Sunday, August 2, 2026
  • Contact
India News
  • मुख्य समाचार
  • राजनीति
  • संपादक की पसंद
  • शहर और राज्य
    • उत्तर प्रदेश
      • आगरा
      • कानपुर
      • लखनऊ
      • मेरठ
    • छत्तीसगढ
      • जगदलपुर
      • बिलासपुर
      • भिलाई
      • रायपुर
    • दिल्ली
    • बिहार
      • पटना
    • मध्य प्रदेश
      • इंदौर
      • ग्वालियर
      • जबलपुर
      • भोपाल
    • महाराष्ट्र
      • नागपुर
      • नासिको
      • पुणे
      • मुंबई
    • राजस्थान
      • अजमेर
      • कोटा
      • जयपुर
      • जैसलमेर
      • जोधपुर
  • स्टार्टअप
  • कृषि
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • धर्म
  • ऑटो
  • सरकारी नौकरी
  • वीडियो
No Result
View All Result
India News
Home स्पेशल

Commonwealth Games 2026: भारत का सुनहरा मुक्का..आखिर कैसे कॉमनवेल्थ खेलों में मुक्केबाज़ी की नई महाशक्ति बना भारत?

DigitalDesk by DigitalDesk
August 2, 2026
in स्पेशल
0
India golden punch
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterWhatsapp

एक समय ऐसा भी था जब कॉमनवेल्थ खेलों में भारत खिलाड़ियों की सबसे बड़ी उम्मीद कुश्ती और वेटलिफ्टिंग के साथ ही साथ बैडमिंटन और शूटिंग से ही जुड़ी होती थीं। कॉमनवेल्थ खेलों में मुक्केबाज भी भारत के लिए पदक लाते थे, लेकिन उससे पूरे कॉमनवेल्थ खेल पर छा जाने की उम्मीदें बहुत कम ही की जाती थीं।

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का दबदबा

Related posts

true face of Sri Lanka a unique world of culture

श्रीलंका का असली चेहरा… गांवों में बसती संस्कृति, परंपरा और प्रकृति की अनोखी दुनिया

August 2, 2026
Abstaining from onion and garlic during Sawan

सावन में प्याज-लहसुन से दूरी क्यों? धार्मिक आस्था से लेकर स्वास्थ्य तक जुड़ी हैं कई मान्यताएं…

August 2, 2026

ग्लासगो 2026 ने यह तस्वीर बदल दी

भारतीय मुक्केबाज़ों ने केवल पदक नहीं जीते, बल्कि पूरे टूर्नामेंट पर अपनी छाप छोड़ दी। सात स्वर्ण पदकों के साथ भारत ने कॉमनवेल्थ खेलों में मुक्केबाज़ी का अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और इंग्लैंड व ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को पीछे छोड़ते हुए बॉक्सिंग तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया। लेकिन इस सफलता की सबसे बड़ी कहानी सिर्फ़ स्वर्ण पदकों की संख्या नहीं है। असल कहानी उन बेटियों की है जिन्होंने भारतीय मुक्केबाज़ी का चेहरा बदल दिया।

मैरी कॉम का सपना, जो अब एक आंदोलन बन चुका है

हर खेल में बदलाव की शुरुआत किसी एक खिलाड़ी से होती है। भारतीय मुक्केबाज़ी के लिए वह नाम है—मैरी कॉम।  मणिपुर के एक छोटे से गाँव से निकलकर छह बार विश्व चैंपियन बनने वाली मैरी कॉम ने यह विश्वास जगाया कि भारत की बेटियाँ भी दुनिया की सबसे कठिन खेल प्रतियोगिताओं में शीर्ष पर पहुँच सकती हैं। फिर लवलीना बोरगोहेन ने ओलंपिक पदक जीता, निकहत ज़रीन विश्व चैंपियन बनीं और अब एक पूरी नई पीढ़ी उसी राह पर आगे बढ़ रही है। आज भारतीय मुक्केबाज़ी किसी एक स्टार पर निर्भर नहीं है। अब देश के पास प्रतिभाओं की पूरी कतार है।

कौन हैं ये गोल्ड जीतने वाली बेटियाँ?

