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जिद और जुनून की अनोखी दास्तां है अभिनेता अनु कपूर के जीवन का ये संघर्ष…जो किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं…

DigitalDesk by DigitalDesk
March 14, 2026
in मनोरंजन, महाराष्ट्र, मुख्य समाचार, मुंबई
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Actor Anu Kapoor story
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बाप थिएटर मालिक, बेटे का सपना आईएएस बनने का

हालात ने थमाई चाय की केतली

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22 साल की उम्र में 70 साल का बूढ़ा बनकर बदली किस्मत 

अभिनेता अनु कपूर का जीवन संघर्ष, जिद और जुनून का अनोखा उदाहरण 

हर कलाकार की सफलता के पीछे एक कहानी होती है, लेकिन अनु कपूर की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं। बचपन से घर में रंगमंच का माहौल था। उनके पिता मदनलाल कपूर एक यात्रा करने वाली पारसी थिएटर कंपनी चलाते थे। मां कमल शबनम कपूर उर्दू शिक्षिका और प्रशिक्षित शास्त्रीय गायिका थीं। घर में कला का वातावरण था, लेकिन आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। मां की मासिक आय मात्र 40 रुपये थी। समय के साथ थिएटर की मांग घटी और परिवार पर आर्थिक संकट गहराता चला गया।

बाप थिएटर मालिक, बेटे का सपना IAS बनने का

हालांकि घर में अभिनय की परंपरा थी, लेकिन अनु कपूर का सपना कुछ और था। वे प्रशासनिक सेवा में जाकर आईएएस अधिकारी बनना चाहते थे। पढ़ाई में वे तेज थे और बड़े सपने संजोए आगे बढ़ रहे थे। लेकिन आर्थिक तंगी ने उनकी राह रोक दी। माध्यमिक शिक्षा के बाद उन्हें पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। परिवार की जिम्मेदारियां उठाने के लिए उन्होंने चाय की दुकान तक चलाई, चूरन के पर्चे बेचे और लॉटरी टिकट तक बेचे। बाद में उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि वे कभी अभिनेता नहीं बनना चाहते थे।

हालात ने उन्हें पिता की थिएटर कंपनी से जोड़ दिया। छोटे-छोटे कस्बों और गांवों में घूम-घूमकर नाटक करने लगे। संघर्ष के इन वर्षों में उन्होंने 250 से अधिक पारसी और लोक नाटकों में मुख्य भूमिकाएं निभाईं। 1976 में अपने भाई रंजीत कपूर के कहने पर उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) में दाखिला लिया। यहां उन्हें विश्व रंगमंच और साहित्य को समझने का अवसर मिला। एनएसडी में उन्होंने ‘अंतिम यात्रा’, ‘थ्री सिस्टर्स’, ‘द ग्रेट गॉड ब्राउन’ और ‘एक रुका हुआ फैसला’ जैसे नाटकों में प्रभावशाली अभिनय किया।

22 वर्ष की उम्र में 70 वर्षीय बुजुर्ग का निभाया किरदार

उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट तब आया जब मात्र 22 वर्ष की उम्र में उन्होंने एक नाटक में 70 वर्षीय बुजुर्ग का किरदार निभाया। उनकी सशक्त अभिनय क्षमता ने दर्शकों को हैरान कर दिया। उम्र से कहीं अधिक परिपक्व अभिनय ने साबित कर दिया कि कलाकार की पहचान उसकी प्रतिभा से होती है, उम्र से नहीं। इसी प्रदर्शन ने प्रख्यात फिल्मकार श्याम बेनेगल का ध्यान आकर्षित किया। श्याम बेनेगल ने उन्हें अपनी फिल्म मंडी में काम करने का मौका दिया। इस फिल्म में शशि कपूर, नसीरुद्दीन शाह और स्मिता पाटिल जैसे दिग्गज कलाकार थे। ‘मंडी’ के जरिए अनु कपूर ने मुख्यधारा के सिनेमा में अपनी औपचारिक एंट्री की और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

चरित्र अभिनेता के रूप में अपनी मजबूत पहचान बनाई

1980 और 1990 के दशक में उन्होंने कई बड़ी फिल्मों में काम किया। मिस्टर इंडिया, तेजाब, राम लखन और घायल जैसी फिल्मों में उन्होंने चरित्र अभिनेता के रूप में अपनी मजबूत पहचान बनाई। उनकी अभिनय शैली में गंभीरता, हास्य और भावनात्मक गहराई का अद्भुत संतुलन देखने को मिला। फिल्म विक्की डोनर में उनके सहायक किरदार को दर्शकों और समीक्षकों ने खूब सराहा। इस भूमिका के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 100 से अधिक फिल्मों में अभिनय कर वे बॉलीवुड के सबसे विश्वसनीय चरित्र अभिनेताओं में गिने जाने लगे। सिर्फ फिल्मों तक ही उनका सफर सीमित नहीं रहा। रेडियो पर उनका कार्यक्रम सुहाना सफर बेहद लोकप्रिय हुआ, जिसमें वे पुराने फिल्मी गीतों और उनसे जुड़ी कहानियों के जरिए श्रोताओं को यादों की दुनिया में ले जाते थे। टेलीविजन पर उन्होंने अंताक्षरी की मेजबानी कर घर-घर में अपनी पहचान बनाई। यह कार्यक्रम वर्षों तक भारतीय परिवारों के मनोरंजन का अहम हिस्सा रहा।

निर्देशन, निर्माण और संगीत के क्षेत्र में भी हाथ आजमाया

अनु कपूर ने सिर्फ अभिनय ही नहीं, बल्कि निर्देशन, निर्माण और संगीत के क्षेत्र में भी हाथ आजमाया। उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से यह साबित किया कि सच्चा कलाकार किसी एक माध्यम तक सीमित नहीं रहता। उनकी जिंदगी इस बात का उदाहरण है कि सपने भले बदल जाएं, लेकिन मेहनत और लगन कभी व्यर्थ नहीं जाती। आईएएस बनने का सपना भले अधूरा रह गया, लेकिन उन्होंने अभिनय की दुनिया में ऐसी पहचान बनाई, जो शायद किसी प्रशासनिक पद से भी बड़ी साबित हुई। चाय की दुकान चलाने वाला वह युवक आज भारतीय सिनेमा, टेलीविजन और रेडियो का बड़ा नाम है। अनु कपूर की कहानी यह सिखाती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर भीतर जुनून जिंदा हो तो सफलता का रास्ता जरूर निकलता है।

Tags: #Actor Annu Kapoor film script#Actor Anu Kapoor story
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