लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली युवाओं के लिए प्रशासनिक सेवाओं का रास्ता आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित ‘निःशुल्क आईएएस-पीसीएस आवासीय कोचिंग योजना’ के तहत इस वर्ष प्रदेश के 865 मेधावी छात्र-छात्राओं को पूरी तरह नि:शुल्क आवासीय कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी। योजना के अंतर्गत चयनित अभ्यर्थियों को न केवल उच्चस्तरीय कोचिंग मिलेगी, बल्कि हॉस्टल, भोजन, पुस्तकें, अध्ययन सामग्री और अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन भी सरकार की ओर से मुफ्त दिया जाएगा।
योगी सरकार की बड़ी पहल
10 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी देंगे प्रवेश परीक्षा
1 अगस्त से शुरू होंगी कक्षाएं
सरकार का मानना है कि प्रतिभा किसी आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती। कई होनहार छात्र केवल संसाधनों के अभाव में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी नहीं कर पाते। इसी चुनौती को दूर करने के उद्देश्य से यह महत्वाकांक्षी योजना शुरू की गई है, ताकि गरीब और वंचित वर्ग के युवाओं को भी समान अवसर मिल सके।
योजना के तहत प्रवेश के लिए 5 जुलाई 2026 को प्रदेश के सभी मंडलों में प्रवेश परीक्षा आयोजित की। इस परीक्षा में कुल 10,175 अभ्यर्थी भाग लिया। परीक्षा के बाद मेरिट के आधार पर चयन होगा और पारदर्शी काउंसलिंग प्रक्रिया के जरिए अंतिम सूची तैयार की जाएगी। चयनित अभ्यर्थियों की नियमित कक्षाएं 1 अगस्त 2026 से शुरू होंगी, जो 31 मई 2027 तक संचालित की जाएंगी। इस दौरान छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की संपूर्ण तैयारी कराई जाएगी।
प्रदेश में सात आधुनिक आवासीय कोचिंग सेंटर
योजना के तहत उत्तर प्रदेश में स्थापित सात अत्याधुनिक आवासीय कोचिंग केंद्रों में कुल 865 सीटें उपलब्ध हैं। इन केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है ताकि विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन वातावरण मिल सके।
सरकार ने इस योजना में एक विशेष प्रावधान भी किया है। कुल सीटों में 25 प्रतिशत सीटें उन अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रखी गई हैं, जिन्होंने पहले ही UPSC या UPPSC की प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary Exam) उत्तीर्ण कर ली है। ऐसे अभ्यर्थियों को लेटरल एंट्री के माध्यम से सीधे उच्च स्तरीय तैयारी का अवसर मिलेगा।
रहना, खाना, किताबें और पढ़ाई सब मुफ्त
योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि चयनित विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। सरकार की ओर से उन्हें पूरी तरह नि:शुल्क आवासीय सुविधा दी जाएगी। छात्रों के रहने के लिए हॉस्टल, पौष्टिक भोजन, प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पुस्तकें, स्टडी मटेरियल, लाइब्रेरी और अनुभवी फैकल्टी द्वारा नियमित मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
आज के समय में प्रतिष्ठित निजी कोचिंग संस्थानों में आईएएस और पीसीएस की तैयारी पर लाखों रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में गरीब परिवारों के लिए यह सुविधा किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।
सामाजिक न्याय के साथ अवसरों की समानता
सरकार का कहना है कि यह योजना केवल कोचिंग उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और अवसरों की समानता सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल है। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं में प्रतिनिधित्व बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उद्देश्य है कि आर्थिक अभाव किसी भी प्रतिभाशाली छात्र के सपनों में बाधा न बने। सरकार चाहती है कि प्रदेश के हर वर्ग के योग्य युवा प्रशासनिक सेवाओं में पहुंचकर समाज और शासन व्यवस्था में सकारात्मक योगदान दें।
गरीब छात्रों के लिए बनेगी नई उम्मीद
समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस योजना से हजारों युवाओं में नया आत्मविश्वास पैदा होगा। गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलने से वे निजी कोचिंग संस्थानों पर निर्भर नहीं रहेंगे। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी समान प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलेगा।
विभाग के अनुसार, आने वाले वर्षों में इस योजना के माध्यम से बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी प्रशासनिक सेवाओं में चयनित हो सकते हैं, जो अब तक आर्थिक कारणों से पीछे रह जाते थे।
बदलेगी प्रतियोगी परीक्षाओं की तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो उत्तर प्रदेश से प्रशासनिक सेवाओं में चयनित होने वाले गरीब और पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ सकती है। इससे न केवल युवाओं का भविष्य बदलेगा, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में सामाजिक समावेशन भी मजबूत होगा।
सरकार की यह पहल शिक्षा, समान अवसर और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाली योजनाओं में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आर्थिक तंगी के कारण आईएएस और पीसीएस बनने का सपना छोड़ चुके हजारों युवाओं के लिए यह योजना नई उम्मीद लेकर आई है। अब प्रतिभा और मेहनत के दम पर आर्थिक रूप से कमजोर छात्र भी प्रशासनिक सेवाओं तक अपनी मजबूत पहुंच बना सकेंगे।





