
भूपेन हजारिका के नाम पर सम्मान क्यों खास?
भूपेन हजारिका केवल गायक और संगीतकार ही नहीं, बल्कि कवि, गीतकार और फिल्मकार भी थे। उनकी रचनाओं में असम की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदनाएं प्रमुखता से दिखाई देती हैं। उनके नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार शुरू करना उनकी संगीत विरासत को देशव्यापी पहचान देने की पहल है। उषा मंगेशकर को पहला पुरस्कार दिए जाने का महत्व इसलिए भी है कि यह सम्मान भारतीय संगीत की उस पीढ़ी के योगदान को रेखांकित करता है, जिसने क्षेत्रीय भाषाओं और हिंदी सिनेमा के संगीत को व्यापक श्रोताओं तक पहुंचाया।
बड़ा सवाल: संगीत विरासत को नई पीढ़ी तक कैसे पहुंचाया जाए?
यह सम्मान सिर्फ एक वरिष्ठ गायिका की उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा को याद करने का अवसर भी है। भूपेन हजारिका और उषा मंगेशकर जैसे कलाकारों का काम बताता है कि संगीत भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से आगे जाकर लोगों को जोड़ सकता है। उषा मंगेशकर को मिलने वाला पहला भूपेन हजारिका राष्ट्रीय पुरस्कार भारतीय संगीत में उनके लंबे योगदान और सांस्कृतिक विरासत के सम्मान का प्रतीक होगा।





