Nari Shakti Vandan Act: केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार 2029 में होने वाले लोकसभा चुनावों में महिलाओं के लिए सीट के आरक्षण को लागू कर सकती है। सूत्रों की माने तो एनडीए सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। इस लक्ष्य के तहत अगले 2029 के चुनाव में लोकसभा के साथ राज्य विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित की जाने वाली हैं।
मोदी सरकार आगामी 2029 के लोकसभा चुनावों में महिलाओं को एक महत्वपूर्ण सशक्तिकरण सौगात देने की तैयारी में है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सरकार का लक्ष्य है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए, ताकि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित की जा सकें।
इस ऐतिहासिक पहल का आधार संविधान का 128वां संशोधन विधेयक, 2023 है, जिसे सितंबर 2023 में संसद द्वारा पारित किया गया था। यह अधिनियम देश की राजनीति में लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। लेकिन इसकी प्रभावशीलता कुछ प्रक्रियात्मक शर्तों से जुड़ी है।
सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि आरक्षण की प्रक्रिया जनगणना और उसके आधार पर होने वाली परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही लागू होगी। सरकार ने अब जनगणना की घोषणा कर दी है, जो इस दिशा में पहला बड़ा कदम है। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों का नई जनसंख्या संरचना के अनुसार परिसीमन किया जाएगा, जिसके बाद ही महिला आरक्षण प्रभाव में आएगा। सरकारी सूत्रों ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि यह आरक्षण 2029 के आम चुनावों तक लागू हो जाए। इसके लिए ज़रूरी संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रियाएं समय पर पूरी की जाएंगी।” वर्तमान समय में महिलाओं की भागीदारी संसद और विधानसभाओं में अपेक्षाकृत कम है, और इस अधिनियम के लागू होने से भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी में क्रांतिकारी परिवर्तन आने की संभावना है।
यह अधिनियम न केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व को संतुलित करेगा, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी महिलाओं की भूमिका और भागीदारी को सशक्त करेगा। अनेक महिला नेताओं और सामाजिक संगठनों ने इस कदम का स्वागत किया है और इसे “देर से आया हुआ लेकिन ऐतिहासिक निर्णय” बताया है।
हालाँकि, कुछ राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि इस आरक्षण को लागू करने में देरी से इसका वास्तविक प्रभाव आगे खिसक सकता है, लेकिन सरकार का कहना है कि कानूनी और संवैधानिक बाध्यताओं को ध्यान में रखते हुए यह प्रक्रिया जितनी जल्दी हो सके, पूरी की जाएगी। नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यदि सरकार अपने निर्धारित लक्ष्य के अनुसार 2029 तक इसे लागू कर पाती है, तो यह भारतीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा सकता है। इस पहल को भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर संकेत माना जा सकता है।
प्रमुख बिंदुओं
महिला आरक्षण और 2029 का लोकसभा चुनाव
नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023: इस अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटों का आरक्षण प्रावधानित किया गया है। यह आरक्षण तब लागू होगा जब जनगणना पूरी हो जाएगी। उसके आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि 2029 के आम चुनावों तक यह आरक्षण वास्तव में लागू हो जाए।
जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया
अगली जनगणना के लिए डेटा संग्रहण प्रक्रिया 2026 में शुरू होगी। यह जनगणना 1 मार्च, 2027 तक पूरी होनी है। जनगणना के बाद संसद को परिसीमन अधिनियम पारित करना होगा, जिससे परिसीमन आयोग का गठन होगा।
नई जनसंख्या के अनुसार सीटों का पुनर्विन्यास।
नए चुनाव क्षेत्रों की सीमाएं तय करना।
महिला आरक्षण लागू करने के लिए यह चरण अनिवार्य है।
दक्षिणी राज्यों की सियासी चिंता
दक्षिणी राज्य जैसे तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उनके राज्यों में जनसंख्या वृद्धि धीमी रही है। नई जनगणना आधारित परिसीमन से उत्तर भारत की सीटें बढ़ सकती हैं, जबकि दक्षिण की सीटों का अनुपात घट सकता है। इससे राजनीतिक प्रतिनिधित्व में असंतुलन की संभावना बनती है। सरकार ने कहा है कि इन चिंताओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान किया जाएगा। यदि जनगणना और परिसीमन समय पर पूरे हो जाते हैं और संसद परिसीमन अधिनियम पारित कर देती है तो 2029 के आम चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षण प्रभावी हो सकता है। यह भारत की राजनीतिक प्रतिनिधित्व में लैंगिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा। लेकिन, यदि किसी कारणवश ये प्रक्रियाएं विलंबित होती हैं तो आरक्षण 2029 से आगे टल सकता है। (प्रकाश कुमार पांडेय)





