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खेती से आगे बढ़कर कमाई का नया मॉडल तैयार कर रही MP सरकार… किसान कल्याण वर्ष में कृषि-पशुपालन-उद्यानिकी पर बड़ा फोकस

DigitalDesk by DigitalDesk
August 19, 2026
in कृषि
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income model beyond traditional farming
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मध्यप्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के दौरान सरकार की रणनीति अब सिर्फ फसल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुना में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को संबोधित करते हुए कृषि के साथ पशुपालन और उद्यानिकी को किसानों की आय बढ़ाने का प्रमुख माध्यम बनाने पर जोर दिया है। कुंभराज धनिया को जल्द जीआई टैग दिलाने और प्रदेश में उद्यानिकी का रकबा 20 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य इसी बदलती रणनीति का संकेत है।

खेती के साथ कमाई के दूसरे रास्ते

किसानों की आय बढ़ाने की चुनौती केवल ज्यादा उत्पादन से पूरी नहीं होती। खेती की लागत, मौसम, बाजार भाव और फसल जोखिम किसान की कमाई को प्रभावित करते हैं। ऐसे में सरकार अब किसान की आय के कई स्रोत विकसित करने पर जोर दे रही है।

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एक किसान अगर पारंपरिक फसल के साथ पशुपालन, डेयरी, बागवानी या फूलों की खेती से जुड़ता है, तो उसकी आमदनी केवल एक फसल के बाजार भाव पर निर्भर नहीं रहती। यही वजह है कि मध्यप्रदेश सरकार कृषि को एक मल्टी-इनकम मॉडल में बदलने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

कुंभराज धनिया को GI टैग—गुना की पहचान को बाजार से जोड़ने की तैयारी

गुना के कुंभराज धनिया को जीआई टैग दिलाने की घोषणा इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जीआई टैग किसी क्षेत्र विशेष से जुड़े ऐसे उत्पाद को पहचान देता है, जिसकी गुणवत्ता या विशेषता उसके भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती है। कुंभराज धनिया को यह पहचान मिलने के बाद इसके ब्रांड मूल्य को बढ़ाने की संभावना बन सकती है।

लेकिन असली फायदा तभी होगा जब जीआई टैग के साथ—

  • बेहतर पैकेजिंग,
  • ब्रांडिंग,
  • प्रोसेसिंग,
  • देशभर में मार्केटिंग,
  • डिजिटल बिक्री

और निर्यात की व्यवस्था भी मजबूत की जाए।

यानी GI टैग शुरुआत है, अंतिम मंजिल नहीं।

उद्यानिकी रकबा 20% बढ़ाने का मतलब क्या?

प्रदेश में उद्यानिकी का रकबा 20 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य भी महत्वपूर्ण है। फल, सब्जियां, मसाले, फूल और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलें किसानों को पारंपरिक अनाज की तुलना में कई परिस्थितियों में अधिक मूल्य देने की क्षमता रखती हैं। गुना की धनिया और गुलाब उत्पादन में पहचान पहले से है। ऐसे क्षेत्रों में सरकार अगर उत्पादन के साथ प्रोसेसिंग और मार्केटिंग को जोड़ती है, तो किसान को कच्चा माल बेचने के बजाय वैल्यू एडेड उत्पाद से अधिक कमाई का अवसर मिल सकता है। यानी सरकार की चुनौती अब सिर्फ यह नहीं होगी कि किसान कितना उत्पादन करता है, बल्कि यह होगी कि उत्पादन के बाद किसान को बाजार में कितनी कीमत मिलती है।

डेयरी को बनाया जा सकता है ग्रामीण अर्थव्यवस्था का दूसरा इंजन

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य भी बताया है। यह लक्ष्य कृषि से जुड़े ग्रामीण परिवारों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डेयरी खेती की तुलना में नियमित नकदी प्रवाह दे सकती है। फसल का पैसा अक्सर कटाई और बिक्री के बाद आता है, जबकि दूध से रोजाना या नियमित आय प्राप्त हो सकती है। लेकिन इसके लिए सिर्फ पशुओं की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा।

जरूरत होगी—

बेहतर नस्ल → बेहतर पशु स्वास्थ्य → पर्याप्त चारा → आधुनिक डेयरी → दूध संग्रह → प्रसंस्करण → बेहतर बाजार।

अगर यह पूरी चेन विकसित होती है, तो पशुपालन किसानों की आय का मजबूत आधार बन सकता है।

