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भड्डली नवमी 2026: बिना मुहूर्त होंगे विवाह और शुभ कार्य, जानिए क्यों कहलाती है साल का सबसे बड़ा ‘अबूझ मुहूर्त’ 

DigitalDesk by DigitalDesk
July 2, 2026
in स्पेशल
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Bhadli Navami 2026 Weddings and auspicious ceremonies to take place without the need for a specific auspicious time
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  • 22 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी भड्डली नवमी, गुप्त नवरात्रि का होगा समापन
  • विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और सगाई के लिए नहीं देखना पड़ेगा पंचांग
  • भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और आदिशक्ति की पूजा से मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद
  • चातुर्मास शुरू होने से पहले आखिरी बड़ा शुभ अवसर, इसलिए बढ़ जाता है धार्मिक महत्व
  • विष्णु सहस्त्रनाम, शिव-पार्वती पूजा और कामदेव आराधना से दांपत्य जीवन में आती है मधुरता

भड्डली नवमी 2026: साल का वह दिन जब बिना मुहूर्त के होंगे सभी शुभ कार्य

“अगर आपके घर में शादी, गृह प्रवेश, मुंडन या कोई बड़ा शुभ काम होने वाला है तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। 22 जुलाई 2026 को पड़ रही है भड्डली नवमी… एक ऐसा दिन जिसे सनातन परंपरा में अबूझ मुहूर्त माना गया है। यानी बिना पंचांग देखे और बिना अलग मुहूर्त निकाले किए जा सकते हैं सभी मांगलिक कार्य। आखिर क्यों इतना खास है यह दिन, किसकी पूजा करनी चाहिए और क्या है इसका धार्मिक महत्व… देखिए हमारी यह एक्सक्लूसिव रिपोर्ट।”

सनातन धर्म में हर मांगलिक कार्य के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। विवाह हो, गृह प्रवेश हो, सगाई, मुंडन या तिलक—अधिकांश लोग पंचांग देखकर ही शुभ समय का चयन करते हैं। लेकिन वर्ष में कुछ विशेष तिथियां ऐसी होती हैं जिन्हें “अबूझ मुहूर्त” कहा जाता है। इन दिनों किसी भी प्रकार का शुभ कार्य बिना पंचांग देखे किया जा सकता है।

ऐसी ही एक अत्यंत पवित्र तिथि है भड्डली नवमी, जिसे भड़ली नवमी, भड़रिया नवमी और कंदर्प नवमी के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 22 जुलाई, बुधवार को मनाया जाएगा। यह दिन इसलिए भी खास है क्योंकि इसी दिन गुप्त नवरात्रि का समापन होता है और इसके बाद चातुर्मास की शुरुआत होने से चार महीनों तक विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है।


22 जुलाई 2026 को मनेगी भड्डली नवमी

पंचांग के अनुसार—

  • नवमी तिथि प्रारंभ: 22 जुलाई 2026, प्रातः 5:16 बजे
  • नवमी तिथि समाप्त: 23 जुलाई 2026, प्रातः 7:03 बजे

उदयातिथि के आधार पर 22 जुलाई 2026 को भड्डली नवमी का पर्व मनाया जाएगा।


क्या होती है भड्डली नवमी?

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी को भड्डली नवमी कहा जाता है। यह गुप्त नवरात्रि का अंतिम दिन होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन देवताओं का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है और इस दिन किया गया हर शुभ कार्य सफल माना जाता है।

यही कारण है कि इस तिथि को पूरे देश के अनेक हिस्सों में अबूझ सावा या अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है।


क्यों कहलाता है अबूझ मुहूर्त?