प्रीति पवार, जैस्मिन लांबोरिया, अरुंधति चौधरी, साक्षी चौधरी, लवलीना बोरगोहेन और निकहत ज़रीन—इनकी कहानियाँ अलग-अलग हैं, लेकिन संघर्ष लगभग एक जैसा है। इनमें से कई किसान परिवारों से आती हैं। किसी के पिता सेना में रहे, किसी के छोटे व्यापारी हैं, तो किसी ने सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखने का साहस किया। इनमें से कई ने पुराने पंचिंग बैग, साधारण प्रशिक्षण केंद्रों और सीमित सुविधाओं के बीच अभ्यास किया। कई लड़कियों को शुरुआत में यह भी सुनना पड़ा कि “बॉक्सिंग लड़कियों का खेल नहीं है। आज वही लड़कियाँ भारत के लिए स्वर्ण पदक जीत रही हैं और हजारों परिवारों की सोच बदल रही हैं।

अब सिर्फ़ हरियाणा की कहानी नहीं

एक समय था जब भारतीय मुक्केबाज़ी का मतलब लगभग हरियाणा माना जाता था। भिवानी बॉक्सिंग क्लब को “लिटिल क्यूबा” कहा जाने लगा था क्योंकि वहीं से विजेंदर सिंह सहित कई अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज़ निकले। लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है। अब चैंपियन हरियाणा के साथ-साथ असम, मणिपुर, तेलंगाना, राजस्थान, दिल्ली और देश के कई अन्य राज्यों से भी आ रहे हैं। यानी मुक्केबाज़ी अब किसी एक राज्य की पहचान नहीं रही, बल्कि पूरे भारत का खेल बनती जा रही है।

आखिर बदला क्या?

यह सफलता किसी एक फैसले का परिणाम नहीं है। इसके पीछे कई वर्षों की मेहनत और योजनाबद्ध बदलाव हैं। सबसे पहले, देश में जूनियर और सब-जूनियर स्तर की प्रतियोगिताएँ बढ़ी हैं। खिलाड़ियों को कम उम्र से ही बड़े मुकाबलों का अनुभव मिलने लगा है। दूसरा, खेल विज्ञान ने बड़ा अंतर पैदा किया है। आज खिलाड़ी सिर्फ़ अभ्यास ही नहीं करते, बल्कि पोषण विशेषज्ञ, फिजियोथेरेपिस्ट, खेल मनोवैज्ञानिक और वीडियो विश्लेषकों की मदद भी लेते हैं।

तीसरा, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) जैसी योजनाओं ने खिलाड़ियों को आर्थिक और तकनीकी सहायता दी है, जिससे उनका पूरा ध्यान प्रशिक्षण पर रह सके। चौथा, भारतीय टीम में जगह बनाना पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है। देश के भीतर प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ गई है कि राष्ट्रीय टीम में चयन ही किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं। यही प्रतिस्पर्धा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को और मजबूत बना रही है।

बेटियों ने बदली समाज की सोच

शायद सबसे बड़ा बदलाव खेल के मैदान में नहीं, बल्कि घरों के भीतर आया है। कुछ दशक पहले तक माता-पिता अपनी बेटियों को बॉक्सिंग में भेजने से डरते थे। चोट लगने का डर था और समाज की सोच भी रास्ते में खड़ी रहती थी। लेकिन जब उन्हीं बेटियों ने विश्व और ओलंपिक स्तर पर भारत का नाम रोशन किया, तो तस्वीर बदलने लगी। आज कई परिवार अपनी बेटियों को आत्मविश्वास, अनुशासन और बेहतर भविष्य के लिए मुक्केबाज़ी की ओर भेज रहे हैं। एक पीढ़ी की सफलता ने अगली पीढ़ी के लिए रास्ता आसान कर दिया है।

