शून्य से 27 तक पहुंचा सफर…महिलाओं को 33% आरक्षण से बदलेगी मध्य प्रदेश की राजनीति
नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला आरक्षण जब लागू हो जाएगा तो इसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा में भी महिलाओं की 33% भागीदारी सुनिश्चित होना तय है। जिससे राज्य में महिला विधायकों की संख्या 27 से बढ़कर करीब 114 तक होने की उम्मीद जताई जा रही है। बता दें नारी शक्ति वंदन कानून 2029 तक लागू होगा।
मध्य प्रदेश विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी का सफर धीरे-धीरे लेकिन मजबूत तरीके से आगे बढ़ा है। साल 1957 के पहले चुनाव में एक भी महिला विधायक नहीं पहुंच सकी थी, जो उस समय की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है। हालांकि 1962 में पहली महिला विधायक के चुने जाने के साथ बदलाव की शुरुआत हुई।
इसके बाद महिलाओं की संख्या में क्रमिक वृद्धि देखने को मिली। 1967 में यह आंकड़ा दो तक पहुंचा, जबकि 1970 और 80 के दशक में भी वृद्धि सीमित रही। 1990 के दशक में यह संख्या थोड़ी तेजी से बढ़ी और 1998 तक 14 महिला विधायक विधानसभा में पहुंचीं। 2003 में यह आंकड़ा 18 और 2008 में 25 तक पहुंच गया। हालांकि 2018 में गिरावट के साथ यह संख्या 17 रह गई, लेकिन वर्तमान में फिर बढ़कर 27 हो गई है।
मध्य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में महिलाओं की यह मौजूदगी अब भी अपेक्षाकृत कम मानी जाती है। लेकिन अब नरेन्द्र मोदी द्वारा महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की पहल इस स्थिति को बदल सकती है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो महिला विधायकों की संख्या लगभग 75 तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ आंकड़ों में वृद्धि नहीं होगी, बल्कि सामाजिक सोच और राजनीतिक भागीदारी में बड़ा बदलाव भी लाएगी। महिलाओं ने अब तक मिले सीमित अवसरों में भी अपनी क्षमता साबित की है, ऐसे में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलने पर उनकी भूमिका और प्रभाव दोनों बढ़ने की उम्मीद है।