दुनिया के तीसरे सबसे बड़े ऑटो बाजार में टेस्ला की रफ्तार सुस्त, 10 महीनों में सिर्फ 460 कारों की बिक्री; BYD, BMW और मर्सिडीज ने छोड़ा पीछे।
भारत में फीका पड़ा टेस्ला का क्रेज
जब एलन मस्क की इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला ने भारत में दस्तक दी थी, तब उम्मीद की जा रही थी कि देश के लग्जरी इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में बड़ा बदलाव आएगा। माना जा रहा था कि प्रीमियम ग्राहकों के बीच टेस्ला की जबरदस्त मांग होगी, लेकिन शुरुआती उत्साह जल्द ही ठंडा पड़ गया। बिक्री के आंकड़े बताते हैं भारत में एलन मस्क की टेस्ला कार को उस तरह से सफलता नहीं मिल रही है जैसे कंपनी को भारत के बाहर दूसरे देशों में मिल रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से संचालित VAHAN पोर्टल पर गौर करें तो 2025 के सितंबर से 2026 के जून माह तक एलन मस्क की सिर्फ 460 ही टेस्ला कार बिक सकी हैं। इस तरह यानी एलन मस्क की कंपनी भारत में हर महीने औसतन केवल 46 कार को ही बेच पा रही है।
70 लाख तक की कीमत बनी सबसे बड़ी चुनौती
भारत में टेस्ला ने शुरुआत मॉडल Y के दो वेरिएंट के साथ की थी। इनकी शुरुआती कीमत करीब 57.18 लाख रुपये है, जबकि टॉप वेरिएंट और नया 6-सीटर Model YL करीब 69.50 लाख रुपये तक पहुंचता है।
यही ऊंची कीमत कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। भारतीय बाजार में जहां ग्राहक कीमत और वैल्यू दोनों को महत्व देते हैं, वहीं टेस्ला की कारें कई प्रतिस्पर्धियों की तुलना में काफी महंगी साबित हो रही हैं।
शुरुआत के बाद लगातार गिरती गई बिक्री
टेस्ला की सबसे अच्छी बिक्री लॉन्च के शुरुआती महीनों में देखने को मिली। सितंबर और दिसंबर 2025 में कंपनी ने 69-69 कारें बेचीं।
इसके बाद बिक्री लगातार घटती चली गई—
- मार्च 2026 – 53 कारें
- अप्रैल – 43 कारें
- मई – 36 कारें
- जून – सिर्फ 35 कारें
यानी शुरुआती उत्साह के बाद ग्राहकों की दिलचस्पी लगातार कम होती दिखाई दे रही है।
दूसरे देशों के मुकाबले भारत सबसे कमजोर बाजार
पिछले दो वर्षों में टेस्ला ने कई नए देशों में प्रवेश किया, लेकिन भारत का प्रदर्शन सबसे कमजोर माना जा रहा है।
- कोलंबिया में लॉन्च के पहले ही महीने करीब 1,800 कारें बिक गईं।
- मलेशिया में कंपनी औसतन 600 कारें प्रति माह बेच रही है।
- चिली में भी 2025 के दौरान लगभग 820 कारों की बिक्री हुई।
इसके विपरीत भारत जैसे विशाल ऑटोमोबाइल बाजार में टेस्ला की मासिक बिक्री 50 यूनिट तक भी नहीं पहुंच सकी।
BYD और BMW ने टेस्ला को पीछे छोड़ा
भारत के प्रीमियम इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में टेस्ला को सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि मजबूत प्रतिस्पर्धा का भी सामना करना पड़ रहा है।
VAHAN के आंकड़ों के अनुसार—
- BYD ने 2026 के पहले छह महीनों में 3,168 EV बेचीं, यानी औसतन 528 गाड़ियां प्रति माह।
- BMW ने इसी अवधि में 2,339 इलेक्ट्रिक कारें बेचीं, यानी करीब 390 प्रति माह।
- मर्सिडीज-बेंज ने लगभग 400 EV की बिक्री दर्ज की, यानी औसतन 66 कारें प्रति माह।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि लग्जरी EV सेगमेंट में BMW और BYD जैसी कंपनियां टेस्ला से कहीं आगे निकल चुकी हैं।
क्यों नहीं मिल रहे खरीदार?
ऑटो विशेषज्ञों के अनुसार टेस्ला की कमजोर बिक्री के पीछे कई बड़े कारण हैं—
- चीन से आयात होने के कारण कारों पर भारी आयात शुल्क लगता है।
- भारत में स्थानीय असेंबली प्लांट नहीं होने से कीमत काफी बढ़ जाती है।
- BMW और मर्सिडीज जैसी कंपनियां भारत में ही अपनी कारें असेंबल करती हैं, जिससे उनकी कीमत अपेक्षाकृत कम रहती है।
- भारतीय ग्राहक प्रीमियम सेगमेंट में भी बेहतर सर्विस नेटवर्क और कीमत को प्राथमिकता देते हैं।
- टेस्ला का सर्विस और चार्जिंग नेटवर्क अभी सीमित है।
क्या भारत में बदल पाएगी टेस्ला की किस्मत?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार है और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बाजार की संभावनाएं काफी बड़ी हैं, लेकिन केवल ब्रांड वैल्यू के भरोसे सफलता मिलना आसान नहीं है।
यदि टेस्ला भविष्य में भारत में स्थानीय उत्पादन या असेंबली शुरू करती है और कीमतों में कमी लाने में सफल होती है, तो उसकी स्थिति बदल सकती है। फिलहाल, महंगी कीमत, सीमित नेटवर्क और कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण एलन मस्क की कंपनी भारतीय बाजार में अपेक्षित रफ्तार हासिल नहीं कर पाई है।भारत में टेस्ला की एंट्री जितनी चर्चित रही, बिक्री उतनी ही निराशाजनक साबित हुई। करीब 60 से 70 लाख रुपये की कीमत वाली कारें भारतीय ग्राहकों को आकर्षित नहीं कर सकीं और कंपनी 10 महीनों में केवल 460 वाहन ही बेच पाई। ऐसे में भारतीय बाजार में मजबूत पकड़ बनाने के लिए टेस्ला को कीमत, स्थानीय उत्पादन और सर्विस नेटवर्क—तीनों मोर्चों पर बड़ी रणनीतिक बदलाव की जरूरत होगी।





