नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग को लेकर देश के 1.19 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें टिकी हुई हैं। फिटमेंट फैक्टर, बेसिक सैलरी और पेंशन के अलावा इस बार एक ऐसा मुद्दा चर्चा के केंद्र में है, जो सीधे कर्मचारियों के मासिक बजट से जुड़ा हुआ है। यह मुद्दा है—हाउस रेंट अलाउंस (HRA) यानी मकान किराया भत्ता।
दिल्ली-मुंबई जैसे महंगे शहरों के कर्मचारियों ने उठाई आवाज, आयोग के सामने रखी गई HRA बढ़ाने की मांग
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि महानगरों में बढ़ती महंगाई और आसमान छूते किराए के बीच वर्तमान HRA कर्मचारियों के लिए नाकाफी साबित हो रहा है। इसी वजह से 8वें वेतन आयोग के सामने HRA में भारी बढ़ोतरी की मांग रखी गई है।
12 हजार किराया, लेकिन भत्ता सिर्फ 5,400 रुपये
ऑल इंडिया एनपीएस इम्प्लॉईज फेडरेशन (AINPSEF) ने आयोग को सौंपे गए अपने ज्ञापन में कहा है कि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और कोलकाता जैसे X कैटेगरी शहरों में लेवल-1 के कर्मचारी को वर्तमान में बेसिक वेतन का 30 प्रतिशत HRA मिलता है, जो लगभग 5,400 रुपये बैठता है।
फेडरेशन का तर्क है कि इन शहरों में एक साधारण 2BHK मकान का किराया भी 12 हजार रुपये से कम नहीं है। वहीं अच्छे इलाकों में यही किराया 15 से 20 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। ऐसे में कर्मचारी की आय का बड़ा हिस्सा सिर्फ मकान किराए में खर्च हो जाता है।
36% HRA की मांग
फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने आयोग से मांग की है कि X कैटेगरी शहरों में HRA को बढ़ाकर 36 प्रतिशत किया जाए। इसके अलावा Y कैटेगरी शहरों के लिए 24 प्रतिशत और Z कैटेगरी शहरों के लिए 12 प्रतिशत HRA निर्धारित करने का प्रस्ताव दिया गया है।
कर्मचारी संगठनों का दावा है कि यदि यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है, तो 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद X कैटेगरी शहरों में कर्मचारियों का HRA करीब 13,600 रुपये तक पहुंच सकता है। इससे महानगरों में रहने वाले कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
लखनऊ बैठक में उठा मुद्दा
हाल ही में 22 और 23 जून को लखनऊ में आयोजित 8वें वेतन आयोग की बैठक में भी HRA का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। आयोग के सचिव पंकज जैन की अध्यक्षता में विभिन्न कर्मचारी और पेंशनर संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
आयोग अब प्राप्त ज्ञापनों, सुझावों और मांगों का अध्ययन कर रहा है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि बढ़ती महंगाई, आवास संकट और महानगरों के बढ़ते किराए को देखते हुए HRA में उल्लेखनीय संशोधन किया जा सकता है।
कर्मचारियों की सबसे बड़ी उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि 8वां वेतन आयोग केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कर्मचारियों के वास्तविक जीवन-यापन खर्चों को भी ध्यान में रखेगा। ऐसे में HRA में बढ़ोतरी का फैसला लाखों कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ी राहत साबित हो सकता है।
फिलहाल अंतिम निर्णय आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा, लेकिन इतना तय है कि इस बार HRA का मुद्दा केंद्रीय कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हो चुका है। अगर मांगें स्वीकार होती हैं, तो दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महंगे शहरों में रहने वाले कर्मचारियों की जेब पर पड़ने वाला किराए का बोझ काफी हद तक कम हो सकता है।





