रंगोत्सव की रौनक: भोपाल में सज गया होली का बाजार, हर्बल रंगों की बढ़ी मांग
अस्थायी बाजारों में बढ़ी चहल-पहल
शहर के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों—न्यू मार्केट, चौक बाजार, आजाद मार्केट, इतवारा, मारवाड़ी रोड, लोहा बाजार, भेल, दस नंबर मार्केट, बैरागढ़ और करौंद—में अस्थायी स्टॉल लग गए हैं। इन स्टॉलों पर हर्बल गुलाल, ऑर्गेनिक रंग, सफेद टी-शर्ट जिन पर ‘होली है’ जैसे स्लोगन लिखे हैं, रंगीन टोपी, बच्चों के मास्क और तरह-तरह की डिजाइनर पिचकारियां उपलब्ध हैं। छोटे बच्चों के लिए कार्टून थीम वाली पिचकारियां और वाटर गन विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। हालांकि बाजार में उत्साह के बीच महंगाई की मार भी महसूस की जा रही है। कई ग्राहकों का कहना है कि इस वर्ष रंग और पिचकारियों के दामों में 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। फिर भी त्योहार की उमंग के आगे कीमतों का असर सीमित ही दिखाई दे रहा है।
देसी उत्पादों का बढ़ा दबदबा
इस बार होली बाजार में एक उल्लेखनीय बदलाव साफ दिख रहा है। पहले जहां अधिकांश फैंसी सामान चीन से आयात होता था, वहीं अब भारतीय उत्पादों ने बाजार पर मजबूत पकड़ बना ली है। व्यापारियों का कहना है कि आयात पर नियंत्रण, स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा और स्वदेशी के प्रति बढ़ती जागरूकता ने विदेशी माल की हिस्सेदारी काफी कम कर दी है। भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री एवं कैट के पूर्व प्रवक्ता विवेक साहू के अनुसार, “पहले ग्राहक अनजाने में चीन निर्मित उत्पाद खरीद लेते थे, लेकिन अब वे सजग हो गए हैं। कई ग्राहक खुद दुकानदार से पूछते हैं कि सामान ‘मेड इन इंडिया’ है या नहीं।” उनका कहना है कि स्वदेशी उत्पादों की मांग बढ़ने से स्थानीय कुटीर उद्योगों और छोटे निर्माताओं को सीधा लाभ मिल रहा है। साधारण पिचकारी, गुलाल और रंग लगभग पूरी तरह भारतीय कंपनियों द्वारा बनाए जा रहे हैं। हालांकि बैटरी या म्यूजिकल थीम वाली कुछ पिचकारियों में आंशिक विदेशी निर्भरता अभी भी बनी हुई है।
केमिकल रंगों से दूरी
थोक रंग एवं पिचकारी व्यवसायियों का कहना है कि इस बार ग्राहकों का रुझान स्पष्ट रूप से हर्बल और प्राकृतिक रंगों की ओर है। “लोग अब बच्चों की त्वचा और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए केमिकल रंगों से दूरी बना रहे हैं। फूलों से बने गुलाल और ऑर्गेनिक रंगों की बिक्री पिछले वर्षों की तुलना में कई गुना बढ़ी है,” एक व्यापारी ने बताया। डॉक्टरों और सामाजिक संगठनों द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाने का भी असर देखने को मिल रहा है। कई स्कूलों और आवासीय कॉलोनियों में ‘ईको-फ्रेंडली होली’ मनाने का संदेश दिया जा रहा है। इसका सीधा प्रभाव बाजार पर पड़ा है, जहां हर्बल रंगों के अलग काउंटर बनाए गए हैं।
मिठाई और किराना व्यापार में तेजी
होली केवल रंगों का ही नहीं, बल्कि पकवानों और मिठाइयों का भी पर्व है। गुजिया, नमकीन, मठरी, दही-बड़े और अन्य पारंपरिक व्यंजनों की मांग तेजी से बढ़ रही है। किराना, डेयरी और मिठाई दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ने लगी है। व्यापारियों का अनुमान है कि होली से लेकर रंग पंचमी तक भोपाल संभाग में लगभग 100 से 150 करोड़ रुपये का कारोबार हो सकता है। विशेष रूप से चौक और इतवारा क्षेत्र की मिठाई दुकानों में एडवांस बुकिंग शुरू हो चुकी है। वहीं डेयरी उत्पादों की मांग भी बढ़ गई है, क्योंकि त्योहार के दौरान घरों में विशेष व्यंजन बनाए जाते हैं।
व्यापारियों में उत्साह
व्यापारियों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार बाजार में रौनक ज्यादा है। स्वदेशी उत्पादों को मिल रहा समर्थन स्थानीय व्यापार के लिए सकारात्मक संकेत है। छोटे और मध्यम स्तर के उद्योगों को इससे नई ऊर्जा मिली है। कुल मिलाकर राजधानी भोपाल में रंगोत्सव की तैयारी पूरे शबाब पर है। बाजारों की चहल-पहल, देसी उत्पादों की बढ़ती मांग और पर्यावरण के प्रति जागरूकता ने इस बार की होली को खास बना दिया है। महंगाई की हल्की चिंता के बावजूद शहरवासी पूरे उत्साह के साथ रंगों के इस पर्व का स्वागत करने को तैयार हैं।





