गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 से शुरू होने जा रही है। देशभर में पंडाल सजने लगे हैं और सार्वजनिक आयोजनों की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी के साथ इस बार सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, तेज आवाज, पर्यावरण और मूर्तियों के स्वरूप को लेकर भी चर्चा बढ़ी है। कई शहरों में प्रशासन पंडाल समितियों से अतिरिक्त सावधानी बरतने को कह रहा है। सवाल यह है कि ये नियम श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं या फिर त्योहार की आजादी पर जरूरत से ज्यादा नियंत्रण बढ़ रहा है?
भोपाल में गणेश पंडालों पर CCTV लगाने के निर्देश, सुरक्षा के साथ निजता पर भी उठे सवाल
भोपाल में पुलिस प्रशासन ने गणेश उत्सव समितियों को पंडाल और प्रतिमा स्थल पर CCTV कैमरे लगाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य चोरी रोकना, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना और किसी घटना की स्थिति में मदद करना है। बड़े पंडालों में हजारों लोग आते हैं, इसलिए कैमरों के साथ प्रशिक्षित स्वयंसेवक, आग से बचाव के उपकरण, अलग प्रवेश-निकास और मेडिकल सुविधा भी जरूरी हैं। CCTV लगे तो रिकॉर्डिंग की सुरक्षा और लोगों की निजता का भी ध्यान रखना होगा।
बढ़ती भीड़ ने बदली पंडालों की चुनौती, सोशल मीडिया से अचानक हजारों लोग पहुंच सकते हैं
सूरत में गणेश स्वागत जुलूसों के दौरान बड़ी भीड़ जुटने की खबरों ने भीड़ प्रबंधन की चुनौती सामने रखी है। कुछ आयोजनों में 10 हजार से 20 हजार तक लोगों के पहुंचने की बात सामने आई। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाला कोई जुलूस या खास मूर्ति कुछ ही समय में बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित कर सकती है। ऐसे में आयोजकों को पुलिस, अस्पताल, दमकल और ट्रैफिक विभाग के साथ पहले से योजना बनानी होगी।
DJ की तेज आवाज पर बहस तेज, पारंपरिक ढोल-ताशे को लेकर भी सामने आई अलग राय
गणेश उत्सव में DJ की तेज आवाज को लेकर भी कई जगह बहस चल रही है। पुणे में कुछ लोग तेज DJ के बजाय ढोल-ताशे जैसे पारंपरिक वाद्य अपनाने की मांग कर रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि बदलाव बातचीत से होना चाहिए। देश में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर और सार्वजनिक ध्वनि प्रणाली को लेकर नियम लागू हैं। इन नियमों को हर तरह के आयोजनों पर समान रूप से लागू करना जरूरी है।
AI से बनी मूर्तियों पर भी विवाद, परंपरा और नई तकनीक के बीच खड़ा हुआ सवाल
भोपाल में कुछ धार्मिक संगठनों ने AI की मदद से तैयार या पारंपरिक स्वरूप से अलग मूर्तियों पर आपत्ति जताई है। हालांकि, यह कोई देशव्यापी सरकारी प्रतिबंध नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार CCTV को लेकर प्रशासनिक निर्देश थे, जबकि AI आधारित मूर्तियों और आपत्तिजनक DJ गीतों पर कार्रवाई की मांग समिति की ओर से रखी गई। ऐसे मामलों में परंपरा का सम्मान रखते हुए कलाकारों और धार्मिक विशेषज्ञों से चर्चा का रास्ता बेहतर हो सकता है।
पर्यावरण की जिम्मेदारी भी जरूरी, मिट्टी की मूर्तियों और सुरक्षित विसर्जन पर जोर
गणेश उत्सव के दौरान पर्यावरण की चिंता भी लगातार बढ़ रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संशोधित गाइडलाइंस में प्राकृतिक मिट्टी और गैर-विषैले रंगों से बनी मूर्तियों को बढ़ावा दिया गया है, जबकि प्लास्टर ऑफ पेरिस, प्लास्टिक, थर्मोकोल और सिंथेटिक पेंट से बचने की सलाह दी गई है। इसके साथ शहरों को विसर्जन के लिए उचित स्थान और सुविधाएं भी उपलब्ध करानी होंगी। नियमों का उद्देश्य आस्था रोकना नहीं, बल्कि उत्सव के साथ पर्यावरण और सार्वजनिक सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाना होना चाहिए।





