देश में झमाझम बारिश से राहत भी, आफत भी!” आज देशभर में मानसूनी बारिश का व्यापक असर —अधिकांश राज्यों में झमाझम बारिश हुई। यह बारिश जहां किसानों और जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए राहत लेकर आई, वहीं कई जगहों पर यह आफत का रूप भी ले गई। देश के उत्तर, मध्य, दक्षिण और पूर्वोत्तर हिस्सों में अलग-अलग तरह की स्थितियाँ बनीं, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।
- उत्तर भारत में तेज बारिश
- मध्य भारत जलमग्न हालात
- दक्षिण में राहत के आसार
- पूर्वोत्तर में बाढ़ की चेतावनी
- किसान खुश, शहर बेहाल
उत्तर भारत में तेज बारिश, जलभराव से हाल बेहाल
दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा में तेज बारिश दर्ज की गई। दिल्ली में एक रात में 80 मिमी से अधिक वर्षा हुई, जिससे कई इलाकों में जलभराव हो गया। मिंटो ब्रिज, आईटीओ, और लाजपत नगर जैसे इलाकों में सड़कें तालाब बन गईं। यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। दिल्ली नगर निगम (MCD) की टीमें पंप लगाकर पानी निकालने में जुटीं रहीं, लेकिन स्थिति से निपटना मुश्किल साबित हुआ।
उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, और वाराणसी में भी भारी बारिश हुई। लखनऊ में निचले इलाकों में पानी घुसने से लोगों को पलायन करना पड़ा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आपात बैठक बुलाकर राहत एवं बचाव कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए हैं।
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में भारी बारिश और भूस्खलन की चेतावनी के बाद स्कूलों में छुट्टियाँ घोषित कर दी गईं। बद्रीनाथ-केदारनाथ राजमार्ग कई स्थानों पर मलबे से अवरुद्ध हुआ है।
मध्य भारत जलमग्न, नदियाँ उफान पर
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मानसूनी वर्षा के चलते कई जिलों में नदियाँ खतरे के निशान पर बह रही हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, और बालाघाट में लगातार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नर्मदा, तवा, और शिवना नदियाँ उफान पर हैं। कई गाँवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है।
मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम, सीहोर, और छिंदवाड़ा जिलों में स्कूलों को बंद कर दिया गया है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को सतर्क रखा गया है। मंडला, डिंडोरी जैसे आदिवासी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है।
छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर और कोरबा जिलों में बारिश के चलते कई घरों में पानी भर गया। राज्य सरकार ने जिलों को अलर्ट पर रखते हुए राहत शिविरों की स्थापना के निर्देश दिए हैं।
दक्षिण में राहत के आसार, बारिश सामान्य
दक्षिण भारत के कई हिस्सों में मानसून की सक्रियता कम रही, लेकिन केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश ने गर्मी से राहत दी। चेन्नई, बेंगलुरु, और हैदराबाद में दिन भर बादल छाए रहे और रुक-रुक कर बारिश होती रही।
तमिलनाडु के तटीय इलाकों में समुद्र में ऊँची लहरें देखी गईं, जिससे मछुआरों को समुद्र में न जाने की चेतावनी जारी की गई है। केरल के कोझिकोड और त्रिशूर में बिजली गिरने की घटनाओं में 2 लोगों की मौत हो गई। हालांकि मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में तमिलनाडु और तेलंगाना में तेज बारिश की संभावना जताई है।
पूर्वोत्तर में बाढ़ की चेतावनी, कई गांव डूबे
असम, मेघालय, और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश के चलते नदियाँ उफान पर हैं। ब्रह्मपुत्र, दीकोंग, और लोहित जैसी प्रमुख नदियाँ खतरे के निशान को पार कर गई हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) ने बाढ़ की चेतावनी जारी की है।
दिब्रूगढ़, लखीमपुर, और गोलाघाट जिलों के कई गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। हजारों परिवारों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने प्रभावित जिलों का हवाई दौरा कर हालात का जायजा लिया। मेघालय और मिजोरम में भी भूस्खलन की घटनाएँ सामने आई हैं, जिससे कई मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं।
किसानों के चेहरे खिले, शहरों में दिक्कत
जहां एक ओर शहरों में जलभराव, ट्रैफिक जाम और बिजली कटौती ने परेशानियां बढ़ाई हैं, वहीं किसानों के चेहरों पर राहत है। पंजाब, हरियाणा, बिहार, और झारखंड में अच्छी वर्षा होने से धान और दलहनों की बुवाई में तेजी आई है। खेतों में पानी भरने से खरीफ फसलों को पर्याप्त नमी मिल रही है। हालांकि, किसानों ने यह भी कहा कि यदि अगले कुछ दिनों में अत्यधिक बारिश हुई तो फसलें खराब भी हो सकती हैं, इसलिए संतुलित वर्षा की आवश्यकता है।
बिहार के कुछ हिस्सों में निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। पटना, दरभंगा, और भागलपुर में सड़कों पर पानी भरने से लोगों को परेशानी हो रही है।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कहा है कि दक्षिण पश्चिम मानसून पूरी तरह से सक्रिय है और अगले 5 दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में मध्यम से भारी वर्षा जारी रहेगी। मध्य भारत, उत्तर भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। कुछ स्थानों पर बिजली गिरने, तेज हवाओं और भूस्खलन की संभावना है।
देश के विभिन्न राज्यों की आपदा प्रबंधन एजेंसियाँ अलर्ट पर हैं। एनडीआरएफ की 50 से अधिक टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात की गई हैं। राज्य सरकारों ने हेल्पलाइन नंबर, राहत शिविर, और इमरजेंसी मेडिकल टीमें सक्रिय कर दी हैं। केंद्रीय गृहमंत्रालय ने सभी राज्यों को सतर्क रहने और आवश्यक आपूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बाढ़जनित बीमारियों से बचाव किया जा सके।
देश में मानसून ने जहाँ किसानों के लिए उम्मीदें जगाईं, वहीं शहरों और पर्वतीय इलाकों में परेशानियाँ भी खड़ी कर दीं। सरकारों और प्रशासन के लिए यह समय परीक्षण का है — कि वे आपदा से निपटने में कितने कारगर हैं। आने वाले कुछ दिन और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, इसलिए सतर्कता और सामूहिक सहयोग की ज़रूरत है।…(प्रकाश कुमार पांडेय)





