अयोध्या में दान, चढ़ावा और जमीन सौदों पर बढ़ा विवाद, प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंची शिकायत
अयोध्या के भव्य राम मंदिर को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेन-देन, चढ़ावे और जमीन खरीद-फरोख्त के मामलों पर उठे सवाल अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच गए हैं। स्थानीय बीजेपी नेता की शिकायत के बाद पीएमओ ने जिला प्रशासन के माध्यम से ट्रस्ट से वित्तीय जानकारी मांगी, लेकिन ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने विशेष जांच दल (SIT) की जांच का हवाला देते हुए जानकारी उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच पहले से ही चल रही है।
क्या है पूरा मामला?
अयोध्या के स्थानीय बीजेपी नेता डॉ. रजनीश सिंह ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शिकायत भेजी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि मंदिर में प्राप्त दान, चढ़ावे और जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़े मामलों में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है।
उन्होंने पीएमओ से मांग की थी कि ट्रस्ट को निर्देशित किया जाए कि वह अपनी स्थापना से लेकर अब तक के सभी वित्तीय लेन-देन और संपत्ति का पूरा विवरण सार्वजनिक करे।
दो बार PMO को भेजी गई शिकायत
डॉ. रजनीश सिंह ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री कार्यालय को दो अलग-अलग पत्र भेजे।
पहला पत्र – 9 जून
पहले पत्र में उन्होंने मांग की कि राम मंदिर ट्रस्ट अपनी शुरुआत से अब तक प्राप्त दान, खर्च और संपत्ति का संपूर्ण विवरण सार्वजनिक करे।
दूसरा पत्र – 12 जून
इसके बाद 12 जून को भेजे गए दूसरे पत्र में उन्होंने विशेष रूप से राम मंदिर में मिलने वाले चढ़ावे और दान की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग दोहराई।
इन शिकायतों के अगले ही दिन यानी 13 जून को मामले की जांच के लिए SIT का गठन कर दिया गया।
PMO ने जिला प्रशासन को भेजा मामला
बीजेपी नेता की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने मामले को अयोध्या जिला प्रशासन को भेज दिया।
इसके बाद जिला प्रशासन ने शिकायत में उठाए गए बिंदुओं पर जानकारी जुटाने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से संपर्क किया।
सूत्रों के अनुसार 23 जून को अयोध्या के एडीएम (कानून-व्यवस्था) इंद्रकांत द्विवेदी ने एडीएम (प्रशासन) विशु राजा को एक पत्र भेजकर इस संबंध में हुई कार्रवाई की जानकारी दी।
चंपत राय ने क्यों नहीं दी जानकारी?
जिला प्रशासन की ओर से मांगी गई जानकारी के जवाब में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि वर्तमान में मामले की जांच SIT द्वारा की जा रही है।
उन्होंने प्रशासन को बताया कि जांच एजेंसी सभी आवश्यक दस्तावेज, रिकॉर्ड और वित्तीय विवरण एकत्र कर रही है। इसलिए जांच पूरी होने तक अलग से कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।
यानी ट्रस्ट ने सीधे तौर पर जानकारी देने से इनकार नहीं किया, बल्कि जांच प्रक्रिया का हवाला देते हुए फिलहाल जानकारी साझा करने से मना कर दिया।
किन जानकारियों की मांग की गई थी?
शिकायत में ट्रस्ट से कई महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारियां सार्वजनिक करने की मांग की गई थी।
इनमें शामिल हैं—
1. समर्पण निधि अभियान का पूरा हिसाब
राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर में चलाए गए “समर्पण निधि” अभियान के जरिए जुटाई गई राशि का विवरण।
2. दान और चढ़ावे की जानकारी
मंदिर में नकद दान, ऑनलाइन दान और अन्य माध्यमों से प्राप्त धनराशि का पूरा ब्योरा।
3. सोना, चांदी और गहनों का रिकॉर्ड
भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने, चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं का विवरण।
4. बैंक खाते और वित्तीय लेन-देन
ट्रस्ट के सभी बैंक खातों और उनसे जुड़े लेन-देन का विवरण।
5. जमीन खरीद और बिक्री
मंदिर ट्रस्ट द्वारा खरीदी या बेची गई जमीनों की पूरी जानकारी।
6. निर्माण और प्रशासनिक खर्च
मंदिर निर्माण, विकास कार्यों और प्रशासनिक संचालन पर हुए खर्च का ब्योरा।
7. ऑडिट और निरीक्षण रिपोर्ट
अब तक की गई ऑडिट रिपोर्ट और निरीक्षण दस्तावेज।
चढ़ावा चोरी के आरोपों से बढ़ी संवेदनशीलता
राम मंदिर देशभर की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे और दान से जुड़े किसी भी विवाद का राजनीतिक और सामाजिक महत्व बढ़ जाता है।
हाल के दिनों में चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया है। इसी कारण जांच एजेंसियां भी मामले को गंभीरता से देख रही हैं।
SIT जांच पर टिकी सबकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है। जांच एजेंसी मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड, दान, संपत्ति और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या ट्रस्ट भविष्य में मांगी गई जानकारी सार्वजनिक करता है या नहीं।
राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर बढ़ी हलचल
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शिकायत किसी विपक्षी दल की ओर से नहीं, बल्कि बीजेपी के ही एक स्थानीय नेता द्वारा की गई है। शिकायत के बाद पीएमओ का सक्रिय होना और जिला प्रशासन द्वारा ट्रस्ट से जवाब मांगना इस मामले को और गंभीर बना देता है। फिलहाल सभी की नजर SIT की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जो यह तय करेगी कि वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों में कितना दम है और आगे क्या कार्रवाई हो सकती है।
राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेन-देन और चढ़ावे के मामले में पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गए हैं। पीएमओ तक पहुंची शिकायत और उसके बाद ट्रस्ट द्वारा SIT जांच का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार करने से विवाद और गहरा गया है। अब आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।





