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UPI का ग्लोबल मिशन…15-20 देशों में ऐसे होगा भारतीयों के सहारे डिजिटल पेमेंट का विस्तार…जापान-मलेशिया-बहरीन पर नजर

DigitalDesk by DigitalDesk
August 13, 2026
in स्पेशल
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UPI Global Mission
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भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम अब सिर्फ देश की सीमाओं तक सीमित रहने वाला नहीं है। जिस UPI ने भारत में कैश और कार्ड आधारित पेमेंट की तस्वीर बदल दी, अब उसी UPI को दुनिया के बड़े बाजारों तक पहुंचाने की रणनीति तैयार हो रही है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI की नजर खास तौर पर उन देशों पर है, जहां बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं और जहां से भारत को भारी मात्रा में रेमिटेंस मिलता है।

  • डायस्पोरा बनेगा UPI की ग्लोबल ताकत
  • जापान से बहरीन तक UPI की उड़ान
  • UPI बना भारत का डिजिटल मॉडल
  • AI से पेमेंट की अगली तैयारी
  • पेमेंट संप्रभुता की नई वैश्विक लड़ाई

NPCI के CEO दिलीप असबे के मुताबिक, संगठन अगले दशक में 15 से 20 विदेशी बाजारों तक पहुंच बनाने की संभावना पर काम कर रहा है। जापान, मलेशिया और बहरीन जैसे देशों के साथ बातचीत चल रही है। हालांकि अंतिम फैसला संबंधित देशों की सरकारों और केंद्रीय बैंकों के हाथ में होगा, क्योंकि सीमा पार डिजिटल पेमेंट सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि रेगुलेटरी और जियोपॉलिटिकल मुद्दा भी है।

  • डायस्पोरा बनेगा UPI की ग्लोबल ताकत
  • जापान से बहरीन तक UPI की उड़ान
  • UPI बना भारत का डिजिटल मॉडल
  • AI से पेमेंट की अगली तैयारी
  • पेमेंट संप्रभुता की नई वैश्विक लड़ाई

1. डायस्पोरा बनेगा UPI की ग्लोबल ताकत

UPI के अंतरराष्ट्रीय विस्तार की रणनीति में भारतीय डायस्पोरा सबसे बड़ा आधार बनने जा रहा है। भारत के करीब 3.5 करोड़ प्रवासी भारतीय दुनिया के अलग-अलग देशों में रहते हैं। विदेशों में बसे भारतीय हर साल भारत में अरबों डॉलर भेजते हैं। मार्च में खत्म हुए वित्त वर्ष में भारत को 155 अरब डॉलर से अधिक रेमिटेंस मिला, जो दुनिया में सबसे ज्यादा बताया गया है।

NPCI का मानना है कि जहां भारतीयों की बड़ी आबादी है, वहां UPI को अपनाने की संभावनाएं भी ज्यादा हैं। प्रवासी भारतीय अगर स्थानीय स्तर पर UPI आधारित भुगतान कर सकेंगे या भारत में मौजूद परिवारों और कारोबारियों को आसानी से पैसे भेज सकेंगे, तो इससे सीमा पार भुगतान की पूरी व्यवस्था में बदलाव आ सकता है।

दिलीप असबे का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारतीयों का विदेश जाना, यात्रा करना और अंतरराष्ट्रीय कारोबार बढ़ेगा। ऐसे में एक ऐसा पेमेंट नेटवर्क जरूरी होगा, जो भारतीय उपभोक्ताओं को विदेशों में भी उसी तरह का आसान डिजिटल अनुभव दे सके, जैसा उन्हें भारत में मिलता है।

2. जापान से बहरीन तक, UPI की नई उड़ान

NPCI अब सिर्फ उन देशों तक सीमित नहीं रहना चाहता, जहां UPI की शुरुआती मौजूदगी बन चुकी है। संगठन जापान, मलेशिया और बहरीन समेत कई देशों के साथ बातचीत कर रहा है।

रणनीति का मकसद सिर्फ भारतीयों को पेमेंट सुविधा देना नहीं है, बल्कि UPI को विदेशी पेमेंट सिस्टम से जोड़कर क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट का बड़ा नेटवर्क तैयार करना है।

असबे के मुताबिक, अगले 10 साल में 15 से 20 बाजारों तक पहुंच बनाना एक संभावित लक्ष्य हो सकता है। हालांकि यह विस्तार पूरी तरह संबंधित देशों की मंजूरी, स्थानीय नियमों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर निर्भर करेगा।

UPI की मौजूदगी पहले से ही कई देशों में है। सिंगापुर और नेपाल के साथ पर्सन-टू-पर्सन पेमेंट की सुविधा मौजूद है, जबकि ग्रीस से भारत में इनवर्ड रेमिटेंस की सुविधा भी शुरू की जा चुकी है। NPCI अब सिंगापुर, फ्रांस और UAE समेत करीब नौ देशों में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

