उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की जांच में सामने आया कि जिन मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस पहले ही रद्द किए जा चुके थे, उन्हीं के लाइसेंस नंबर का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये की दवाओं की खरीद-फरोख्त की जा रही थी। शुरुआती जांच में इस नेटवर्क के तार लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज और आगरा तक जुड़े मिले हैं। अधिकारियों को आशंका है कि यह संगठित गिरोह कई राज्यों में सक्रिय हो सकता है।
रद्द किए गए लाइसेंस नंबर से जारी रही दवाओं की सप्लाई
जांच में पता चला कि कुछ दवा कारोबारी बंद या रद्द लाइसेंस वाले मेडिकल स्टोरों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बिलिंग कर रहे थे। इसके बदले संबंधित लोगों को 2 से 8 प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता था। लखनऊ के एक मामले में रद्द लाइसेंस के बावजूद उसी नंबर से लगातार दवाओं की सप्लाई होने के सबूत मिले हैं।
फर्जी बैच नंबर से मरीजों की सेहत पर मंडराया खतरा
एफएसडीए की जांच में ब्लड प्रेशर की दवाओं के कुछ फर्जी बैच नंबर भी सामने आए हैं। आशंका जताई जा रही है कि इन नंबरों का इस्तेमाल नकली दवाओं की पैकेजिंग में किया गया। यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है, तो बड़ी संख्या में मरीजों तक नकली दवाएं पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
मेरठ, बागपत और दूसरे राज्यों तक पहुंची जांच
जांच एजेंसियों ने मेरठ और बागपत में छापेमारी के दौरान दवा पैकेजिंग से जुड़ी मशीनें और संदिग्ध सामग्री बरामद की है। वहीं उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से आने वाली दवाओं की सप्लाई चेन भी जांच के दायरे में है। अधिकारियों का मानना है कि अलग-अलग स्थानों पर पैकिंग कर दवाओं को ब्रांडेड उत्पाद बताकर बाजार में बेचा जा रहा था।
पूरे सिंडिकेट की जांच तेज, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
एफएसडीए अब दवा लाइसेंस, जीएसटी रिकॉर्ड और सप्लाई नेटवर्क की गहन जांच कर रहा है। विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ दवा एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम समेत अन्य संबंधित कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दवा वितरण और लाइसेंस सत्यापन व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।