युवाओं को खेती से जोड़ना सबसे बड़ी चुनौती

मध्यप्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल ग्रामीण युवाओं का खेती से दूर होना भी है। मुख्यमंत्री ने युवाओं को उन्नत गोपालन और डेयरी विकास से जोड़ने की बात कही है। यहां सरकार के सामने एक बड़ा अवसर है। अगर कृषि को पारंपरिक खेती की जगह एग्री-बिजनेस के रूप में पेश किया जाए तो युवा केवल खेत में काम करने वाला व्यक्ति नहीं रहेगा, बल्कि वह—

  • एग्री-प्रोसेसिंग उद्यमी,
  • डेयरी संचालक,
  • कृषि मशीनरी सेवा प्रदाता,
  • कोल्ड स्टोरेज संचालक,
  • डिजिटल एग्री-मार्केटिंग कारोबारी

और कृषि आधारित स्टार्टअप का संचालक बन सकता है।

सिंचाई और बिजली—कृषि की बुनियादी जरूरत

सरकार ने सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और दिन में बिजली उपलब्ध कराने को भी कृषि विकास से जोड़ा है। यह मुद्दा सीधे किसान की उत्पादकता और लागत से जुड़ा है। यदि किसान को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी और कृषि कार्य के लिए भरोसेमंद बिजली मिलती है, तो वह एक फसल से आगे बढ़कर अधिक विविध और उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर जाने का जोखिम उठा सकता है। यानी सिंचाई और बिजली सिर्फ सुविधा नहीं, कृषि विविधीकरण की बुनियादी शर्त हैं।

प्राकृतिक खेती पर भी जोर

गुना विधायक पन्नालाल शाक्य ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। यह भी सरकार की व्यापक कृषि रणनीति से जुड़ता है। प्राकृतिक खेती की दिशा में बढ़ने का उद्देश्य केवल लागत कम करना नहीं है। इसके साथ मिट्टी की गुणवत्ता, रासायनिक इनपुट पर निर्भरता और लंबे समय की उत्पादकता जैसे मुद्दे जुड़े हैं। हालांकि प्राकृतिक खेती का विस्तार तभी टिकाऊ होगा जब किसानों को उत्पादन, प्रमाणन, बाजार और उचित मूल्य—चारों स्तर पर समर्थन मिले।

सबसे अहम संदेश—कृषि भूमि बचाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने किसानों से कृषि भूमि नहीं बेचने और बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील भी की। यह बयान केवल सामाजिक अपील नहीं है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और जमीन के बढ़ते मूल्य के बीच कृषि भूमि का गैर-कृषि उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए लंबी अवधि में चुनौती बन सकता है। सरकार का संदेश स्पष्ट है—किसान की जमीन सिर्फ आज की संपत्ति नहीं, आने वाली पीढ़ियों की आर्थिक सुरक्षा भी है।

अब असली परीक्षा अमल की

सरकार ने कृषि, पशुपालन और उद्यानिकी को एक साथ जोड़कर किसान आय बढ़ाने का जो मॉडल सामने रखा है, उसमें संभावनाएं बड़ी हैं। लेकिन इसकी सफलता कुछ महत्वपूर्ण बातों पर निर्भर करेगी। क्या किसान को उसकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा? क्या GI टैग वाले उत्पाद की ब्रांडिंग और बिक्री बढ़ेगी? क्या उद्यानिकी की फसलों के लिए पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग सुविधाएं उपलब्ध होंगी? क्या डेयरी में छोटे किसानों को संगठित बाजार मिलेगा? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या कृषि से जुड़ी पूरी वैल्यू चेन में किसान की हिस्सेदारी बढ़ेगी? मध्यप्रदेश सरकार की मौजूदा कृषि रणनीति का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि किसान की आय को सिर्फ खेत की फसल से जोड़ने के बजाय कृषि आधारित पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की कोशिश हो रही है।

कुंभराज धनिया का GI टैग, उद्यानिकी रकबे में 20 प्रतिशत वृद्धि, दुग्ध उत्पादन को 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य, पशु नस्ल सुधार, प्राकृतिक खेती और युवाओं को कृषि से जोड़ना—ये सभी अलग-अलग घोषणाएं नहीं बल्कि एक बड़े मॉडल के हिस्से के रूप में देखे जा सकते हैं। इस मॉडल की सफलता का अंतिम पैमाना यही होगा कि किसान कितना उत्पादन करता है, यह नहीं; उत्पादन के बाद उसकी जेब में कितना पैसा बचता है।

अगर सरकार उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक की पूरी श्रृंखला को मजबूत कर पाती है, तो मध्यप्रदेश में खेती सिर्फ जीविका का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण उद्यम और स्थायी आय का बड़ा इंजन बन सकती है।

Tags: #Animal husbandry and horticulture alongside farming #Key means to increase farmers income
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