मुक्केबाज़ी सिर्फ़ खेल नहीं, उम्मीद भी है

मुक्केबाज़ी उन खेलों में से है जहाँ सफलता केवल महंगे उपकरणों पर निर्भर नहीं करती। मेहनत, अनुशासन, अच्छा कोच और अवसर—यही सबसे बड़ी पूँजी हैं। इसीलिए देश के छोटे शहरों और साधारण परिवारों के युवाओं के लिए यह खेल सामाजिक बदलाव का माध्यम बन गया है। कई खिलाड़ियों के लिए बॉक्सिंग केवल पदक जीतने का रास्ता नहीं है।

यह सम्मान है। यह आत्मनिर्भरता है। यह परिवार की ज़िंदगी बदलने का अवसर है।

आगे की चुनौती

कॉमनवेल्थ खेलों की सफलता महत्वपूर्ण है, लेकिन अंतिम लक्ष्य नहीं। भारत की असली परीक्षा विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक में होगी। अगर जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को इसी तरह अवसर मिलते रहे, खेल विज्ञान का उपयोग बढ़ता रहा और महिला खिलाड़ियों को लगातार समर्थन मिलता रहा, तो ग्लासगो 2026 को भारतीय मुक्केबाज़ी की मंज़िल नहीं, बल्कि एक नए स्वर्णिम युग की शुरुआत के रूप में याद किया जाएगा। आज इतना तो तय है कि भारतीय मुक्केबाज़ अब रिंग में सिर्फ़ हिस्सा लेने नहीं उतरते।

Tags: #boxing at CWG#India golden punch#India Golden Punch #India at the Commonwealth Games #India New Boxing Power house #India Athletes at the Commonwealth Games
LIVE India News

लाइव इंडिया न्यूज 2016 से आप तक खबरें पंहुचा रहा है। लाइव इंडिया वेबसाइट का मकसद ब्रेकिंग, नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, बिजनेस और अर्थतंत्र से जुड़े हर अपडेट्स सही समय पर देना है। देश के हिंदी भाषी राज्यों से रोजमर्रा की खबरों से लेकर राजनीति नेशनल व इंटरनेशनल मुद्दों से जुडी खबरें और उनके पीछे छुपे सवालों को बेधड़क सामने लाना, देश-विदेश के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों का विश्लेषण बेबाकी से करना हमारा मकसद है।

Vihan Limelite Event & Entertainment Pvt Ltd
Regd Office Flat No 1
Mig 3 E 6
Arera Colony Bhopal

Branch Office
Main Road. Tikraparaa
Raipur CG

Director Deepti Chaurasia
Mobile No 7725016291

Email id - liveindianewsandviews@gmail.com

Currently Playing

चार महीने में बदले सियासी तेवर: मोदी सरकार पर शायरी से वार करने वाली सायोनी घोष अब बनेंगी सरकार की आवाज़

Saayoni Ghosh

चार महीने में बदले सियासी तेवर: मोदी सरकार पर शायरी से वार करने वाली सायोनी घोष अब बनेंगी सरकार की आवाज़

मुख्य समाचार
Drone Technology: चीन में हर काम कर रहे हैं ड्रोन! देखकर रह जाएंगे हैरान

Drone Technology: चीन में हर काम कर रहे हैं ड्रोन! देखकर रह जाएंगे हैरान

मुख्य समाचार
क्यों लगातार फेल हो रही टीम इंडिया? मोहम्मद कैफ ने टीम मैनेजमेंट के फैसलों पर उठाए बड़े सवाल

क्यों लगातार फेल हो रही टीम इंडिया? मोहम्मद कैफ ने टीम मैनेजमेंट के फैसलों पर उठाए बड़े सवाल

मुख्य समाचार

RSS Unknown Feed

  • Contact

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

No Result
View All Result
  • Home
  • मुख्य समाचार
  • शहर और राज्य
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • संपादक की पसंद
  • मनोरंजन
  • स्टार्टअप
  • धर्म
  • कृषि

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

Go to mobile version