सूखा, मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण चीन और अरब देशों के सामने मौजूद प्रमुख वैश्विक
पर्यावरणीय चुनौतियों में शामिल हैं।
17 से 28 अगस्त तक "मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र संधि" यानी UNCCD के
हस्ताक्षरकर्ता देशों का सम्मेलन UNCCD COP17 मंगोलिया की राजधानी उलानबातर में
आयोजित किया जा रहा है। इसी बीच, 22 अगस्त की शाम UNCCD COP17 के दौरान सूखा,
मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण के लिए चीन-अरब अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र की संचालन समिति
की दूसरी विस्तारित बैठक और चीन-अरब सहयोग संगोष्ठी आयोजित की गई। बैठक में "सूखा,
मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण की रोकथाम के लिए चीन-अरब पंचवर्षीय कार्य योजना" को मंजूरी
दी गई और इसे आधिकारिक तौर पर जारी किया गया।
चीनी वानिकी अकादमी की उपाध्यक्ष थ्स्वेइ लिच्वान ने बताया कि कार्य योजना के तहत अगले पांच
वर्षों में दोनों पक्ष चीन अरब अंतर्राष्ट्रीय सूखा, मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण अनुसंधान केंद्र, जिसे
संक्षेप में "चीन-अरब केंद्र" कहा जाता है, जैसे सहयोग मंचों और साझेदारी नेटवर्क का इस्तेमाल
करेंगे। इसके तहत मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण की रोकथाम, धूल भरी आंधियों की निगरानी,
पूर्वानुमान और पूर्व चेतावनी, घास के मैदानों का संरक्षण और उपयोग, जैव विविधता संरक्षण तथा
आर्द्रभूमि संरक्षण और बहाली जैसे प्रमुख क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को मजबूत किया जाएगा।
इसके साथ ही, कार्य योजना के तहत चीन और अरब देश मरुस्थलीकरण नियंत्रण नेटवर्क को बेहतर
बनाएंगे और नीतियों, तकनीकों तथा उपलब्धियों को साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करेंगे।
दोनों पक्ष "बेल्ट एंड रोड" पहल के तहत मरुस्थलीकरण नियंत्रण में साझेदारी का विस्तार करेंगे और
UNCCD के कार्यान्वयन के लिए प्रदर्शन आधार तैयार करने को बढ़ावा देंगे। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय
आदान प्रदान और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देते हुए युवा विशेषज्ञों के बीच आदान प्रदान, संयुक्त
अनुसंधान, क्षेत्रीय प्रदर्शन और तकनीकी प्रशिक्षण जैसे माध्यमों से मरुस्थलीकरण से निपटने में
चीन अरब सहयोग को लगातार मजबूत किया जाएगा।
बता दें कि "चीन-अरब केंद्र" की स्थापना अगस्त 2023 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2022
में आयोजित पहले चीन अरब राज्य शिखर सम्मेलन में प्रस्तावित चीन और अरब देशों के बीच
व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाना है। इसके तहत मरुस्थलीकरण नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में सहयोग
को गहरा करने के साथ सूखे के प्रभाव को कम करने, मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण को रोकने के
लिए वैज्ञानिक और तकनीकी सहायता, नीतिगत निर्णयों में सहयोग तथा विचार विमर्श जैसी सेवाएं
उपलब्ध कराना भी शामिल है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)





