नेपाल में रविवार को राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदला और केपी शर्मा ओली को देश का नया पीएम नियुक्त कर दिया गया। 72 साल के केपी शर्मा ओली नेपाल के तीसरी बार प्रधानमंत्री बने हैं। ओली, नेपाल में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच नई गठबंधन सरकार का नेतृत्व करेंगे। ओली को पुष्प कमल दाहाल ‘प्रचंड’ की जगह पीएम मनाया गया है।
दरअसल प्रचंड विश्वास मत हार गए थे। इसके बाद नेपाल संविधान के तहत देश में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू की गई थी। नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र ने नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी-एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनिस्ट के नेता केपी शर्मा ओली को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया है।
- ओली बने तीसरी बार नेपाल के पीएम
- 16 साल में 13 बार बदल चुकी नेपाली सरकार
- ओली को मिली 166 सांसदों का समर्थन
- यूएमएल के 78 सांसद और नेपाली कांग्रेस के 88 सांसद का समर्थन
- नेपाली राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने ओली को नियुक्त किया पीएम
- सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष हैं केपी शर्मा ओली
- दो बार रह चुके हैं नेपाल के प्रधानमंत्री
- केपी शर्मा को माना जाता है चीन समर्थक
कुर्सी के लिए राजनीतिक दुश्मन से मिले ओली
ओली ने पीएम की कुर्सी की खातिर अपने मित्र रहे पुष्प कमल दाहाल प्रचंड को करारा झटका दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के लिए अपने राजनीतिक शत्रु और नेपाली कांग्रेस के शेर बहादुर देउबा से हाथ मिलाया है। शेर बहादुर देउबा की नेपाली कांग्रेस नेपाल प्रतिनिधि सभा में इस समय सबसे बड़ी पार्टी की ताकत रखती है। बता दें चार महीने पहले ही ओली के समर्थन से मार्च 2024 में पुष्प कमल दाहाल प्रचंड ने अपनी सरकार का गठन किया था। साल 2008 में जब पूर्ववर्ती राजशाही को औपचारिक रूप से समाप्त किया गया तो नेपाल ने उस समय अंतरिम संविधान को अपनाया था। तब से लेकर अब तक नेपाल में 13 अलग-अलग सरकार बन चुकी हैं, लेकिन इनमें पुष्प कमल दाहाल प्रचंड, शेर बहादुर देउबा और ओपी शर्मा ओली ने ही प्रधानमंत्री के रूप में कई बार पद संभाला है।अपने पहले कार्यकाल में ओपी शर्मा ओली सार्वजनिक तौर पर भारत की आलोचना कर चुके हैं। नेपाल में साल 2015 में नया संघीय और लोकतांत्रिक संविधान अपनाया गया था।
भारत के साथ रहे तनाव भरे संबंध
तराई में रहने वाली भारतीय मूल के निवासियों के साथ भेदभाव के मुद्दे को लेकर भारत और नेपाल के बीच संबंध में तनाव पैदा हो गया था। हालांकि ओली उस समय नेपाल और भारत प्रमुख व्यक्ति समूह गठित करने पर सहमत हो गए थे। वहीं दूसरी बार सत्ता संभालने से पहले ओपी शर्मा ओली ने देश की आर्थिक समृद्धि के लिए भारत के साथ दोस्ताना संबंध बनाने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने नेपाल का नया राजनीतिक नक्शा जारी किया, जिसके बाद भारत और नेपाल के साथ संबंधों में खटास पैदा हो गई थी। बता दें नेपाल के नए नक्शे में रणनीतिक रूप से तीन महत्वपूर्ण भारतीय क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा बताया गया था।
नेपाल में है असली अयोध्या !
ओली ने जुलाई 2020 में यह दावा किया था कि भारत ने उनके राम को हड़प लिया है। असली अयोध्या भारत में नहीं नेपाल में है। ओपी शर्मा ओली के इस दावे के बाद भारत ने एतराज जताया था, भारत के असहज होने पर नेपाली विदेश मंत्रालय को स्पष्टीकरण जारी किया था।
विवादित ही रही ओली की नियुक्ति
ओपी शर्मा ओली 11 अक्टूबर 2015 से तीन अगस्त 2016 और इसके बाद 5 फरवरी 2018 से 13 जुलाई 2021 तक नेपाल के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। 13 मई 2021 से 13 जुलाई 2021 तक ओली का नेपाल का प्रधानमंत्री बना रहना खासा विवादों में रहा। तत्कालीन राष्ट्रपति बिद्यादेवी भंडारी की ओर से उस समय की गई उनकी नियुक्ति को नेपाली सुप्रीम कोर्ट ने भी असंवैधानिक करार दिया था।