3. UPI सिर्फ पेमेंट नहीं, भारत का डिजिटल मॉडल

UPI ने भारत में पेमेंट की परिभाषा ही बदल दी है। मोबाइल फोन के जरिए बैंक खातों के बीच तुरंत पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा ने रोजमर्रा की जिंदगी का डिजिटल भुगतान को हिस्सा बना दिया। Google Pay और PhonePe जैसे प्लेटफॉर्म UPI के जरिए बड़े पैमाने पर भुगतान की सुविधा देते हैं। भारत में इस नेटवर्क की सफलता ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के अनुसार, ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के लिहाज से UPI दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम है। यही वजह है कि NPCI अब UPI को सिर्फ भारतीय डिजिटल पेमेंट सिस्टम के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे मॉडल के रूप में पेश करना चाहता है जिसे दूसरे देश भी अपना सकें। नामीबिया, पेरू और त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे विकासशील देशों के साथ NPCI डिजिटल पेमेंट टेक्नोलॉजी को ‘पब्लिक गुड’ के रूप में साझा करने की दिशा में भी काम कर रहा है।

4. AI से पेमेंट तक, अगली तैयारी शुरू

UPI का अगला विस्तार सिर्फ भौगोलिक नहीं होगा। NPCI अब एजेंटिक AI के जरिए पेमेंट के नए रास्तों पर भी काम कर रहा है।

यानी भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्लेटफॉर्म यूजर की जरूरत को समझकर पेमेंट से जुड़ी गतिविधियों में मदद कर सकते हैं। NPCI की नजर ऐसे प्लेटफॉर्म पर है, जिनमें OpenAI का ChatGPT और Google का Gemini शामिल हैं।

अगर यह मॉडल सफल होता है तो डिजिटल पेमेंट का अगला चरण सिर्फ ‘क्लिक करके भुगतान’ तक सीमित नहीं रहेगा। AI आधारित सिस्टम यूजर की अनुमति और निर्धारित नियमों के तहत भुगतान प्रक्रिया को और ज्यादा स्वचालित बना सकते हैं।

यह भारत के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि UPI की ताकत सिर्फ उसके पेमेंट नेटवर्क में नहीं बल्कि उसके पीछे मौजूद डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में है।

5. पेमेंट संप्रभुता की नई वैश्विक लड़ाई

UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार ऐसे समय में हो रहा है, जब दुनिया के कई देश अपने पेमेंट सिस्टम पर ज्यादा नियंत्रण चाहते हैं। रूस को SWIFT सिस्टम से अलग किए जाने और उसके विदेशी मुद्रा भंडार के एक बड़े हिस्से के फ्रीज होने के बाद वैश्विक स्तर पर वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों की चर्चा तेज हुई।

भारत भी इसी बड़े बदलाव के बीच अपनी डिजिटल पेमेंट क्षमता को मजबूत कर रहा है। NPCI, जिसे RBI और भारतीय बैंकों ने मिलकर स्थापित किया है, देश के रिटेल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को संचालित करता है। UPI के अलावा NPCI RuPay कार्ड नेटवर्क भी चलाता है, जो अंतरराष्ट्रीय कार्ड नेटवर्क के मुकाबले भारत का घरेलू विकल्प है।

हालांकि UPI के घरेलू बिजनेस मॉडल में भी बड़ा बदलाव आने की संभावना है। हाल ही में लोकसभा ने ऐसा कानून मंजूर किया है, जिससे बैंक और दूसरे पेमेंट प्रोवाइडर UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने में सक्षम हो सकते हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि NPCI ने अभी तक किसी शुल्क पर फैसला नहीं किया है।

यानी UPI के सामने एक साथ दो मोर्चे हैं—भारत में अपने बिजनेस मॉडल को मजबूत करना और विदेशों में ग्लोबल पेमेंट नेटवर्क का विस्तार करना।

अगर NPCI अपनी रणनीति में सफल होता है तो आने वाले वर्षों में UPI सिर्फ भारत में डिजिटल भुगतान का पर्याय नहीं रहेगा। यह भारतीय डायस्पोरा, अंतरराष्ट्रीय यात्रा, कारोबार और रेमिटेंस को जोड़ने वाला एक ऐसा डिजिटल पुल बन सकता है, जिसकी पहुंच भारत से निकलकर एशिया, यूरोप और खाड़ी के बाजारों तक हो। सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या अगले 10 साल में UPI 15 से 20 देशों में भारतीयों की जेब का ग्लोबल पेमेंट साथी बन पाएगा?

Tags: #UPI Global Mission #Helping Indian Diaspora #Digital Payments in 15 to 20 Countries #Focus on Japan Malaysia and Bahrain
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