ल्हासा। दक्षिण-पश्चिम चीन के शीत्सांग (तिब्बत) स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा में रविवार रात तीसरे शीत्सांग कला एवं संस्कृति महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। “एकजुट दिल, एक सपना: कला से नया शीत्सांग” विषय पर आयोजित यह महोत्सव 26 जुलाई से 22 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान थिएटर प्रस्तुतियों, लोक कला, नृत्य प्रतियोगिताओं, प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से शीत्सांग की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया जाएगा।
‘एकजुट दिल, एक सपना’ थीम के साथ शुरू महोत्सव पहली बार तिब्बती और क्वांगतोंग ओपेरा का संयुक्त मंचन बना आकर्षण
ऐतिहासिक संयुक्त मंचन ने बटोरी सुर्खियां
महोत्सव के उद्घाटन समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण तिब्बती ओपेरा और क्वांगतोंग ओपेरा का संयुक्त मंचन रहा। “शीत्सांग में तैनात: श्री चांग” शीर्षक से प्रस्तुत इस विशेष नाट्य प्रस्तुति ने इतिहास रच दिया। मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्राप्त इन दोनों पारंपरिक कला रूपों का यह पहला संयुक्त प्रदर्शन था। इस प्रस्तुति को देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, कलाकारों और पर्यटकों की भीड़ उमड़ी। पारंपरिक संगीत, रंग-बिरंगी वेशभूषा और सांस्कृतिक समन्वय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर
आयोजकों के अनुसार, शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में पांच-स्तरीय सार्वजनिक सांस्कृतिक सेवा प्रणाली विकसित की है। इसके तहत गांव से लेकर शहर तक नियमित रूप से जनहित से जुड़ी सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इसका उद्देश्य पारंपरिक कला और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और स्थानीय कलाकारों को मंच उपलब्ध कराना है। महोत्सव के जरिए जातीय एकता, पारिस्थितिक संरक्षण, ग्रामीण पुनरोद्धार और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास जैसे विषयों पर आधारित कलात्मक अभिव्यक्तियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
पहली बार स्ट्रीट डांस को भी मिली जगह
इस वर्ष महोत्सव में कई नई पहलें देखने को मिल रही हैं। पहली बार पुरस्कार चयन प्रक्रिया में सार्वजनिक निर्णायकों को शामिल किया गया है, जिससे प्रतियोगिताओं में पारदर्शिता और जनभागीदारी बढ़ेगी। इसके अलावा, लोक नृत्य प्रतियोगिता, वरिष्ठ नागरिक नृत्य प्रतियोगिता और पेशेवर सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के साथ पहली बार स्ट्रीट डांस को भी शामिल किया गया है। आयोजकों का मानना है कि इससे पारंपरिक और आधुनिक कला के बीच बेहतर संतुलन स्थापित होगा और युवाओं की भागीदारी भी बढ़ेगी।
निःशुल्क होंगे सभी आयोजन
26 जुलाई से 22 अगस्त तक चलने वाले इस महोत्सव में आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रम और प्रदर्शनियां आम जनता के लिए निःशुल्क रखी गई हैं। दर्शक ऑनलाइन आरक्षण और लक्षित टिकट वितरण प्रणाली के माध्यम से प्रवेश टिकट प्राप्त कर सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को सांस्कृतिक आयोजनों से जोड़ना और कला के प्रति रुचि को बढ़ावा देना है।
कला के जरिए विकास की तस्वीर
आने वाले दिनों में महोत्सव के दौरान रंगमंच, संगीत, नृत्य, चित्रकला और सांस्कृतिक प्रदर्शनियों के माध्यम से शीत्सांग की पारिस्थितिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और विकास यात्रा को प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि यह महोत्सव केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच संवाद, सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का मंच भी है। इससे शीत्सांग की कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है। कला, संस्कृति और परंपरा के इस संगम के साथ ल्हासा एक बार फिर सांस्कृतिक उत्सव का केंद्र बन गया है, जहां विरासत और आधुनिकता का अनूठा मेल देखने को मिल रहा है।
(साभार: चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)





