गुरुग्राम के लग्जरी रियल एस्टेट बाजार में 271 करोड़ रुपये की एक डील ने देशभर का ध्यान खींचा है। फरीदाबाद के ऑटो-कंपोनेंट कारोबारी मानव सरदाना ने DLF के सुपर-लग्जरी प्रोजेक्ट ‘द डाहलियाज’ में करीब 17,200 वर्गफुट का पेंटहाउस खरीदा है। इस सौदे को एकल आवासीय यूनिट के लिए भारत की सबसे बड़ी डील में से एक बताया जा रहा है। लेकिन इस कहानी का असली दिलचस्प पहलू सिर्फ पेंटहाउस की कीमत नहीं, बल्कि वह कारोबारी परिवार है, जिसकी संपत्ति और कारोबार की पृष्ठभूमि ने मानव सरदाना को देश के हाई-एंड रियल एस्टेट खरीदारों की सूची में ला खड़ा किया है।
1. 271 करोड़ की डील ने क्यों मचाई हलचल?
मानव सरदाना ने गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड, सेक्टर-54 स्थित DLF के ‘द डाहलियाज’ में करीब 271 करोड़ रुपये का पेंटहाउस खरीदा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस यूनिट का सुपर एरिया लगभग 17,200 वर्गफुट है, जबकि कारपेट एरिया करीब 10,500 वर्गफुट बताया गया है।
अगर सुपर एरिया के आधार पर कीमत देखें तो यह करीब 1.58 लाख रुपये प्रति वर्गफुट बैठती है। वहीं कारपेट एरिया के हिसाब से कीमत करीब 2.6 लाख रुपये प्रति वर्गफुट तक पहुंच जाती है। यही आंकड़ा इस डील को सामान्य लग्जरी घर की खरीद से अलग बनाता है।
इस सौदे का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि दिल्ली-एनसीआर का गुरुग्राम अब सिर्फ कॉरपोरेट ऑफिस और आईटी कंपनियों का केंद्र नहीं रह गया है। गोल्फ कोर्स रोड और आसपास का इलाका देश के सबसे महंगे लग्जरी रियल एस्टेट बाजारों में अपनी जगह बना चुका है। यहां घर अब केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि प्राइवेसी, सुरक्षा, प्रतिष्ठा और निवेश का प्रतीक बन रहे हैं।
2. कौन हैं मानव सरदाना? कारोबार की जड़ें पांच दशक पुरानी
मानव सरदाना का नाम भले ही इस 271 करोड़ रुपये की डील के बाद सुर्खियों में आया हो, लेकिन उनका कारोबारी परिवार दशकों से उद्योग जगत में सक्रिय है। सरदाना परिवार का प्रमुख कारोबारी आधार ऑटोमोबाइल कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग रहा है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार मानव सरदाना के पिता एस.बी. सरदाना ने वर्ष 1969 में जगजीत सिंह के साथ मिलकर फरीदाबाद में इंपीरियल ऑटो इंडस्ट्रीज की सह-स्थापना की थी। शुरुआती दौर की छोटी विनिर्माण इकाई समय के साथ ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए महत्वपूर्ण कंपोनेंट बनाने वाली कंपनी में बदल गई।
इंपीरियल ऑटो इंडस्ट्रीज मुख्य रूप से वाहनों में इस्तेमाल होने वाले फ्लूइड ट्रांसमिशन प्रोडक्ट्स से जुड़ी रही है। इनमें हाई-प्रेशर पाइप, मेटल ट्यूब और रबर होज असेंबली जैसे उत्पाद शामिल हैं। यानी मानव सरदाना की पृष्ठभूमि सीधे तौर पर रियल एस्टेट से नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोबाइल कंपोनेंट बिजनेस से आती है। यही वजह है कि 271 करोड़ की प्रॉपर्टी खरीद को सिर्फ एक रियल एस्टेट निवेश के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता।
3. Warburg Pincus से डील के बाद बदली तस्वीर
सरदाना परिवार के कारोबार के लिए मार्च 2022 महत्वपूर्ण साल रहा। वैश्विक प्राइवेट इक्विटी निवेशक Warburg Pincus ने इंपीरियल ऑटो इंडस्ट्रीज का अधिग्रहण किया। इस सौदे के बाद सरदाना परिवार को बड़ी मात्रा में लिक्विडिटी हासिल होने की बात सामने आई।
यहीं से इस कहानी का एक महत्वपूर्ण आर्थिक पहलू सामने आता है। किसी बड़े पारिवारिक कारोबार में हिस्सेदारी की बिक्री से मिलने वाली पूंजी अक्सर अगली पीढ़ी के लिए नए निवेश के रास्ते खोलती है। ऐसे में रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग और दूसरे कारोबारों में पूंजी का इस्तेमाल स्वाभाविक कारोबारी रणनीति हो सकता है।
मानव सरदाना भी ऑटो पार्ट्स, मैन्युफैक्चरिंग और रियल एस्टेट से जुड़ी विभिन्न कंपनियों में निदेशक और सक्रिय कारोबारी भूमिका निभाते रहे हैं। इसलिए 271 करोड़ की यह खरीद उनके व्यापक कारोबारी प्रोफाइल का एक हिस्सा मानी जा सकती है।
4. ‘द डाहलियाज’ क्यों बन गया अरबपतियों का पता?
