सफलता मिलने के बाद भी जिंदगी हमेशा आसान नहीं रहती। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के रहने वाले प्रशांत उइके की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। महज 20 साल की उम्र में MPPSC परीक्षा पास कर DSP बनने वाले प्रशांत को एक गंभीर सड़क हादसे के बाद नौकरी छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्हें लोगों के ताने और आलोचनाएं भी सुननी पड़ीं, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी। दोबारा पढ़ाई शुरू की और आखिरकार MPPSC 2020 में सफलता हासिल कर डिप्टी कलेक्टर का पद प्राप्त किया।
आदिवासी जिले से निकलकर 20 साल की उम्र में MPPSC पास कर DSP बनने का सपना किया साकार
प्रशांत उइके मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से आते हैं। उन्होंने साल 2016 में MPPSC की तैयारी शुरू की थी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई पर लगातार ध्यान दिया और अपनी तैयारी को सही दिशा में आगे बढ़ाया। मेहनत का परिणाम भी जल्द सामने आया और सिर्फ 20 साल की उम्र में उन्होंने MPPSC परीक्षा पास कर DSP पद हासिल कर लिया। आदिवासी बहुल बैतूल जैसे जिले से निकलकर इतनी कम उम्र में अधिकारी बनना उनके परिवार के लिए बेहद गर्व का पल था।
DSP की जॉइनिंग के कुछ ही दिन बाद सड़क हादसे ने बदल दी प्रशांत की पूरी जिंदगी
प्रशांत की जिंदगी में बड़ा बदलाव तब आया, जब DSP की नौकरी जॉइन करने के कुछ ही दिनों बाद वह गंभीर सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए। हादसे में उनके पैर में गंभीर चोट आई और बाद में गैंग्रीन की समस्या भी सामने आई। इलाज के दौरान उन्हें कई सर्जरी से गुजरना पड़ा। चोट इतनी गंभीर थी कि पुलिस की फील्ड ड्यूटी और वर्दी वाली जिम्मेदारी निभाना उनके लिए मुश्किल हो गया। आखिरकार परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें DSP की नौकरी छोड़कर वापस घर लौटना पड़ा।
नौकरी छूटने के बाद दर्द के साथ समाज के ताने भी मिले, लेकिन प्रशांत ने जवाब देने का रास्ता चुना
नौकरी छोड़ने के बाद प्रशांत के लिए मुश्किलें कम नहीं हुईं। शारीरिक परेशानी के साथ उन्हें आसपास के लोगों की बातों और तानों का भी सामना करना पड़ा। कुछ लोगों ने यहां तक कहना शुरू कर दिया कि उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है। लोगों की बातें उन्हें भीतर तक परेशान करती थीं। उनके पिता को भी तरह-तरह की सलाह दी जाने लगी। हालांकि प्रशांत ने इन बातों में उलझने के बजाय अपनी जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने का फैसला किया।
आर्थिक परेशानी और कोरोना लॉकडाउन के बीच फिर शुरू की MPPSC की तैयारी
प्रशांत ने एक बार फिर किताबें उठाईं और MPPSC की तैयारी में जुट गए। इस बार उनके सामने पहले से ज्यादा चुनौतियां थीं। शारीरिक परेशानी, आर्थिक दिक्कत और कोरोना लॉकडाउन के बावजूद उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा। 2019 और 2020 की परीक्षाओं के दौरान उन्होंने लगातार पढ़ाई जारी रखी। उनके लिए यह सिर्फ परीक्षा पास करने की कोशिश नहीं थी, बल्कि खुद को साबित करने का मौका भी था।
9 जून 2023 को आया वह नतीजा, जिसने तानों और संघर्ष का पूरा हिसाब कर दिया
प्रशांत की मेहनत आखिरकार रंग लाई। 9 जून 2023 को MPPSC का रिजल्ट सामने आया और इस बार उन्होंने डिप्टी कलेक्टर का पद हासिल कर लिया। जिस युवक को कभी DSP की नौकरी छोड़ने के बाद लोगों के ताने सुनने पड़े थे, उसी ने दोबारा परीक्षा पास करके अपनी काबिलियत साबित कर दी। प्रशांत उइके की कहानी बताती है कि जिंदगी में परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत जारी रहे तो असफलता को भी नई सफलता की शुरुआत बनाया जा सकता है।





