बिहार में महागठबंधन अब पूरी तरह से चुनावी मोड में आ गया है। राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और इससे पहले गठबंधन ने एक बड़ी रणनीतिक योजना की घोषणा की है – ‘वोटर अधिकार यात्रा’। इस यात्रा का उद्देश्य राज्य भर में जनसंपर्क कर बीजेपी और चुनाव आयोग पर हमला बोलना है, विशेषकर 65 लाख मतदाताओं के नाम कथित तौर पर काटे जाने को लेकर।
10 अगस्त से होगी शुरुआत
इस यात्रा की शुरुआत रक्षाबंधन के दूसरे दिन 10 अगस्त 2025 को रोहतास जिले से होगी। उसी दिन यह यात्रा औरंगाबाद पहुंचेगी। जहां कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र में राहुल गांधी रात्रि विश्राम करेंगे। इस क्षेत्र से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम विधायक हैं। 11 अगस्त को यात्रा देव मंदिर से आगे बढ़कर रफीगंज और फिर गया पहुंचेगी। यात्रा का अगला पड़ाव नवादा होगा।
17 दिनों की सघन यात्रा, हर दिन नई सभा
महागठबंधन की यह यात्रा 15 से 17 दिनों तक चलेगी और इसमें बिहार के नौ प्रमंडलों को कवर किया जाएगा। यह यात्रा सिर्फ राजनीतिक रैलियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके जरिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गहराई से जनसंपर्क साधा जाएगा। हर प्रमुख पड़ाव पर सभाएं और जनसंवाद आयोजित किए जाएंगे।
कौन-कौन होंगे शामिल?
राहुल गांधी यात्रा की शुरुआत से ही प्रमुख चेहरा होंगे। पहले दिन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी मौजूद रहेंगे। प्रियंका गांधी भी इस यात्रा में किसी विशेष पड़ाव पर शामिल होंगी। तेजस्वी यादव और राहुल गांधी इस यात्रा में ज्यादातर समय एक साथ रहेंगे।
महागठबंधन के सभी प्रमुख दलों के शीर्ष नेता यात्रा में भाग लेंगे।
चुनावी मौसम में राजनीतिक हमला तेज
यात्रा का प्रमुख उद्देश्य वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम कटने का मुद्दा बनाना है। कांग्रेस और महागठबंधन ने आरोप लगाया है कि 65 लाख से ज्यादा लोगों का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है, जिसमें अल्पसंख्यक, पिछड़े, गरीब और युवा वर्ग के लोग ज्यादा हैं। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा है और यह सीधा लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है।
यात्रा की तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के अनुसार यात्रा के हर रूट का पूर्व सर्वेक्षण किया जा रहा है। जैसे आरा में रूट की जांच हो रही है। सभी प्रमुख सभाओं की योजना तैयार की जा रही है और कार्यक्रम की फाइनल लिस्ट भी जल्द मीडिया के साथ साझा की जाएगी।
यात्रा का नाम – प्रतीकात्मक शक्ति
हालांकि यात्रा के नाम की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक इसे ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के नाम से प्रचारित किया जाएगा। यह नाम उस मुद्दे को सीधे इंगित करता है जो यात्रा का मूल आधार है – वोटर लिस्ट में भारी कटौती और चुनाव आयोग की भूमिका।
चुनावी रणनीति की पहली बड़ी चाल
बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यह यात्रा महागठबंधन की ओर से पहली बड़ी राजनीतिक गतिविधि मानी जा रही है। इससे साफ है कि गठबंधन वोटिंग अधिकारों को केंद्र में रखकर भावनात्मक और संवैधानिक मुद्दों के सहारे जनसंपर्क को धार देने की कोशिश कर रहा है। बिहार की राजनीति में यह यात्रा एक बड़ा मोड़ ला सकती है। जहां बीजेपी सरकार पर महंगाई, बेरोजगारी और कानून व्यवस्था को लेकर हमले हो रहे हैं, वहीं महागठबंधन अब संवैधानिक अधिकारों के मुद्दे पर एक नई लहर खड़ी करने की तैयारी में है। राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और प्रियंका गांधी की एकजुटता इस यात्रा को सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश के रूप में भी स्थापित कर सकती है। …(प्रकाश कुमार पांडेय)





