100 साल की उम्र का बढ़ता आंकड़ा, लंबी जिंदगी का बदलता गणित…जापान में शतक पार करने वालों की संख्या क्यों बढ़ी?
दुनिया में उम्र के शतक को पार करने वाले लोगों की संख्या तेजी से चर्चा में है। जापान ने पहली बार एक लाख का आंकड़ा पार कर नया रिकॉर्ड बनाया है। 15 सितंबर 2026 को जारी जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश में 100 साल या उससे अधिक उम्र के 1,07,677 लोग हैं। इनमें 94,298 महिलाएं यानी करीब 88 प्रतिशत और 13,379 पुरुष हैं।
जापान में शतक पार करने वालों की संख्या क्यों बढ़ी?
जापान में 100 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों की संख्या लगातार 56 वर्षों से बढ़ रही है। जापानी स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसके पीछे जीवन-परिस्थितियों में सुधार, खान-पान और पोषण की बेहतर स्थिति तथा चिकित्सा तकनीक में प्रगति जैसे कारण बताए हैं। यानी लंबी उम्र केवल व्यक्तिगत आदतों का परिणाम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था, पोषण और सामाजिक परिस्थितियों से भी जुड़ा विषय है।
लेकिन इस आंकड़े का दूसरा पहलू भी है। ज्यादा लोग अगर 100 साल तक पहुंच रहे हैं, तो समाज को उन्हें स्वस्थ, सक्रिय और आत्मनिर्भर रखने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं, देखभाल और सामाजिक सुरक्षा की भी ज्यादा जरूरत होगी।
भारत में 100 साल की उम्र तक पहुंचने वाले कितने लोग?
आपके दिए आंकड़ों के मुताबिक भारत में 37,988 लोग 100 साल या उससे अधिक उम्र के हैं और इस तुलना में भारत चौथे स्थान पर बताया गया है। हालांकि, अलग-अलग देशों में जनगणना, रजिस्ट्रेशन और आयु-आंकड़ों की पद्धति अलग होने के कारण अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग को सावधानी से देखना चाहिए।
भारत के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि देश में भी उम्रदराज आबादी बढ़ रही है। ऐसे में 100 साल की उम्र तक पहुंचने वालों की संख्या केवल दीर्घायु का आंकड़ा नहीं, बल्कि आने वाले समय में स्वास्थ्य, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा और बुजुर्ग देखभाल की बढ़ती जरूरत का संकेत भी है।
अमेरिका और चीन भी इस दौड़ में आगे
आपके उपलब्ध आंकड़ों में अमेरिका में 73,629 और चीन में 48,566 लोग 100 साल या उससे ज्यादा उम्र के बताए गए हैं। इस हिसाब से जापान सबसे ऊपर, अमेरिका दूसरे, चीन तीसरे और भारत चौथे स्थान पर बताया गया है।
लेकिन यहां एक अहम फर्क समझना जरूरी है। कुल संख्या और आबादी के अनुपात में संख्या एक जैसी चीज नहीं है। बड़ी आबादी वाले देशों में 100 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की कुल संख्या अधिक हो सकती है। इसलिए किसी देश की दीर्घायु समझने के लिए केवल शतायु लोगों की संख्या नहीं, बल्कि जीवन प्रत्याशा, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा और कुल आबादी के अनुपात को भी देखना जरूरी है।
100 साल की उम्र अब सिर्फ उम्र नहीं, नीति का सवाल
जापान का 1,07,677 का आंकड़ा एक बड़ी जनसांख्यिकीय तस्वीर सामने रखता है। जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक जीवन-परिस्थितियों, पोषण और चिकित्सा प्रगति ने इस बदलाव में योगदान दिया है। साथ ही मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया है कि स्वस्थ जीवन अवधि बढ़ने से बुजुर्ग लंबे समय तक समाज में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
यानी 100 साल तक जीना अपने आप में पूरी कहानी नहीं है। असली सवाल है कि 100 साल की उम्र में व्यक्ति कितना स्वस्थ, सक्रिय और आत्मनिर्भर है। यही वह बिंदु है जहां जापान से लेकर भारत तक बढ़ती उम्र की चुनौती स्वास्थ्य व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा की परीक्षा बन सकती है। दुनिया में जिंदगी लंबी हो रही है, लेकिन अगली चुनौती सिर्फ लंबी जिंदगी नहीं, बल्कि लंबी और स्वस्थ जिंदगी सुनिश्चित करना है।





