अखिलेश मायावती चंद्रशेखर के बीच नगीना सीट पर दिलचस्प मुकाबला
लोकसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश में दलित सियासत भी जोरों पर है। दलित वोट बैंक किसके साथ इसके लिए बहुजन समाज पार्टी और भीम आर्मी के बीच में सियासत जोरों पर है। कह सकते हैं कि उत्तरप्रदेश की दलित सियासत केवल एक सीट पर आकर ठहर गई है और वो है नगीना सीट। नगीना सीट पर भीम आर्मी की तरफ से चंद्रशेखर खुद मैदान में है तो वहीं बसपा की तरफ से सुंरेद्र पाल सिंह को मैदान में उतारा है। अब समझाते हैं आपको कि आखिर क्या है वजह कि इस सीट पर सभी दलों की नजरें क्यों टिकी है।
जानें राजनैतिक दल क्यों चाहते हैं नगीना
उत्तरप्रदेश की नगीना सीट रिजर्व सीट है। ये परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। इस सीट पर अब तक तीन चुनाव हुए और किसी एक पार्टी के हिस्से में ये सीट नहीं रही। इस सीट पर मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका में होते हैं इसके अलावा 21 प्रतिशत दलित वोटर भी हैं। इस सीट पर 2024 का चुनाव बहुत दिलचस्प होने जा रहा है क्योंकि ये सीट तय करेगी कि दलित वोटर किसके साथ है ।
दलित और मुस्लिम वोटर का मन बताती है ये सीट
बसपा सुप्रीमों मायवाती और उनके राजनैतिक उत्तराधिकारी आकाश आनंद के लिए जीत जरूरी है इस सीट पर
इस सीट पर सपा ने भी उतारा है उम्मीदवार
मुस्लिम वोटर है निर्णायक भूमिका में
नगीना सीट में मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका में होते है और ये सीट रिर्जव सीट है। इस पर दलित वोटर भी बीस प्रतिशत से ज्यादा है । ऐसे में इस सीट पर हार जीत का फैसला ये बताता है कि दलित और मुस्लिम वोटर के मन में क्या है। राज्य का दलित और मुस्लिम वोटर किसके साथ है।
हार जीत से तय होगा कि दलितों का नेता कौन
इस सीट पर बसपा सुप्रीमो मायावती भीम आर्मी के साथ साथ सपा ने भी उम्मीदवार उतारा है। इस सीट की जीत इस बात तो जाताऐंगी कि उत्तरप्रदेश का दलित वोट किसके साथ है। इस सीट सीट चंद्रशेखर आजाद भीम आर्मी से मैदान में है बसपा से सुरेंद्र पाल और सपा से मनोज कुमार जो पूर्व जज है वो मैदान में है। नगीना सीट को लेकर न केवल बसपा बल्कि सपा और भीम आर्मी सभी की साख दांव पर है।
सपा दावा करती है कि वो वो पीडीए के तहत चुनाव लड़ती है मतलब कि पिछड़ा दलित और अल्पंसख्यक। वहीं बसपा का सालों साल से उत्तरप्रदेश के दलित वोटों पर कब्जा है। इस बार बसाप के लिए खास ये भी है कि मायावती ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर अपने भतीजे आकाश आनंद को बनाया है। ऐसे में अगर नगीना सीट बसपा के हाथ से जाती है तो आकाश आनंद के नेतृत्व पर भी सवाल खड़ें होंगे। उनका राजनैतिक करियर शुरूआत से ही सवालों के घेरे में आ जाएगा। वही अगर भीम आर्मी इस सीट को जीतती है तो उत्तरप्रदेश के दलित राजनीति में एक नए चेहरे की एंट्री साथ ही ये भी साबित होगा कि अब बसपा अकेले दलितों का ध्यान रखने वाला अकेला दल नहीं रहा। यही कारण है कि जब आकाश आनंद ने प्रचार की शुरूआत की तो सबसे पहले नगीना सीट से की थी और चंद्रेशखर पर जमकर हमला भी बोला था।





