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सावन शुक्ल तृतीया से झूले पर विराजेंगे रामलला..जानें क्यों बदली 498 साल बाद रामलला की झूला परंपरा…

DigitalDesk by DigitalDesk
August 13, 2026
in उत्तर प्रदेश, धर्म, लखनऊ
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Ram Lalla
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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में इस बार सावन का झूलनोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि परंपरा में बदलाव का ऐतिहासिक अवसर बनने जा रहा है। करीब 498 साल बाद रामलला की झूला परंपरा में बदलाव किया जा रहा है। पहली बार रामलला सावन शुक्ल तृतीया से झूले पर विराजमान होंगे। अब तक झूलनोत्सव की शुरुआत नाग पंचमी से होने की परंपरा रही है।

नई व्यवस्था के तहत इस बार झूलनोत्सव को पहले से अधिक व्यवस्थित और भव्य तरीके से आयोजित करने की तैयारी है। रामलला के झूले को विशेष रूप से सजाया जाएगा और श्रद्धालुओं को इस अद्भुत धार्मिक आयोजन के दर्शन का अवसर मिलेगा।

1. पहली बार तृतीया से शुरू होगा झूलनोत्सव

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में इस बार झूलनोत्सव की शुरुआत 15 अगस्त की शाम 7 बजे से होगी। आयोजन लगातार 12 दिनों तक चलने की जानकारी दी गई है। इस दौरान रामलला को विशेष रूप से तैयार किए गए झूले पर विराजमान कराया जाएगा। मंदिर परिसर में इस अवसर के लिए विशेष सजावट और धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारी की जा रही है।

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए जाना जाता है, लेकिन अयोध्या में इसी अवधि में रामलला का झूलनोत्सव भी भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। इस बार तारीख और परंपरा में बदलाव के कारण आयोजन का महत्व और बढ़ गया है। करीब पांच शताब्दियों से चली आ रही परंपरा में बदलाव को लेकर श्रद्धालुओं में भी उत्सुकता है। अब भक्तों की निगाहें 15 अगस्त की शाम होने वाले पहले झूलनोत्सव पर टिकी हैं।

2. नाग पंचमी की जगह तृतीया से क्यों?

रामलला की झूला परंपरा में अब तक झूलनोत्सव की शुरुआत नाग पंचमी से होने की बात सामने आती रही है। इस बार धार्मिक परंपरा को नए क्रम में आयोजित किया जा रहा है और सावन शुक्ल तृतीया से ही रामलला को झूले पर विराजमान कराया जाएगा। धार्मिक आयोजनों में तिथि और अनुष्ठान का विशेष महत्व होता है। ऐसे में तृतीया से झूलनोत्सव की शुरुआत को लेकर श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह है। मंदिर प्रशासन और धार्मिक व्यवस्था से जुड़े लोगों की ओर से आयोजन को निर्धारित परंपराओं के अनुरूप संपन्न कराने की तैयारी की जा रही है। यह बदलाव केवल उत्सव की तारीख में परिवर्तन नहीं है, बल्कि रामलला की पूजा-पद्धति और धार्मिक आयोजनों को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में उठाया गया कदम भी माना जा रहा है।

3. पहली बार लाइव दर्शन की तैयारी

इस बार रामलला के झूलनोत्सव की एक और खास बात सामने आई है। आयोजन के लाइव प्रसारण की तैयारी की जा रही है। इसका मतलब यह होगा कि जो श्रद्धालु अयोध्या नहीं पहुंच पाएंगे, वे भी घर बैठे रामलला के झूलनोत्सव के दर्शन कर सकेंगे। राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है। देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा विदेशों से भी भक्त रामलला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में लाइव प्रसारण की व्यवस्था उन श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण होगी जो भीड़, दूरी या अन्य कारणों से अयोध्या नहीं आ पा रहे हैं। झूले पर विराजमान रामलला के दर्शन और विशेष पूजा-अर्चना को लाखों श्रद्धालुओं तक पहुंचाने की तैयारी इस आयोजन को और व्यापक बना सकती है।

4. सावन में बढ़ी रामनगरी की रौनक

सावन के दौरान अयोध्या में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 7 अगस्त को करीब 91 हजार, 8 अगस्त को लगभग 1.15 लाख और 9 अगस्त की शाम 7 बजे तक करीब 97 हजार श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किए। इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सावन में रामनगरी में भक्तों की आवाजाही कितनी बढ़ गई है। झूलनोत्सव शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में और इजाफा होने की संभावना है। प्रशासन और मंदिर व्यवस्था के सामने बड़ी संख्या में आने वाले भक्तों के लिए दर्शन, सुरक्षा और धार्मिक आयोजन को सुचारू बनाए रखने की चुनौती भी रहेगी। रामलला के दर्शन के साथ श्रद्धालु अयोध्या के दूसरे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी पहुंचते हैं। इससे पूरी रामनगरी में धार्मिक माहौल और अधिक उत्सवपूर्ण हो जाता है।

5. पूजा व्यवस्था को भी किया जा रहा व्यवस्थित

राम मंदिर में केवल झूलनोत्सव ही नहीं, बल्कि मंदिर की नियमित पूजा व्यवस्था को भी अधिक व्यवस्थित करने पर जोर दिया जा रहा है। धार्मिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आचार्य इंद्रदेव मिश्र को धार्मिक अनुष्ठानों का व्यवस्थापक बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। इस निरीक्षण के दौरान पुजारियों की संख्या, प्रतिदिन होने वाले पूजा-पाठ और धार्मिक परंपराओं के पालन की जानकारी ली गई। इसका उद्देश्य मंदिर परिसर में होने वाली पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों को निर्धारित परंपराओं के अनुसार सुचारू बनाए रखना है।

498 साल बाद नई शुरुआत

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का झूलनोत्सव इस बार कई मायनों में खास होने जा रहा है। करीब 498 साल पुरानी झूला परंपरा में बदलाव करते हुए पहली बार सावन शुक्ल तृतीया से रामलला झूले पर विराजेंगे। 15 अगस्त की शाम से शुरू होने वाला 12 दिवसीय यह उत्सव श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आनंद का अवसर होगा। विशेष रूप से सजाए गए झूले पर रामलला के दर्शन, धार्मिक अनुष्ठान और संभावित लाइव प्रसारण इस आयोजन को देश-दुनिया के भक्तों से जोड़ेंगे।

सावन में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ और अयोध्या में लगातार विकसित होती धार्मिक व्यवस्थाओं के बीच यह आयोजन रामनगरी की बदलती धार्मिक तस्वीर का भी संकेत देता है। एक ओर सदियों पुरानी आस्था और परंपरा है, तो दूसरी ओर उसे आधुनिक व्यवस्थाओं और व्यापक प्रसारण के जरिए देश-दुनिया तक पहुंचाने की तैयारी। यानी इस बार अयोध्या में झूला वही होगा, रामलला वही होंगे, आस्था वही होगी—लेकिन परंपरा का एक नया अध्याय जरूर लिखा जाएगा।

Tags: #After 498 years the Jhula tradition for Ram Lalla will change#Ram Lalla#Ram Lalla Temple 15 august 2026
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