DLF का ‘द डाहलियाज’ गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर विकसित किया जा रहा सुपर-लग्जरी प्रोजेक्ट है। करीब 17 एकड़ में फैले इस प्रोजेक्ट में सीमित संख्या में बेहद बड़े अपार्टमेंट और पेंटहाउस बनाए जा रहे हैं।
प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका एक्सक्लूसिव डिजाइन और कम यूनिट वाला मॉडल है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यहां करीब 420 सुपर-लग्जरी अपार्टमेंट और विशेष डुप्लेक्स पेंटहाउस विकसित किए जा रहे हैं। प्रोजेक्ट में बड़े क्लब हाउस, हरियाली और जल संरचनाओं जैसी सुविधाओं पर भी जोर दिया गया है।
इस प्रोजेक्ट में पहले से कई हाई-प्रोफाइल खरीदारों के नाम सामने आ चुके हैं। शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक मधुसूदन मुरलीधर केला ने यहां करीब 120.71 करोड़ रुपये का अपार्टमेंट खरीदा। क्रिकेटर शिखर धवन का नाम भी करीब 68.89 करोड़ रुपये की खरीद से जुड़ा है।
इससे संकेत मिलता है कि गुरुग्राम में अल्ट्रा-लग्जरी हाउसिंग की मांग सिर्फ स्थानीय कारोबारियों तक सीमित नहीं है। दिल्ली-एनसीआर के बाहर के बड़े शहरों और NRI खरीदारों की भी इस बाजार में दिलचस्पी दिखाई दे रही है।
5. कैमेलियाज के बाद डाहलियाज ने बदला लग्जरी का पैमाना
गुरुग्राम में DLF का ‘द कैमेलियाज’ लंबे समय तक अल्ट्रा-लग्जरी रियल एस्टेट का बड़ा नाम रहा। लेकिन ‘द डाहलियाज’ में 271 करोड़ की डील ने कीमतों का नया बेंचमार्क स्थापित कर दिया है।
यह बदलाव सिर्फ एक प्रोजेक्ट की सफलता नहीं, बल्कि भारत के UHNI यानी Ultra High Net Worth Individuals की बदलती पसंद का संकेत भी माना जा सकता है। देश के बेहद अमीर खरीदार अब बड़े प्लॉट या स्वतंत्र विला के साथ-साथ हाई-राइज लग्जरी अपार्टमेंट को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।
इसकी वजह केवल सुविधा नहीं है। ऐसे प्रोजेक्ट में सुरक्षा, प्राइवेसी, क्लब सुविधाएं, लोकेशन और सीमित संख्या में पड़ोसी—सभी एक साथ मिलते हैं। यानी करोड़ों रुपये खर्च करने वाला खरीदार सिर्फ घर नहीं खरीद रहा, बल्कि एक खास लाइफस्टाइल और एक्सक्लूसिव कम्युनिटी खरीद रहा है।
मानव सरदाना की 271 करोड़ रुपये की खरीद इसी बदलती तस्वीर का बड़ा उदाहरण है। एक तरफ यह डील सरदाना परिवार की कारोबारी ताकत और पूंजी की क्षमता को दिखाती है, तो दूसरी तरफ यह गुरुग्राम के लग्जरी रियल एस्टेट बाजार के तेजी से बदलते पैमाने की कहानी भी कहती है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि भारत में सबसे महंगा घर कहां है, बल्कि यह भी है कि भारत के सुपर-रिच अपनी संपत्ति किस तरह और किस तरह की प्रॉपर्टी में लगा रहे हैं।