नवंबर की शुरुआत भी पेट्रोल-डीजल के पुराने दामों के साथ… राहत बरकरार, लेकिन महंगाई का दबाव कायम!
नवंबर का आगाज हो गया है… त्योहारों का मौसम पीछे छूट रहा है और अब आम आदमी की नजरें महीने के नए खर्चों पर हैं। ऐसे में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर फिलहाल राहत की खबर है। एक नवंबर को तेल कंपनियों ने ईंधन के नए दाम जारी किए हैं, लेकिन कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली से मुंबई और कोलकाता से हैदराबाद तक पेट्रोल-डीजल पुराने भाव पर ही मिल रहा है। यानी महीने की शुरुआत में वाहन चालकों की जेब पर ईंधन की कीमतों का कोई नया बोझ नहीं पड़ा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या कीमतों का स्थिर रहना वास्तव में महंगाई से राहत का संकेत है या फिर यह राहत सिर्फ पंप तक सीमित है?
महीने की शुरुआत, कीमतें जस की तस
एक नवंबर को पेट्रोल-डीजल के दामों में बदलाव नहीं होना निश्चित तौर पर आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। देश की सरकारी तेल कंपनियां रोजाना सुबह छह बजे ईंधन की कीमतें जारी करती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और केंद्र तथा राज्य सरकारों के कर इन कीमतों को प्रभावित करते हैं।
देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल के दाम देखें तो दिल्ली में 102 रुपये 12 पैसे, मुंबई में 111 रुपये 21 पैसे, कोलकाता में 113 रुपये 51 पैसे और चेन्नई में 107 रुपये 76 पैसे प्रति लीटर है। वहीं बेंगलुरु में 111 रुपये 68 पैसे और हैदराबाद में पेट्रोल 116 रुपये 15 पैसे प्रति लीटर बिक रहा है।
डीजल भी महंगा, अंतर बरकरार
डीजल की कीमतों में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में डीजल 95 रुपये 20 पैसे, मुंबई में 97 रुपये 83 पैसे, कोलकाता में 99 रुपये 82 पैसे और चेन्नई में 99 रुपये 55 पैसे प्रति लीटर है। बेंगलुरु में 99 रुपये 56 पैसे और हैदराबाद में 104 रुपये 23 पैसे प्रति लीटर की दर से डीजल मिल रहा है।
यह आंकड़े बताते हैं कि देश के अलग-अलग शहरों में ईंधन की कीमतों का अंतर अब भी काफी बड़ा है। इसकी प्रमुख वजह राज्यों के अलग-अलग कर और शुल्क हैं। यानी कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें समान होने के बावजूद उपभोक्ताओं को अपने राज्य की कर व्यवस्था के हिसाब से कीमत चुकानी पड़ती है।
भोपाल और मध्यप्रदेश के उपभोक्ताओं की चिंता
मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आम आदमी के लिए हमेशा बड़ा मुद्दा रही हैं। खासकर भोपाल में पेट्रोल की कीमत लंबे समय से 114 रुपये के आसपास बनी हुई है, जबकि डीजल भी करीब 100 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर है। ऐसे में कीमतों का स्थिर रहना राहत तो देता है, लेकिन दूसरे राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश के उपभोक्ताओं को सस्ता ईंधन नहीं मिल रहा।
इसका असर केवल निजी वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। डीजल की कीमतों का सीधा संबंध माल ढुलाई, कृषि कार्य, सार्वजनिक परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत से है। इसलिए ईंधन के दाम स्थिर रहने के बावजूद महंगाई का दबाव पूरी तरह खत्म नहीं होता।
असली सवाल, कब मिलेगी बड़ी राहत?
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता और कीमतों में कटौती, दोनों अलग-अलग बातें हैं। पिछले कई दिनों से दामों में बदलाव नहीं होने का मतलब यह नहीं कि आम आदमी को वास्तविक राहत मिल गई है। उपभोक्ताओं को राहत तब महसूस होगी, जब पेट्रोल-डीजल के दाम कम होंगे और उसका असर परिवहन तथा रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई देगा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की चाल, रुपये की विनिमय दर और सरकारों की कर नीति आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों की दिशा तय करेगी।
फिलहाल नवंबर के पहले दिन पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर हैं। न कोई नई महंगाई, न कोई नई राहत… यानी आम आदमी की जेब पर फिलहाल पुराना बोझ ही कायम है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नवंबर में तेल की कीमतें राहत का रास्ता खोलती हैं या महंगाई की चुनौती बरकरार रहती है।
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दाम स्थिर, महंगाई का दबाव बरकरार
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता को राहत कहना अधूरा होगा। असली राहत कीमतों में कटौती से आएगी, क्योंकि ईंधन महंगा रहने का असर केवल वाहन चालकों पर नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ता है