हिंदू धर्म में शुभ कार्यों के लिए ग्रह-नक्षत्र और मुहूर्त का विशेष महत्व है। लेकिन भड्डली नवमी उन चुनिंदा तिथियों में शामिल है जहां अलग से शुभ मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं होती।

मान्यता है कि इस दिन स्वयं देवताओं की कृपा रहती है, इसलिए—

  • विवाह
  • सगाई
  • तिलक
  • गृह प्रवेश
  • मुंडन
  • नया व्यवसाय
  • दुकान या प्रतिष्ठान का शुभारंभ
  • वाहन खरीदना
  • भूमि पूजन
  • मकान निर्माण शुरू करना

जैसे सभी शुभ कार्य बिना किसी ज्योतिषीय गणना के किए जा सकते हैं।


चातुर्मास से पहले आखिरी शुभ अवसर

भड्डली नवमी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसके बाद देवशयनी एकादशी के साथ भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास आरंभ हो जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार—

  • चार महीने तक विवाह नहीं होते।
  • नए मांगलिक कार्य टाल दिए जाते हैं।
  • केवल पूजा, तप, दान और व्रत का महत्व बढ़ जाता है।

इस कारण भड्डली नवमी विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए अंतिम बड़े अवसर के रूप में देखी जाती है।


भड्डली नवमी पर किसकी पूजा होती है?

इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान बताया गया है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार—

  • भगवान विष्णु की पूजा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
  • माता लक्ष्मी की कृपा से धन-धान्य की वृद्धि होती है।
  • गुप्त नवरात्रि के समापन के कारण मां दुर्गा की विशेष पूजा भी अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

कई स्थानों पर इस दिन हवन और कन्या पूजन भी किया जाता है।


गुप्त नवरात्रि का समापन

भड्डली नवमी गुप्त नवरात्रि का अंतिम दिन होती है।

गुप्त नवरात्रि में—

  • महाविद्याओं की साधना
  • तंत्र साधना
  • देवी उपासना
  • विशेष मंत्र जप
  • हवन

का विशेष महत्व माना गया है।

नवमी के दिन पूर्णाहुति देकर साधक अपनी साधना का समापन करते हैं।


पूजा विधि

भड्डली नवमी के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

इसके बाद—

  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा को करें स्थापित
  • पीले पुष्प अर्पित करें।
  • तुलसी दल चढ़ाएं।
  • घी का दीपक जलाएं।
  • विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
  • मां दुर्गा की आरती करें।
  • हवन कर पूर्णाहुति दें।
  • ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान करें।

भड्डली नवमी के विशेष उपाय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए कुछ उपाय अत्यंत शुभ माने जाते हैं।

1. विवाह संबंधी बाधा दूर करने के लिए

इस दिन विवाह या सगाई करने से वैवाहिक जीवन सुखमय रहने की मान्यता है।

2. दांपत्य जीवन में मधुरता

यदि पति-पत्नी के बीच विवाद रहता हो तो शिव-पार्वती या कामदेव की पूजा करें।

3. आर्थिक उन्नति

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा करें तथा पीले वस्त्र अर्पित करें।

4. सुख-समृद्धि के लिए

विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।

5. पारिवारिक शांति

गरीबों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान करें।


भड्डली नवमी का सामाजिक महत्व

ग्रामीण भारत में भड्डली नवमी का विशेष महत्व है।

इस दिन—

  • बड़ी संख्या में विवाह संपन्न होते हैं।
  • सामूहिक विवाह आयोजित किए जाते हैं।
  • गृह प्रवेश के कार्यक्रम होते हैं।
  • नए व्यापार शुरू किए जाते हैं।
  • किसान भी कई स्थानों पर शुभ कार्यों की शुरुआत इसी दिन करते हैं।

ज्योतिषीय दृष्टि से क्यों खास है यह दिन?

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन नवमी तिथि की सकारात्मक ऊर्जा और गुप्त नवरात्रि का समापन एक विशेष आध्यात्मिक संयोग बनाता है।

इसी कारण इस तिथि को मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। हालांकि व्यक्तिगत कुंडली में विशेष दोष होने पर विद्वान ज्योतिषी से परामर्श लेना उचित माना जाता है।


भड्डली नवमी से जुड़े प्रमुख धार्मिक तथ्य

  • यह आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती है।
  • गुप्त नवरात्रि का अंतिम दिन होता है।
  • इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है।
  • भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और देवी दुर्गा की पूजा की जाती है।
  • विवाह सहित सभी मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं।
  • चातुर्मास शुरू होने से पहले का अंतिम बड़ा शुभ अवसर माना जाता है
Tags: #Bhadli Navami 2026
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