वन नेशन वन इलेक्शन: तो भाजपा इसलिए दे रही अबकी बार 400 पार का नारा
वन नेशन वन इलेक्शन पर विचार के लिए बनाई गई पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद समिति ने आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। दावा है कि इस मसौदे में समिति ने 2029 में देश में एक साथ लोकसभा और सभी विधानसभाओं का चुनाव कराने का प्रस्ताव किया है। पहले चरण में लोकसभा और विधानसभाओं और बाद में दूसरे चरण में नगर निगम स्तर के चुनाव कराने का सुझाव दिया गया है। दरअसल 18,626 पन्नों वाली इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पैनल का गठन 2 सितंबर 2023 को किया गया था। यह रिपोर्ट स्टेकहोल्डर्स-एक्सपर्ट्स से चर्चा के बाद 191 दिन की रिसर्च का नतीजा है। साथ ही रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एक देश-एक चुनाव पर 47 राजनीतिक दलों ने कमेटी को अपनी राय दी। इनमें से 32 ने पक्ष में और 15 ने विपक्ष में मत रखा है
‘बड़े बदलाव का लक्ष्य लेकर चल रही सरकार’
लेकिन देश की राजनीति में यह एतिहासिक बदलाव आना तभी संभव होगा, जब वर्तमान सरकार यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में लौटें। साथ ही, संवैधानिक बाध्यता है कि इस कानून को लागू करने से पहले देश के कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं से पास कराना पड़ेगा। संभवतः यही कारण है कि भाजपा लगातार अपने लिए 370 सीटें और एनडीए के लिए 400 सीटों पर जीत का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिससे लोकसभा चुनाव 2024 के बाद इस बिल को संसद से पास कराने में कोई परेशानी न हो।
जनता को तैयार करना बड़ी चुनौती
राजनीतिक विश्लेषक संजय शर्मा के अनुसार, देश के लिए यह एक बड़ा बदलाव होगा। इसके लिए देश की जनता को मानसिक तौर पर तैयार करना होगा। साथ ही विपक्ष का साथ मिलने पर ही इस तरह के किसी बड़े बदलाव की सफलता निर्भर करती है। ऐसे में सरकार को उसे भी साथ में लाना होगा। कोई बड़ा निर्णय लागू करने से पहले सभी पक्षों से बातचीत करने से बाद में उसको लेकर व्यक्त की जा रही तमाम आशंकाएं समाप्त हो जाती हैं। ऐसे में सरकार को कोई बड़ा कदम उठाने से पहले सबको साथ लाने या कम से कम चर्चा करने की आवश्यकता समझनी होगी।
वहीं राजनीतिक विश्लेषक धीरेंद्र कुमार ने कहना है कि इस तरह की कोई व्यवस्था लागू करने से पहले इन प्रश्नों पर विचार करना होगा कि यदि बीच में कोई सरकार गिर जाती है, तो उसके स्थान पर नई सरकार का गठन कैसे होगा। यदि उसका चुनाव होता है तो क्या वह पांच साल के लिए होगा, या पांच साल में बचे कार्यकाल के लिए होगा। इस समय भी सांसद-विधायक के इस्तीफे के बाद उपचुनाव होने पर नया जनप्रतिनिधि केवल शेष कार्यकाल के लिए ही चुना जाता है। इस तरह के प्रश्नों पर अवश्य रुप से विचार करना होगा।





