तिरुपति। आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में शामिल तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम यानी TTD एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला मंदिर में दर्शन या प्रसाद का नहीं, बल्कि मंदिर प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ हुई एंटी-करप्शन कार्रवाई का है। आंध्र प्रदेश एंटी-करप्शन ब्यूरो यानी ACB ने TTD के डिप्टी एग्जीक्यूटिव ऑफिसर मेंडु लोकनाथम से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में सोना, चांदी, नकदी, फिक्स्ड डिपॉजिट और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं। ACB की कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक सरकारी अधिकारी के पास इतनी संपत्ति कैसे जमा हुई और क्या यह संपत्ति उनकी घोषित आय और वैध आय के स्रोतों से मेल खाती है?
CBI की जानकारी से ACB तक पहुंचा मामला
इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि तिरुपति लड्डू में कथित मिलावट मामले की जांच से भी जुड़ती है। रिपोर्ट के मुताबिक, CBI की जांच और चार्जशीट दाखिल होने के बाद TTD के कुछ कर्मचारियों की संपत्तियों को लेकर जानकारी ACB तक पहुंची थी। इसी इनपुट के आधार पर ACB ने लोकनाथम के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया और बुधवार सुबह एक साथ कई ठिकानों पर तलाशी शुरू की।
ACB DSP श्रीनिवास राव के नेतृत्व में सात टीमों ने सुबह करीब 6 बजे कार्रवाई शुरू की। तिरुपति में अधिकारी के घर और कार्यालय के अलावा उनके रिश्तेदारों से जुड़े ठिकानों पर भी एक साथ तलाशी ली गई। यानी कार्रवाई सिर्फ एक घर तक सीमित नहीं थी। जांच एजेंसी ने संपत्ति के संभावित नेटवर्क को खंगालने के लिए कई ठिकानों को एक साथ निशाना बनाया।
तलाशी में क्या-क्या मिला?
ACB के मुताबिक, तलाशी के दौरान बरामदगी की सूची में कई ऐसी चीजें शामिल हैं, जो जांच को गंभीर बनाती हैं।
2 किलो सोना,
6.5 किलो चांदी,
12.5 लाख रुपये नकद,
चार फिक्स्ड डिपॉजिट,
और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए।
ACB के अनुसार जब्त संपत्तियों की शुरुआती बुक वैल्यू करीब 5 करोड़ रुपये आंकी गई है। यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है—बुक वैल्यू और मौजूदा बाजार मूल्य एक ही चीज नहीं होते। किसी संपत्ति की खरीद या सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कीमत और आज उसकी वास्तविक बाजार कीमत अलग हो सकती है। इसलिए बरामद संपत्तियों का वास्तविक मूल्य जांच आगे बढ़ने पर ही स्पष्ट होगा।
सोना-चांदी से ज्यादा अहम हैं संपत्ति के कागजात
इस छापेमारी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सिर्फ सोना और कैश नहीं है। असली जांच अब प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट्स, बैंकिंग रिकॉर्ड, फिक्स्ड डिपॉजिट और आय के स्रोतों के इर्द-गिर्द घूमेगी।
किस संपत्ति को कब खरीदा गया?
उसकी कीमत कितनी थी?
भुगतान किस खाते से हुआ?
फिक्स्ड डिपॉजिट में रकम कब और कैसे जमा हुई?
सोने और चांदी की खरीद के बिल क्या हैं?
क्या इन संपत्तियों की जानकारी संबंधित अधिकारी के आयकर रिटर्न और विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज थी?
ये वे सवाल हैं जिनके जवाब जांच एजेंसी तलाशेगी। यही वजह है कि इस कार्रवाई को सिर्फ ‘छापे में सोना मिलने’ की खबर मानना अधूरा होगा। असल कहानी अब शुरू होती है—बरामद संपत्ति और ज्ञात आय के बीच कितना अंतर है?
TTD में एक दशक में दूसरी बड़ी ACB कार्रवाई
तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम से जुड़े अधिकारी के खिलाफ यह पहली ऐसी कार्रवाई नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब एक दशक में दूसरी बार ACB ने TTD के किसी अधिकारी से जुड़े परिसरों पर इस तरह की तलाशी ली है। इससे पहले 2016 में TTD के तत्कालीन डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर टी. भूपति रेड्डी से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई हुई थी। उस समय तिरुपति के साथ बेंगलुरु में उनके रिश्तेदारों और करीबी सहयोगियों के ठिकानों पर भी तलाशी ली गई थी। उस कार्रवाई की पृष्ठभूमि भी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के आरोप से जुड़ी थी।
‘खजाना’ शब्द से आगे समझिए पूरा मामला
छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति मिलना निश्चित रूप से सुर्खियां बनाता है, लेकिन कानूनी तौर पर किसी बरामद संपत्ति का मिलना अपने आप में भ्रष्टाचार सिद्ध नहीं करता। जांच एजेंसी को यह साबित करना होगा कि संबंधित संपत्ति ज्ञात और वैध आय के स्रोतों से मेल नहीं खाती या उसके स्रोत का संतोषजनक हिसाब नहीं दिया जा सका।
यानी अब तीन स्तरों पर जांच महत्वपूर्ण होगी—
पहला—कितनी संपत्ति मिली?
दूसरा—उसकी वास्तविक कीमत कितनी है?
तीसरा—उस संपत्ति का पैसा आया कहां से?
अगर बरामद संपत्ति का वैध आय से हिसाब नहीं बैठता है, तभी आय से अधिक संपत्ति का आरोप जांच में मजबूत हो सकता है।
तिरुपति लड्डू जांच से नया कनेक्शन क्यों अहम?
इस पूरे घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण पहलू है—तिरुपति लड्डू विवाद की जांच और TTD के अधिकारियों-कर्मचारियों की संपत्तियों की जांच का संदर्भ। लड्डू मामले की जांच के दौरान सामने आई सूचनाओं के आधार पर अगर अन्य अधिकारियों की संपत्तियों की भी जांच आगे बढ़ती है, तो यह कार्रवाई केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रह सकती। हालांकि किसी भी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई या आरोप की पुष्टि जांच एजेंसी की आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही मानी जानी चाहिए।
अब आगे क्या होगा?
ACB की छापेमारी के बाद बरामद दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच सबसे अहम चरण होगा। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि अधिकारी और उनके परिवार/रिश्तेदारों से जुड़ी संपत्तियों का स्रोत क्या है। बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट, संपत्ति खरीद, सोने-चांदी की खरीद और आय के घोषित स्रोतों का मिलान किया जा सकता है। अगर दस्तावेजों में कोई असंगति मिलती है, तो जांच आगे बढ़ सकती है और संबंधित व्यक्ति से पूछताछ के साथ अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
तिरुपति में हुई यह छापेमारी इसलिए बड़ी है क्योंकि यहां बरामदगी सिर्फ 12.5 लाख रुपये नकद तक सीमित नहीं रही। 2 किलो सोना, 6.5 किलो चांदी, चार FDs और संपत्ति के दस्तावेजों ने जांच को एक बड़े वित्तीय सवाल में बदल दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—मंदिर के अधिकारी की घोषित आय और मिली संपत्ति का हिसाब कितना मेल खाता है? ACB की जांच इसी सवाल का जवाब तलाशेगी। और अगर संपत्तियों का स्रोत आय से बाहर निकलता है, तो तिरुपति की यह छापेमारी महज एक कार्रवाई नहीं, बल्कि TTD के भीतर संपत्ति और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर बड़ा मामला बन सकती है।





