मानसून फिर एक्टिव, कई जिलों में तेज बारिश
- मध्यप्रदेश में फिर सक्रिय हुआ मानसून
- 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
- जबलपुर में पांच इंच बारिश
- 40 किमी प्रति घंटे तक चलेंगी हवाएं
- पूर्वी एमपी में बारिश की कमी ज्यादा
- गरज-चमक के दौरान सावधानी जरूरी
मध्यप्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है और अगले पांच दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने अलग-अलग अवधि में कई जिलों में भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। 18 से 19 अगस्त के बीच रीवा, बालाघाट, सिंगरौली, सीधी, शहडोल, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़ और पांढुर्णा समेत कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है। वहीं पिछले 24 घंटे में जबलपुर के सीहोरा में करीब पांच इंच बारिश दर्ज की गई।
बारिश के अलर्ट के बीच एमपी के मौसम की पूरी तस्वीर
मध्यप्रदेश में मानसून का मिजाज एक बार फिर बदलता दिखाई दे रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी, गरज-चमक और बारिश का दौर जारी है, जबकि मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों के दौरान अलग-अलग जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। खास तौर पर पूर्वी और मध्य मध्यप्रदेश के कई जिलों में मौसम सक्रिय रहने वाला है। ऐसे में आने वाले दिनों में नदी-नालों के जलस्तर, निचले इलाकों में जलभराव और ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन पर भी असर पड़ सकता है।
18 अगस्त की सुबह से 19 अगस्त तक रीवा, बालाघाट, सिंगरौली, सीधी, शहडोल, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़ और पांढुर्णा में कहीं-कहीं भारी बारिश का अनुमान है। इस दौरान गरज-चमक के साथ करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चल सकती हैं। इसका मतलब यह है कि सिर्फ बारिश ही नहीं, बल्कि तेज हवा और आकाशीय बिजली भी स्थानीय स्तर पर खतरा पैदा कर सकती है।
मौसम का असर अगले दिन भी जारी रहने की संभावना है। 19 से 20 अगस्त के बीच कटनी, टीकमगढ़, रायसेन, सीधी, सतना, शहडोल, जबलपुर, नरसिंहपुर, मंडला, पन्ना, दमोह, सागर और छतरपुर में भारी बारिश का अनुमान है। इसके बाद 20 से 21 अगस्त के बीच विदिशा, ग्वालियर, दतिया, भिंड, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भारी बारिश हो सकती है।
इन पूर्वानुमानों से साफ है कि बारिश का फोकस एक ही क्षेत्र तक सीमित नहीं रहने वाला। पूर्वी मध्यप्रदेश से लेकर बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र तक अलग-अलग दिनों में मौसम सक्रिय रहने की संभावना है। यानी अगले कुछ दिन प्रदेश के कई हिस्सों के लिए बारिश के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
पिछले 24 घंटे के आंकड़े भी मौसम की सक्रियता की तस्वीर दिखाते हैं। जबलपुर के सीहोरा में 120.2 मिलीमीटर, यानी करीब पांच इंच बारिश दर्ज की गई। इतनी कम अवधि में इतनी बारिश स्थानीय जलभराव और निचले इलाकों में परेशानी की स्थिति पैदा कर सकती है। सागर के पूर्वी हिस्से में भी बादल छाए हुए हैं और मौसम का असर बना हुआ है। लेकिन इस पूरे मौसम अपडेट की सबसे दिलचस्प बात यह है कि बारिश के बावजूद मध्यप्रदेश का मानसूनी आंकड़ा अभी सामान्य से नीचे है। 1 जून से 17 अगस्त तक प्रदेश में 22.38 इंच बारिश दर्ज हुई है, जो औसत से करीब 2.85 इंच कम है। इस अवधि में प्रदेश में बारिश सामान्य से 11 प्रतिशत कम रही है। क्षेत्रीय अंतर भी महत्वपूर्ण है। पूर्वी मध्यप्रदेश में बारिश की कमी करीब 15 प्रतिशत है, जबकि पश्चिमी हिस्से में यह कमी 7 प्रतिशत बताई गई है। इसका अर्थ है कि बारिश पूरे प्रदेश में एक समान नहीं हुई है। कुछ जिलों में तेज बारिश और भारी बारिश के दौर देखने को मिल रहे हैं, जबकि कुल मौसमी आंकड़ा अभी भी सामान्य से नीचे बना हुआ है।
यही मानसून की सबसे बड़ी चुनौती है—बारिश का वितरण। किसी इलाके में कुछ घंटों में बहुत ज्यादा पानी गिर सकता है, जबकि दूसरे इलाके में पर्याप्त बारिश का इंतजार बना रह सकता है। इसलिए केवल कुल बारिश के आंकड़े से किसानों या जलस्रोतों की स्थिति को पूरी तरह समझना मुश्किल है। बारिश कब, कहां और कितनी तीव्रता से हुई, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
आने वाले दिनों में किसानों के लिए भी मौसम काफी महत्वपूर्ण रहेगा। भारी बारिश वाले इलाकों में खेतों में पानी जमा होने, फसलों को नुकसान और कृषि कार्य प्रभावित होने की आशंका रहती है। वहीं जिन क्षेत्रों में बारिश की कमी बनी हुई है, वहां यह सक्रिय मानसून कुछ राहत दे सकता है। इसलिए एक ही मौसम प्रणाली अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग प्रभाव लेकर आ सकती है।
शहरी इलाकों में प्रशासन और नागरिकों के सामने जलभराव, सड़क यातायात और बिजली आपूर्ति जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। खास तौर पर तेज बारिश के दौरान निचले इलाकों, अंडरपास और खराब जल निकासी वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होगी। इस दौरान आकाशीय बिजली का खतरा भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। गरज-चमक के समय खुले मैदान, खेत, जलाशय या पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना जरूरी है। तेज हवा के दौरान कमजोर पेड़ों, बिजली के खंभों और अस्थायी संरचनाओं से दूरी बनाए रखना भी सुरक्षित विकल्प है।
कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में मानसून अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है। अगले पांच दिन मौसम की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। कुछ जिलों में भारी बारिश राहत लेकर आ सकती है तो कहीं यही बारिश परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए इस समय सबसे जरूरी है कि लोग स्थानीय मौसम चेतावनी को गंभीरता से लें और जिला प्रशासन की एडवाइजरी के अनुसार ही यात्रा या बाहरी गतिविधियों की योजना बनाएं।
मध्यप्रदेश में बारिश का यह दौर एक तरफ सूखे आंकड़ों में सुधार की उम्मीद जगा रहा है, तो दूसरी तरफ भारी बारिश वाले इलाकों में सतर्कता की जरूरत भी बढ़ा रहा है। 22.38 इंच बारिश, सामान्य से 11 प्रतिशत कमी और अगले पांच दिनों में कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट—यानी मानसून की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। अब नजर इस बात पर होगी कि आने वाले दिनों की बारिश प्रदेश की मौसमी कमी को कितना कम करती है और किन इलाकों में तेज बारिश राहत के बजाय चुनौती बनती है। मौसम बदल रहा है, बादल सक्रिय हैं और अगले कुछ दिन मध्यप्रदेश के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं।





