रूस और यूक्रेन के बीच जंग अब सिर्फ सीमा पर आमने-सामने लड़ रहे सैनिकों तक सीमित नहीं है। मिसाइलों और ड्रोन ने पूरे युद्ध को एक नए और ज्यादा खतरनाक चरण में पहुंचा दिया है। दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर लगातार हमले कर रहे हैं और हर हमले के साथ जवाबी कार्रवाई का खतरा बढ़ रहा है।
विश्लेषकों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच जारी एयर वॉर रूस के 2022 के पूर्ण पैमाने पर हमले के शुरुआती महीनों के बाद के सबसे तीव्र दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है। लेकिन इस बढ़ती सैन्य ताकत के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या इन हमलों से युद्ध खत्म होने की कोई राह निकलेगी? फिलहाल जवाब नकारात्मक नजर आता है।
रूस और यूक्रेन दोनों ही पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहे। मिसाइलों और ड्रोन के जरिए एक-दूसरे पर दबाव बनाने की रणनीति जारी है। लेकिन सैन्य दबाव बढ़ने के बावजूद राजनीतिक समाधान की दिशा में कोई निर्णायक प्रगति दिखाई नहीं दे रही। यानी आसमान में हमले बढ़ रहे हैं, लेकिन शांति की जमीन अभी भी दूर है।
सर्दी बढ़ाएगी नागरिकों की मुश्किल
इस युद्ध का सबसे बड़ा और सबसे दर्दनाक चेहरा आम नागरिक हैं। जैसे-जैसे सर्दी करीब आती है, मिसाइल और ड्रोन हमलों का असर सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा। बिजली, ऊर्जा, परिवहन और दूसरी जरूरी सेवाओं पर हमलों का खतरा नागरिक जीवन को और मुश्किल बना सकता है। युद्ध के मैदान में सैनिक लड़ रहे हैं, लेकिन उसकी सबसे लंबी कीमत आम लोगों को चुकानी पड़ रही है। युद्ध जीतने की कोशिश में शहर हार रहे हैं।
कीव में खुफिया एजेंसियों की भिड़ंत ने बढ़ाई चिंता
इस बीच कीव में प्रतिद्वंद्वी खुफिया एजेंसियों के बीच गोलीबारी में यूक्रेन की सैन्य खुफिया सेवा के तीन सदस्यों के घायल होने की खबर ने संघर्ष की एक और परत सामने ला दी है। इस घटना का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि यह संकेत देती है कि युद्ध सिर्फ रूस और यूक्रेन की सेनाओं के बीच मोर्चे पर नहीं लड़ा जा रहा। खुफिया नेटवर्क, गुप्त अभियान और अंदरूनी टकराव भी इस संघर्ष का हिस्सा बन चुके हैं। यानी युद्ध जितना दिखाई दे रहा है, उससे कहीं ज्यादा गहराई में चल रहा है।
सबसे बड़ा सवाल—अंत कहां है?
रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष अब उस मोड़ पर है जहां सैन्य क्षमता लगातार बढ़ रही है, लेकिन समाधान की संभावना उतनी ही धुंधली होती जा रही है। मिसाइलें ज्यादा दूर तक पहुंच रही हैं, ड्रोन ज्यादा गहराई तक जा रहे हैं और जवाबी हमलों का दायरा बढ़ रहा है। लेकिन हर नए हमले के साथ एक सवाल और बड़ा हो रहा है— अगर सैन्य ताकत दोनों देशों को जीत नहीं दिला पा रही, तो शांति की शुरुआत आखिर कैसे होगी? यही रूस-यूक्रेन युद्ध की सबसे बड़ी त्रासदी है। जंग के हथियार आधुनिक होते जा रहे हैं, लेकिन समाधान अब भी कूटनीति की मेज पर ही तलाशना होगा।





