5 सितंबर को पेइचिंग में भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को
बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष ‘इंडिया कल्चर डे’ इवेंट का आयोजन किया
गया। चीन स्थित भारतीय दूतावास और हाओहान थिंक टैंक के संयुक्त सहयोग से
आयोजित इस कार्यक्रम में 200 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें भारत और
चीन के सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोग, विभिन्न देशों के राजनयिक, विशेषज्ञ और
पेइचिंग में अध्ययनरत चीनी विद्यार्थियों के प्रतिनिधि शामिल रहे।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण भारत के पारंपरिक त्योहार रक्षा बंधन का उत्सव रहा।
रक्षा बंधन भाई-बहन के प्रेम, स्नेह, सुरक्षा और आपसी प्रतिबद्धता का प्रतीक माना
जाता है। इस अवसर ने भारतीय संस्कृति की इस खूबसूरत परंपरा को चीनी और
अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के साथ साझा करने का अवसर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत चीन स्थित भारतीय दूतावास के सांस्कृतिक विभाग की सेकेंड
सेक्रेटरी सी.पी. लक्ष्मी के संबोधन से हुई। उन्होंने रक्षा बंधन के इतिहास और
भारतीय समाज में इसके सांस्कृतिक महत्व के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम में भारतीय और चीनी संस्कृति को करीब से जानने और अनुभव करने के
लिए कई इंटरैक्टिव गतिविधियां आयोजित की गईं। प्रतिभागियों ने हिना आर्ट के
माध्यम से पारंपरिक भारतीय मेहंदी डिजाइनों की खूबसूरती को महसूस किया। वहीं,
भारतीय डांस वर्कशॉप में उन्होंने भारतीय नृत्य की लय, भाव और ऊर्जा का अनुभव
किया। योग वर्कशॉप ने प्रतिभागियों को शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन की
भारतीय अवधारणा से परिचित कराया।
भारतीय संस्कृति के साथ-साथ कार्यक्रम में पारंपरिक चीनी संस्कृति को भी प्रमुख
स्थान दिया गया। प्रतिभागियों ने चीनी कैलिग्राफी और पारंपरिक पेपर-कटिंग जैसी
अमूर्त सांस्कृतिक विरासत कलाओं में हिस्सा लिया। इस तरह कार्यक्रम केवल
भारतीय संस्कृति के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत और चीन की
सांस्कृतिक परंपराओं को एक ही मंच पर अनुभव करने का अवसर बना।
कार्यक्रम में एक विशेष कल्चरल फोटो अपॉर्चुनिटी एरिया भी बनाया गया, जहां
अलग-अलग देशों से आए मेहमानों ने भारतीय और चीनी सांस्कृतिक परिधानों और
परंपराओं के साथ तस्वीरें खिंचवाईं। आयोजकों ने भारतीय मिल्क टी और स्नैक्स के
साथ चीनी रिफ्रेशमेंट भी उपलब्ध कराए, जिससे सांस्कृतिक अनुभव में खान-पान
का रंग भी जुड़ गया।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राउंडटेबल फोरम रहा। इसमें भारत, चीन, रूस,
जापान, मोरक्को और अन्य देशों के अधिकारी, विशेषज्ञ तथा सांस्कृतिक हस्तियां
शामिल हुईं। चर्चा के दौरान विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, आपसी
समझ और एक-दूसरे से सीखने की संभावनाओं पर विचार साझा किए गए।
यह आयोजन इस बात का उदाहरण रहा कि संस्कृति लोगों को जोड़ने और एक-दूसरे
की परंपराओं को समझने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। राखी के एक छोटे से
धागे से लेकर योग, नृत्य, मेहंदी, कैलिग्राफी और पेपर-कटिंग जैसे कलाओं ने भारत
और चीन की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को संवाद और सहभागिता के एक साझा
मंच पर ला दिया।
(साभार—दिव्या पाण्डेय, चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)





