EXCLUSIVE NEWS: हिमाचल में तंबाकू सेवन का बदला ट्रेंड: पुरुषों में कमी, महिलाओं में बढ़ी लत ने बढ़ाई स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता
हेडर
NFHS-6 सर्वे ने खोली नई तस्वीर; महिलाओं में बढ़ता तंबाकू सेवन बना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा। विशेषज्ञ बोले—अब सिर्फ पुरुषों नहीं, महिलाओं और युवतियों को भी केंद्र में रखकर चलाने होंगे जागरूकता अभियान।
हिमाचल प्रदेश में तंबाकू सेवन को लेकर सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर
हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी एक नई और गंभीर चिंता सामने आई है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) के ताजा आंकड़ों ने तंबाकू सेवन के बदलते स्वरूप को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, जहां राज्य में पुरुषों के बीच तंबाकू सेवन में गिरावट दर्ज की गई है, वहीं महिलाओं में तंबाकू का सेवन बढ़ना स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी नई चुनौती का संकेत है। यदि समय रहते इस प्रवृत्ति पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले वर्षों में महिलाओं में कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारियां और गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं के मामले बढ़ सकते हैं।
पुरुषों में जागरूकता का असर, महिलाओं पर नहीं दिखा वैसा प्रभाव
पिछले कुछ वर्षों में सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए गए तंबाकू विरोधी अभियानों का असर पुरुषों के बीच देखने को मिला है। सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंध, चेतावनी संदेश, स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम तथा स्वास्थ्य अभियानों के कारण पुरुषों में तंबाकू सेवन में कमी दर्ज की गई है।
लेकिन महिलाओं के मामले में तस्वीर अलग दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को केंद्र में रखकर विशेष अभियान नहीं चलाए गए, जिसके कारण यह वर्ग जागरूकता कार्यक्रमों से अपेक्षाकृत दूर रहा। सामाजिक झिझक और घरेलू स्तर पर होने वाले तंबाकू सेवन की वजह से यह समस्या लंबे समय तक छिपी भी रहती है।
आसान उपलब्धता और कम कीमत बन रही बड़ी वजह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में तंबाकू उत्पादों की आसान उपलब्धता और अपेक्षाकृत कम कीमत इसके बढ़ते उपयोग की प्रमुख वजहों में शामिल हैं।
इसके अलावा प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक रूप से घरों में शराब बनाने की संस्कृति भी अप्रत्यक्ष रूप से तंबाकू सेवन को बढ़ावा देने वाला कारक मानी जा रही है। कई सामाजिक अवसरों और पारिवारिक आयोजनों में तंबाकू का उपयोग सामान्य व्यवहार का हिस्सा बन जाता है, जिससे महिलाओं में भी इसकी स्वीकार्यता बढ़ती जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी सामाजिक व्यवहार को सामान्य मान लिया जाता है, तो उसके स्वास्थ्य जोखिमों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
महिलाओं के लिए अलग रणनीति बनाने की जरूरत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अब तंबाकू विरोधी अभियान केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रह सकते। महिलाओं, किशोरियों और ग्रामीण समुदायों को ध्यान में रखकर अलग रणनीति तैयार करनी होगी।
इसके लिए सुझाव दिए गए हैं—
- महिलाओं के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
- आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाई जाए।
- स्कूल-कॉलेजों में किशोरियों को तंबाकू के दुष्प्रभावों की जानकारी दी जाए।
- महिलाओं के लिए तंबाकू छोड़ने की परामर्श सेवाओं को मजबूत किया जाए।
- सामुदायिक संगठनों और स्वयं सहायता समूहों को अभियान से जोड़ा जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं को केंद्र में रखे बिना तंबाकू नियंत्रण की कोई भी रणनीति अधूरी रहेगी।
‘अब लड़ाई सभी के लिए’—विशेषज्ञों का संदेश
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि तंबाकू के खिलाफ लड़ाई अब केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। बदलते सामाजिक व्यवहार और महिलाओं में बढ़ते सेवन को देखते हुए पूरे समाज को इस अभियान का हिस्सा बनाना होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सरकार, स्वास्थ्य विभाग, शैक्षणिक संस्थान और सामाजिक संगठन मिलकर महिलाओं और युवाओं को लक्षित करते हुए प्रभावी अभियान चलाते हैं, तो इस बढ़ती चुनौती पर समय रहते नियंत्रण पाया जा सकता है।
निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश में NFHS-6 के आंकड़े केवल एक स्वास्थ्य रिपोर्ट नहीं, बल्कि बदलती सामाजिक प्रवृत्तियों का संकेत भी हैं। पुरुषों में तंबाकू सेवन घटने की सकारात्मक तस्वीर के साथ महिलाओं में बढ़ती लत एक नई चुनौती बनकर उभरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है कि तंबाकू नियंत्रण की नीति को अधिक समावेशी बनाया जाए, ताकि हर वर्ग तक जागरूकता पहुंचे और आने वाली पीढ़ियों को तंबाकू के दुष्प्रभावों से बचाया जा सके।





